
धान में गंगई और तना छेदक का बढ़ रहा प्रकोप, क्षेत्र के किसान हो रहे परेशान ...
राजनांदगांव. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, राष्ट्रीय जैविक स्ट्रैस प्रबंधन संस्थान, बरोंडा रायपुर द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र, राजनांदगाव में डीबीटी बायोटेक किसान हब का संचालन केंद्र सरकार द्वारा किया जा रहा है। जिसके तहत राजनांदगाव जिले के अम्बागढ़ चौकी के पांच गांव (सोनसायटोला, भड़सेना, मांगाटोला, सेम्हरबांधा, कौडूटोला) का चयन किया गया है। इन पांच गांवों से 50 किसान चयनित किए गए हैं, जिन्हें खेती के लिए प्रशिक्षण एवं एक तकनीकी जानकारी प्रदान की जा रही है।
इस योजनान्तर्गत किसानों को धान की जिंको राइस, एमटीयू 1010 प्रजाति वितरण किया गया है। फसल कंसा अवस्था में है जिसमें धान की प्रमुख कीट तना छेदक एवं गंगई की समस्या दिखाई दे रही है। पौधे में तना छेदक से नई पत्तियां मुरझा जाती है और वृद्धि वाले हिस्से मर जाते है। इस लक्षण को 'डेड हार्ट' कहते हैं। बड़े पौधों में तरुण लार्वा पत्तियों खासकर पत्ती आवरण में छोटे-छोटे छेद बनाते है। वयस्क लार्वा पर्वो (इंटरनोड्स) के आधार पर छेद करते है और पौधे के अंदर घुसकर संवहनी ऊतकों को खा जाते है। कभी-कभी उन्हें पूरी तरह खोखला कर देते है। ये पौधे काम विकसित होते है और इनकी पत्तियों का हरा रंग उड़ा हुआ होता है।
धान के पौधों की वृद्धि रूक रही
ये पत्तियां बाद में सुखकर सिकुड़ जाती है और अंत में गिर जाती है बालियों में दाने नहीं भरते, इस स्थिति को 'ब्लाइट हेड' या 'बालियों का सफेद' पडऩा कहते है। इसी प्रकार गंगई कीट लार्वा अवस्था धान मे प्रकोप करती है, जिसके कारण घाव के समान संरचना पौधो में दिखाई देती है एवं इसके कारण पत्तियां चमकीली चांदी के समान दिखाई देने लगती है। जिससे पौधों की वृद्धि रुक जाती है एवं बालियों में दाने नहीं भरते।
कीटनाशक का करें छिड़काव
कृषि विज्ञान केंद्र, राजनांदगाव के वैज्ञानिक गुंजन झा ने बताया कि तनाछेदक में प्रारंभिक अवस्था में जैविक नियंत्रण के लिए फेरोमोन ट्रैप तथा ल्योर (स्किरपोपैगा इंसर्तुलस) 40-50 मीटर की दूरी पर 5 नग/एकड़ खेत में लगाना चाहिए व तनाछेदक का प्रकोप अधिक होने पर कार्टप हाईड्रोक्लोराइड 8 किग्रा/ एकड़ तथा गंगई कीट की समस्या आने पर प्रिपरोनिल 5 एससी 500 एमएल/एकड़ की दर से छिड़काव किया जाए।
Published on:
20 Aug 2020 08:05 am
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