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लोक सांस्कृतिक संस्था ‘मयारू माटी’ की कर्णप्रिय छत्तीसगढ़ी गीतों की प्रस्तुति बनी ‘धरोहर’ …

यू-टयूब में धूम मचा रहे महादेव हिरवानी और शैल किरण के छत्तीसगढ़ी गीत

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'Dharohar' became a performance of the popular Chhattisgarhi songs of folk cultural organization 'Mayaru Mati' ...

लोक सांस्कृतिक संस्था 'मयारू माटी' की कर्णप्रिय छत्तीसगढ़ी गीतों की प्रस्तुति बनी 'धरोहर' ...

राजनांदगांव. लॉकडाउन के चलते अपने घरों में कैद होकर बोर हो रहे लोगों को इन दिनों लोक गायक महादेव हिरवानी व शैल किरण के छत्तीसगढ़ी कर्णप्रिय गीत काफी सुकुन पहुंचा रहे है। छह गीतों की श्रृंखला के साथ यू-टयूब में श्रोताओं और छत्तीसगढ़ी गीतों के प्रेमी लोगों की पहली पसंद बनी। इन गीतों को 'मयारू माटीÓ की गायिका प्रतिमा गोडिय़ा और धरोहर की संगीता साहू ने अपने सुमधुर स्वर दिये हैं।

वाद्ययंत्र संयोजक गोविंद साहू ने बताया कि यू-टयूब में धूम मचा रहे इन सुमधुर गीतों को संगीत संयोजना गीतकार और संगीतकार आत्माराम कोशा 'अमात्य' ने दी है। गुंडरदेही के रागदीप स्टुडियो से स्वरांकित इन गीतों में शहर की लोकप्रिय गायिका शैल किरण ने अपनी आवाज दी है। इनके द्वारा गाए गए सुप्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी गीत-'तोला फूंदरा मंगाएव दरोगा' की काफी धूम बनी हुई है। वही लोक गायक महादेव हिरवानी द्वारा गाए लोक भक्ति सांग 'यहां मां...ले वहां मां कूद गे रे...' को काफी लाइक किया जा रहा है।

यू-ट्यूब में सुन रहे हैं लोग

मयारू माटी के संचालक कवि/ साहित्यकार शेर सिंह गोडिय़ा लोक कलाकार गोविंद साव ने बताया कि कवि/ साहित्यकार एवं लोक संगीतकार कोशा द्वारा 20 वर्ष पूर्व संगीतबद्ध बहुत खूबसूरत और सुमधुर गीत 'डोगा अरझगे मझधार मं' को लोग यू-ट्यूब में बड़े चाव से सुन रहे हैं। इसी तरह महादेव हिरवानी के गाए 'मै दुरभागी मया नी पायेंव' और शैल किरण के गाए... ओ... संगवारी रे... गीत काफी पंसद किये जा रहे है।

कर्णप्रिय गीतों की लोग कर रहे प्रशंसा

साव ने बताया कि संगीतकार और कवि कोशा द्वारा संगीतबद्ध इन कर्णप्रिय व लोक धुनों से आबद्ध गीतों को सून कर छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध गीतकार मुकुंद कौशल, साहित्यकार डॉ. संतराम देशमुख 'विमल', चंदैनी गोंदा के पूर्व उद्घोषक व साहित्यकार धर्मी प्रो. सुरेश देशमुख, लोक कला धर्मी डॉ. विकास अग्रवाल, चेतन भारती, कुबेर साहू, डॉ. पीसी लाल यादव सहित अन्यान्य लोक कला संगीत-साहित्य से जुड़े लोग प्रशंसा करते थक नहीं रहे है।

फिर से सुनने मिल रहे गीत

ज्ञात हो कि कोशा के लिखे दो गीत 'छत्तीसगढिय़ा बोली तोर हावय बड़ मिठास...' और बबा मंदराजी 'बायोपिक फिल्म मंदराजी में लिए गए थे जिसके संगीतकार गोविंद साव ने बताया कि मयारू मांटी की अभिनव प्रस्तुति से कला-संगीत व साहित्य की धरा राजनांदगांव से लुफ्त होती जा रही कर्णप्रिय सुमधुर और जबरदस्त संगीत वर्षों बाद फिर से सुनने को मिल रहा है।