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फर्जी बिल बनाकर लाखों का भुगतान, जनपद के अफसरों की भूमिका संदग्धि

CG News: जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो गांव के विकास की परिकल्पना कैसे की जा सकती है । ताजा मामला जनपद पंचायत डोंगरगढ़ का सामने आया है।

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फर्जी बिल बनाकर लाखों का भुगतान, जनपद के अफसरों की भूमिका संदग्धि

फर्जी बिल बनाकर लाखों का भुगतान, जनपद के अफसरों की भूमिका संदग्धि

डोंगरगढ़। CG News: जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो गांव के विकास की परिकल्पना कैसे की जा सकती है । ताजा मामला जनपद पंचायत डोंगरगढ़ का सामने आया है। जिसमें जनपद के जिम्मेदार अधिकारियों पर मोटी रकम लेकर पंचायत के सैकड़ों फर्जी बिलों को पास करने का आरोप लग रहा है। बताया जाता है कि पहले चरण के मतदान से कुछ दिन पहले ही डोंगरगढ़ जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले 100 से अधिक पंचायत में 15वें वित्त की राशि क्रेडिट हुई । यह राशि जो गांव के विकास कार्य में खर्च होनी थी। उस राशि को अधिकारी सरपंचों की मदद से बंदरबांट कर लिए हैं।

बताया जाता है की 2023-24 मे 15 वे वित्त की जिस राशि को टाइड व अनटाइड के रूप मे उपयोग करना था जिस राशि का गांव में स्वच्छता उन्मूलन के लिए खर्च करना था, स्वच्छ जल पर जो राशि खर्च करनी थी। पंचायत के स्टेशनरी में जो खर्च करना था। ऐसे सप्लाई के कार्यों में भारी भरकम फर्जीवाड़ा कर गांव के चुने हुए प्रतिनिधि ही अधिकारियों की मदद से पैसे को हजम कर चुके हैं। वहीं सीसी रोड, नाली जिसे कार्यों में भी जनपद के इंजीनियरों की मदद से भारी भरकम फर्जी बिल निकाला गया है। छोटे पंचायत के ग्रामीणों की मानें तो उनके पंचायत में 15 से 20 हजार का फोटो कॉपी का बिल लगा है और ऐसे बिल भी सरपंच अधिकारियों के साथ मिलकर निकाल लिया है।

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धार्मिक आयोजन का लगा फर्जी बिल
जनपद के बड़े पंचायत के ग्रामीणों की माने तो उनके पंचायत में दुर्गा पूजा में गांव में मिठाई वितरण का बिल लगा कर 30 से 40 हजार के कई बिल निकाल लिए गए हैं । जबकि ऐसा कार्य कोई हुआ ही नहीं। ग्रामीणों की मानें तो साल में दो राष्ट्रीय पर्व होता है उसमें दोनों पर्व को मिलाकर भी इतना खर्च नहीं होता जितना इस वित्त वर्ष में देखा जा रहा है।


बिजली के सामानों की फर्जी खरीदी
सप्लाई के कामों में किस हद तक पंचायत मे फर्जी बिल का खेल खेला जा रहा है। इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि जनपद के बड़े-बड़े पंचायत मे हर दो-तीन माह में एलईडी बल्ब खरीदी, होल्डर, तार जैसे फर्जी खरीदी होती है। जो कि कागजों तक ही सीमित रहती है। हाल के दिनों में ज्यादातर बड़े पंचायत में ऐसे कई खरीदी हुई है।

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घर-घर पहुँच रहा जल, इसके बाद भी हैंडपंप मरम्मत
केंद्र द्वारा भेजी गई जिस राशि का उपयोग गांव के छोटे, बड़े हर वर्ग को स्वच्छ पानी मुहैया कराने के उद्देश्य जिस राशि को खर्च करना होता है। उस राशि में भी प्लम्बर दुकानदारों की मदद से फर्जी बिलों का उपयोग कर निकाल लिया गया है। बताया जाता है कि जल संरक्षण के नाम 10 लाख से अधिक की राशि इस वित्त वर्ष में खर्च की जानी है। परंतु जमीनी हकीकत कुछ और है ।

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