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पेयजल व्यवस्था में लापरवाही, ३ सालों से तीनों टंकियों की नहीं हुई है सफाई

वर्षों से पिला रहे गंदा पानी

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सफाई में ध्यान नहीं... इसी जर्जर टंकी से डोंगरगांव के लोगों को नगर पंचायत द्वारा पानी सप्लाई की जा रही है। इस टंकी की सफाई 3 सालों से नहीं हो पाई है।

राजनांदगांव / डोंगरगांव. शहर को पेयजल सप्लाई करने वाले तीनों पानी टंकियों की वर्तमान स्थिति देखकर स्वच्छ पेयजल के दावों की पोल खुल जाएगी। इस ओर ना तो नगर पंचायत के किसी जनप्रतिनिधि का ही ध्यान है और ना ही स्थानीय प्रशासन को ही इसकी सुध है।

सीढिय़ों में फिसलन देखकर मजदूर मना कर रहे काम करने से
मिली जानकारी के अनुसार विगत तीन सालों से टंकी की सफाई नहीं हुई है और टंकी से रिसते पानी के कारण टंकी पर चढऩे के लिए बनी सीढ़ीयों पर भरपूर फि सलन है इसलिए कोई कामगार सफ ाई करने के लिए तैयार नहीं। यही नहीं पानी की टंकी के ऊपर काई और गंदगी के चलते खरपतवार भी उग आये हैं। स्वच्छता के नाम पर डोर-टू-डोर के दावों के विपरीत निर्मित पानी टंकी के बाउंड्री वाल के भीतर मलमूत्र और गंदगी रूटीन प्रसाधन केंद्र हो गया है। पेयजल सप्लाई के इस केंद्रीय सुविधा का ऐसा बुरा हाल नगर प्रशासन की नाक के नीचे स्वच्छता का असली चेहरा बयां कर रहा है, जबकि स्थानीय नागरिक नगर पंचायत व्दारा प्रदाय किये जाने वाले नलों के पानी को शुद्ध मानकर उपयोग कर रहे हैं।

पेयजल जैसे गंभीर विषय पर अनदेखी कहां तक जायज है
डोंगरगांव की पूरी आबादी को पीने की पानी सप्लाई करने वाले पानी टंकी की आखिरी सफाई 2015 में की गई थी हालांकि यह सफ ाई नगर पंचायत किसी विशेषज्ञ की जगह अपने रूटीन कर्मचारियों से करवाती थी लेकिन वह भी विगत तीन सालों से नहीं की गई है और प्रतिवर्ष इसकी सफाई किया जाना अति आवश्यक है ताकि पानी बैक्टीरियल इन्फेक्शन से बच सके, लेकिन पेयजल जैसे गंभीर विषय पर अनदेखी कहां तक जायज है।

सीढ़ीयों पर फिसलन, उग आए हैं खरपतवार जिससे हो रही परेशानी
डोंगरगांव के पुराने टंकी के पास जेन्ट्स क्लब मैदान के पास नजारा प्रतिदिन मल-मूत्र त्यागने वालों का अड्डा बन गया है। बाउंड्री वॉल के टूटते गेट के भीतर जाने वालों के लिए यह खुला पेशाबघर होकर रह गया है। जहां बदबूदार माहौल के चलते कर्मचारी भी वहां जाने से कतराते हैं। ऐसे में पानी टंकी की सफ ाई दूसरा पहलू बनकर रह गया है जबकि वार्ड क्रमांक 8 राजीव नगर में रिसते पानी टंकी से पूरा निर्माण काई युक्त हो चुका है। सीढ़ीयों पर फिसलन है तथा उगे खरपतवार से यह टंकी अपने आप में गंदगी बयां करती है। नागरिक सुविधाओं के लिए लगातार पानी टंकियों का निर्माण हो रहा है लेकिन इन पुराने महत्वपूर्ण पेयजल सप्लाई केंद्रों का बुरा हाल किसी से छुपा नहीं है। बढ़ती मौसमी बीमारियों के लिए प्रशासन स्वच्छ पेयजल के इस्तेमाल की अपील लोगों से तो कर रही है लेकिन सार्वजनिक पेयजल की व्यवस्था को लेकर इस कदर लापरवाही नागरिकों के स्वास्थ्य से जानबूझकर खिलवाड़ है। समय रहते नगर पंचायत नहीं जागा, तो यह पेयजल कोई गम्भीर संकट ना बन जाए।

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