विश्व आदिवासी दिवस पर अवकाश पर सरकार का जताया आभार
राजनांदगांव / खैरागढ़. विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासी समाज का विशाल कार्यक्रम शहर के सांस्कृतिक भवन में संपन्न हुआ। तहसील स्तरीय सर्व आदिवासी समाज द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सभा सम्मेलन के बाद विशाल सामाजिक रैली निकाली गई। जिसमें तहसील भर के आदिवासी समाज के लोग बड़ी संख्या में शमिल हुए। इस दौरान कार्यक्रम में गोड़ समाज के जिलाध्यक्ष संतोष नेताम, कंवर समाज जिलाध्यक्ष सुखीराम चंद्रवंशी के मुख्य आतिथ्य में, रामजी सिदार की अध्यक्षता तथा गोड़ समाज खैरागढ़ अध्यक्ष संतराम छेदैया, कंवर समाज अध्यक्ष अर्जुन चंद्रवंशी, जेई पाड़ादाह सुशील कोड़ापे, उषा कोड़ापे चौकी, इंद्रा चंद्रवंशी खपरी, दौवा सिंह शोरी घुमका, संतोष पडोती डोंगरगढ़, अग्रहित मंडावी छुईखदान व अवरीश कुमार बंसोड़ के विशेष आतिथ्य में संपन्न हुआ।
परंपरागत परिधान में शामिल हुए आदिवासी
कार्यक्रम में चर्चा परिचर्चा के बाद कर्मा नृत्य दलों द्वारा आकर्षक प्रस्तुति हुई। आदिवासी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में विशाल रैली का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सामाजिक लोग पूरी तरह परंपरागत वेशभूषा में शामिल हुए। इस दौरान आदिवासि अपने हाथों मे भाला बरछ़ी, तीर कमान, तलवार लेकर रैली में शामिल हुए। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुति रखते हुए सभा सम्मेलन के दौरान तहसील के गातापार जंगल, लोरझरी, कुकरीटोला, पिरचापहाड़ सांकरी के कर्मा दल कर्मा नृत्य की प्रस्तुति दी गई। इस दौरान विश्व आदिवासी दिवस के गठन प्रक्रिया, संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा आदिवासी दिवस की घोषणा की महत्ता पर प्रकाश डाला गया।
निकली विशाल रैली
विश्व आदिवासी दिवस पर सभा सम्मेलन के बाद समाज द्वारा विशाल रैली निकाली गई। रैली सांस्कृतिक भवन से शुरू होकर ईतवारी बाजार से बख्शी मार्ग, गोलबाजार, अस्पताल चौक, बस स्टैंड होते वापस सांस्कृतिक भवन पहुंची। रैली के दौरान तहसील के गातापार जंगल, लोरझरी, कु करीटोला पिरचापहाड़ सांकरी के कर्मा दल द्वारा आकर्षक वेशभुषा में कर्मा नृत्य करते शहर भम्रण करते सांस्कृतिक भवन पहुंची।
सरकार का जताया आभार, परिचर्चा के साथ लिया संकल्प
विश्व आदिवासी दिवस पर प्रदेश में अवकाश घोषित करने पर समाज की ओर से प्रदेश सरकार का आभार जताया। इस दौरान आदिवासी समाज ने आदिवासी दिवस पर रात में प्रत्येक परिवार अपनें घरों के सामने दीप प्रज्जवलित भी करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में तहसील स्तर पर सभी गांवों के आदिवासी बड़ी संख्या में शामिल हुए।