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आंधी के साथ हुई इलाके में तेज बारिश

सुबह से उमस ने किया परेशान

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आंधी के साथ हुई इलाके में तेज बारिश

राजनांदगांव / खैरागढ़. शहर सहित इलाके में शुक्रवार शाम को मौसम में आए बदलाव के बाद जमकर आंधी-तूफान और बारिश के चलते जमकर परेशानी उठानी पड़ी। नौतपा के खत्म होने के बाद से ही तापमान में काफी बढ़ोत्तरी हो गई थी। दिन का तापमान लगभग 46 डिग्री के पार चल रहा था। तेज धूप और गर्मी से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया था। शुक्रवार के शाम मौसम ने करवट लेते तेज हवा के साथ बारिश से भीषण गर्मी से राहत मिली। शुक्रवार को हुई बारिश के बाद अगली सुबह गर्मी से थोड़ी राहत तो मिली। लेकिन हवा कम चलने के कारण लोग दिनभर उमस से परेशान रहे। शनिवार को बदली छाने से गर्मी से थोड़ी राहत तो मिली लेकिन हवा नही चलने से तेज उमस ने लोगों को हलाकान कर दिया।

अंधड से गिरे पेड़, घंटों रही बिजली गुल
शहर सहित इलाके में तेज आंधी तूफान के चलते मुख्य मार्ग, सिविल लाईन सहित ग्रामीण इलाकों में कई पेड़ एवं डंगालिया टूटकर गिरने के कारण आवाजाही में परेशानी उठानी पड़ी। शुक्रवार शाम तेज हवा के साथ हुई बारिश के चलते शहर सहित इलाके में बिजली व्यवस्था भी घंटों बाधित रही। आंधी तूफान के चलते पूरे शहर की बिजली सप्लाई बंद कर दी। आंधी तूफान थमने के बाद ही बिजली सप्लाई चालू की गई। बिजली बंद होने के चलते शहर भर में शाम को पानी की सप्लाई भी बंद रही।

सुरक्षा के कारण बंद होती है बिजली
बिजली विभाग के अधिकारियों ने बताया कि तेज आंधी तूफान से कई बार बिजली खंभे सहित तार टूटकर गिर जाते है। तेज हवा के चलते पेड़ भी तार के चपेट में आ जाते है। इसलिए बिजली की सप्लाई बंद की जाती है। बारिश के सीजन में कई बार इस तरह की घटनाएं सामने आती है। इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से बिजली आपूर्ति बंद की जाती है।

100 साल पुराना वृक्ष हुआ धराशाही
डोंगरगढ़. ग्राम ढ़ारा में बीती रात आई आंधी तूफान के चलते लगभग 100 साल पुराना वृक्ष धराशाई हो गया। वृक्ष से गिरने से ग्राम के निवासी बांकेलाल वर्मा का मकान चपेट में आ गया व पूरी तरह से ध्वस्त हो गया। गनीमत यह रही कि घर में रह रहे परिवार के लोगों कोई चोटे नहीं आई बल्कि काठा में बंधे बैल डर के मारे सहम गए। ग्रामीणों ने बताया कि लगभग 100 साल पुराने सीरीज का यह तो पेड़ अंदर से खोखला हो गया था जिसकी सूचना वन विभाग को दे दी गई थी जबकि यह पेड़ रोड निर्माण के दौरान रोड के दायरे में आ रहा था किंतु किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। बीती शाम आई अंधड़ में यह पेड़ धराशाही हो गया और बिजली के तार को तोड़ते हुए बांकेलाल वर्मा का निवास स्थान में जा गिरा। बांकेलाल बताते हैं कि यह मकान उनके पूर्वजों की निशानी है यदि शासन प्रशासन मुआवजा भी देती है तो वह इतना बड़ा मकान नहीं बना सकते।


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