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सरकारी कार्यालयों में कामकाज ठप

१४ विभागों और ३६ योजनाओं से जुड़े संविदा कर्मचारियों की जारी है सामूहिक हड़ताल, भाजपा और कांग्रेस दे चुकी है समर्थन

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Rajgarh news

Contractor sitting on the protest demonstration on the Khilchipur-Khuzner Naka.

राजगढ़. लगातार 35 दिनों से स्वास्थ्य विभाग और २० दिन से संयुक्त संविदा कर्मचारी हड़ताल पर बैठे हैं। ऐसे में अब लगभग सभी विभागों का काम प्रभावित हो रहा हैं। भले ही अधिकारी इस बात को न स्वीकारें, लेकिन अपने कार्य को लेकर भटक रहे आमजन या फिर जनप्रतिनिधि, इस बात को स्वीकारने लगे हैं।

यही कारण है कि बिगड़ती व्यवस्थाओं को सुधारा जाए। इसको लेकर कांग्रेस हो या भाजपा के नेता कर्मचारियों को हड़ताल खत्म करने के लिए समझा रहे हैं। वही हड़ताल पर डटे कर्मचारी काम पर लौटने के लिए तैयार नहीं हैं। ऐसे में अब अधिकारियों ने भी उन्हें काम से हटाने वाले चेतावनी पत्र जारी करना शुरू कर दिया हैं। यह पत्र जिला पंचायत और स्वास्थ्य विभाग से जारी हो चुके हैं।

इसका सबसे ज्यादा असर भी इन्हीं दो विभागों में नजर आ रहा हैं। क्योंकि यह विभाग सीधे जनता से जुड़े हैं। जबकि काम प्रभावित होने की बात की जाए, तो चाहे शिक्षा विभाग की बात हो या फिर ई-गर्वनेंस, एनआरएलएम, राजस्व, कृषि आदि सभी में कामकाज ठप होते जा रहे हैं।

इन विभागों के संविदाकर्मी हड़ताल पर
मनरेगा, स्वास्थ्य, आयुष विभाग, सर्वशिक्षा अभियान, फार्मासिस्ट संघ, वाटर शेड़, स्वच्छ भारत मिशन, एनआरएलएम, डीआरडीए, पीएम आवास, कृषि, सिंचाई, महिला बाल विकास, ई-गर्वनेंस, लोक सेवा प्रबंधन, मंडी बोर्ड, लोक सेवा यांत्रिकी, कृषि कल्याण, एमडीएम, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, टाउन एंड कन्ट्री प्लानिंग, प्रधानमंत्री ग्रामीण योजना, पशु चिकित्सा विभाग, मध्यप्रदेश स्रोत सलाहकार विभाग, खेल विभाग, राजस्व विभाग, सामाजिक न्याय एवं निशक्त कल्याण, जनअभियान परिषद आदि।

ये होगा असर: कई विभागों में काम की प्रोगे्रस नहीं होने के कारण उन्हें दिया गया बजट लेप्स हो सकता हैं। ओर यदि बजट लैप्स होता है, तो आगामी साल के लिए केन्द्र से मिलने वाले बजट में कटौत्री होगी। जो न प्रदेश के लिए, बल्कि जिले की जनता के लिए भी नुकसान दायक सिद्ध होगी।


इन कार्यों पर सबसे ज्यादा असर
प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रोगे्रस रुकी।
नरेगा के काम बंद पड़े हैं।
सीएम हेल्पलाइन के प्रकरण नहीं सुलझ रहे।
मध्यप्रदेश प्रधानमंत्री आवास में जिला पहले से दूसरे स्थान पर फिसल गया हैं।
स्वच्छ भारत मिशन के काम नहीं हो रहे।
मध्याह्न भोजन मेें एकाउंट अपडेट नहीं हो रहे।
एनआरएलएम का अनुदान रुका हैं, १० करोड़ के प्रस्ताव रुके पड़े हैं।
कृषि विभाग में किसानों को दिए जाने वाले अनुदान रुके पड़े हैं, जो लगभग दो करोड़ के हैं।
मिट्टी परीक्षण का काम रूका।
आरटीआई की जानकारियां भी लंबित पड़ी हैं।
जननी योजना के तहत चार हजार डिलेवरी के भुगतान रुक गए हैं।
सीएम बाल ह्दय के ऑपरेशन रुके हैं।
एचआईवी की दवाएं नहीं बट रही।
महिला स्वास्थ्य शिविर रुक गए हैं।
नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन के काम रुके हैं, समय सीमा में काम नहीं होने पर पचोर में जुर्माना लग गया।


हमने धरना स्थल पर जाकर संविदा कर्मचारियों का समर्थन किया। बात सही है कि कामकाज प्रभावित हो रहे है, लेकिन सारी मांगे एक साथ नहीं मानी जा सकती, मांगों को पूरा करने में समय तो लगता हैं। हमारे मुख्यमंत्री बहुत ही संवेदनशील हैं और वे शीघ्र अच्छा निर्णय लेंगे।
- रघुनंदन शर्मा, पूर्व विधायक भाजपा


संविदा कर्मचारियों को लंबा समय काम करते हुए हो गया हैं। सरकार को चाहिए कि शीघ्र एक गाइड लाइन के तहत कर्मचारियों को नियमित किए जाए। ताकि वे बगैर खौफ के काम कर सके। हमारी सरकार यदि आती है, तो सबसे पहली प्राथमिकताओं में संविदाकर्मियों को नियमित करना होगा।
- प्रताप मंडलोई, पूर्व विधायक कांग्रेस


जिले में ६५० से अधिक कर्मचारी हड़ताल पर हैं। टेक्नीकल काम से जुड़े अधिकांश कर्मचारियों को संविदा नियुक्ति पर रखा हैं। यह काम नियमित कर्मचारी बहुत कम कार्यालयों में कर पाते हैं। जब हम और नियमित कर्मचारी सभी, एक जैसा काम कर रहे है तो हमें हमेशा हटाने का डर क्यो दिखाया जाता हैं। कई कर्मचारी १५ से २० साल से संविदा पर हैं। सरकार को चाहिए कि वे सभी को नियमित करें और वेतन भी काम के अनुसार बढ़ाया जाए।
- अरुण दुबे, अध्यक्ष संयुक्त संविदा कर्मचारी संघ,राजगढ़


संविदाकर्मियों के हड़ताल पर जाने से परेशानी तो हो रही हैं। डेली अपडेट होने वाले काम रुके रहे हैं, लेकिन हमने अपना टारगेट पहले ही पूरा कर लिया था। इसके कारण ज्यादा परेशानी नहीं होगी, लेकिन कुछ काम तो रुक रहे हैं।
-प्रवीणसिंह, सीईओ जिपं.राजगढ़