
ब्यावरा/राजगढ़। खुद को कानूनी पकड़ से बचाने के लिए थ्रेसर में कटकर मौत का शिकार हुए युवक को कुछ लोगों ने रेलवे पटरी पर फेंक दिया। यह अमानवीय घटना राजगढ़ जिले के ब्यावरा में सामने आई है। चार दिन पहले रेलवे पटरियों पर मिले युवक के शव की शिनाख्त के लिए पुलिस प्रयास कर रही थी। हालांकि पुलिस को शुरू दिन से आशंका थी कि युवक की मौत ट्रेन से कटने पर नहीं हुई है। बल्कि कहीं से उसे यहां लाकर फेंका गया है। पुलिस ने चार दिन तक इसकी तफशीश की और जो मामला सामने आया वह दिल दहला देने वाला था। आरोपियों ने पुलिस के समक्ष स्वीकार किया है कि डर के कारण थ्रेसर में फंसे शव को ले जाकर रेल्वे ट्रेक पर रख दिया। इसी आधार पर पुलिस ने जांच की और प्रकरण दर्ज किया।
आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज
तीन-चार दिन पहले भोपाल बाइपास पर रेल्वे ट्रैक पर मिले इस शव की शिनाख्त भी हो गई है। 38 वर्षीय युवक की मौत थ्रेशर मशीन में आने से हुई थी। उसका शव थ्रेशर मालिक ने निकालकर रेल्वे ट्रैक पर डाल दिया था। देहात पुलिस के अनुसार मृतक की शिनाख्त कैलाश धोबी के रूप में हुई है। वह बीते पांच-छह साल से पड़ोनिया ही रहता था। बताया जाता है कि वह अशोक नगर का रहने वाला था। थाना प्रभारी संजीत मावई के अनुसार थ्रेशर मालिक मोहन दांगी और दौलतराम दांगी दोनों निवासी पड़ोनिया के खिलाफ धारा-304-ए, 201 के तहत कायमी की गई है।
थ्रेशर मालिक को साक्ष्य छुपाना पड़ा महंगा
भले ही पुलिस की कार्रवाई से डरकर यह कृत्य किया गया हो लेकिन सीधे तौर पर कानून हाथ में लेना गलत है। भले ही थ्रेशर मालिक की नीयत मामले को छिपाने का न रही हो लेकिन कानून तौर पर साक्ष्य छिपाना अपराध की श्रेणी में आता है। पुलिस के अनुसार किसी भी एक्सीडेंटल मामले में हमेशा गैर इरादतन हत्या का ही मुकदमा दर्ज करती है जिसमें कोर्ट में संबंधित को अपना पक्ष रखने का पूरा समय मिलता है। लेकिन इस तरह से अपराध को छिपाने में मामले में संदेह स्वत: ही पैदा हो जाता है। उक्त मामले में भी थ्रेशर मालिक का कृ त्य छिपाने की घटना से अतिरिक्त धारा-२०१ बढ़ गई।
Published on:
27 Feb 2018 07:12 pm
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