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बिपरजॉय तूफान के बाद से जलाशय उगलने लगे सोने की मछली…पढ़े पूरी खबर

जिले में बिपरजॉय तूफान के बाद से जलाशयों में पानी की अच्छी आवक होने के कारण मत्स्य उत्पादन बढ़ता जा रहा है। इससे मत्स्य पालन विभाग की आय में भी दुगनी से अधिक हो गई है।

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हिमांशु धवल

राजसमंद. जिले में 2023 में बिपरजॉय तूफान के चलते जलाशयों में पानी की अच्छी आवक होने के बाद से मत्स्य उत्पादन और आय लगातार बढ़ती जा रही है। इस बार भी बारिश अच्छी होने से अधिकांश जलाशय अभी भी लबालब है। इसके कारण मत्स्य का उत्पादन बढ़ता जा रहा है। जिले में इस बार 3200 मैट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य है। वहीं अभी तक 1.24 करोड़ की आय हो चुकी है। सरकार की ओर से मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। देश में 2023 में बिरपजॉय तूफान आया था। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तेज बारिश हुई थी। इसके तहत जिले में अच्छी बारिश होने से अधिकांश जलाशय भर गए। इसके बाद से ही लगातार अच्छी बारिश होने के कारण अधिकांश जलाशय अभी भी लबालब हैं। नहरें सिंचाई के लिए खोली गई है। जलाशय लबालब होने के कारण मत्स्य का उत्पादन भी लगातार बढ़ रहा है। जिले के मत्स्य पालन विभाग के अनुसार 2021-22 में 1500 मैट्रिक टन उत्पादन हुआ था। इस बार इसे बढ़ाकर 3200 मैट्रिक टन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें अभी तक 2010 मैट्रिक टन हो चुका है। नहरें खुलने से जलाशयों में जलस्तर घटने से मत्स्य आखेट में अब तेजी आएगी। इससे शेष आंकड़ा पूरा होने की उम्मीद है। साथ ही 2021-22 में 54 लाख के टेण्डर होते थे जो इस बार 1.24 करोड़ से अधिक पहुंच चुका है। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि बिपरजॉय तूफान के बाद से जलाशय लबालब रहने से सोने की मछली उगल रहे हैं। हालांकि आगामी वित्तीय वर्ष में इसके आंकड़े में और इजाफे की उम्मीद है।

इस तरह होते टेण्डर

जिले में मत्स्य पालन विभाग की ओर से मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए जलाशयों में मछली पालन के लिए ठेका दिया जाता है। इसके तहत आय के हिसाब से चार क्लास निर्धारित की गई है। ए क्लास के ठेके विभाग की ओर से किए जाते हैं। इसके बाद बी क्लास के जिला परिषद और सी क्लास के पंचायतों के माध्यम से ठेके किए जाते हैं।

जलाशयों से प्रतिवर्ष यूं बढ़ी आय

: 54 लाख 2021-2022 में
: 64.66 लाख 2022-2023 में
: 88.62 लाख 2023-2024 में
: 1.24 करोड़ 2024-25 में

यूं बढ़ रहा उत्पादन

: 1500 टन 2021-22 में
: 2000 टन 2022-23 में
: 2500 टन 2023-24 में
: 3200 टन 2024-25 में लक्ष्य

जिले के तालाब

विभागीय जानकारों के अनुसार सापेरी बांध का 19.84 लाख, मानसरोवर का 6.18 लाख, देवगढ़ का 19.84 लाख, चिकलवास का 7 लाख, नंदसमंद का 18.87 लाख और बाघेरी का नाका 7.6 लाख में ठेका हुआ है। हालांकि कई जलाशयों के ठेकों का नवीनीकरण किया गया है। यह सभी ए क्लास के जलाशय है। इसी प्रकार बी क्लास में 10 जलाशय आते हैं। इनका करीब 28 लाख का ठेका हुआ है। सी क्लास के ठेके पंचायत समिति के माध्यम से होते हैं। इनके तहत 25 जलाशयों है। ऐसे में विभाग को 1.24 करोड़ से अधिक की आय हुई है।

बनास नदी का भी हुआ ठेका

बनास नदी का उद्गम स्थल राजसमंद माना जाता है। यह चितौड़ और भीलवाड़ा से होकर गुजरती है। ऐसे में इस बार लम्बे समय बाद इनमें भी मत्स्य पालन का ठेका हुआ है। इससे विभाग को 24.52 लाख रुपए की आय अतिरिक्त हुई है।

आय और उत्पादन में हो रहा इजाफा

जिले में मत्स्य उत्पादन और विभाग की आय दोनों में लगातार इजाफा हो रहा है। इस बार 1.24 करोड से अधिक के ठेके हुए हैं। मत्स्य उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। बिपरजॉय तूफान के बाद से जलाशय में अच्छी पानी की आवक बनी हुई है।

  • सज्जन सिंह देवड़ा, सहायक मत्स्य विकास अधिकारी राजसमंद