
छात्राओं ने सीखी खेती की वैज्ञानिक तकनीक
राजसमंद. कृषि विज्ञान केंद्र में 45 दिनों से चल रहे प्रशिक्षण में छात्राओं ने पौध कटिंग, सिंचाई, दवा छिडक़ाव, बागवानी आदि का प्रशिक्षण को पूरा किया। 14 छात्राओं को दल कृषि महाविद्यालय उदयपुर से आरएडब्ल्यूई कार्यक्रम के तहत (ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव) राजसमंद के कृषि विज्ञान केंद्र आया था। यहां दल ने खेती की वैज्ञानिक तकनीक की बारीकियों को सीखने तथा किसानों के साथ उस ज्ञान को साझा करने का अनुभव प्राप्त किया। छात्राओं को प्रशिक्षण के लिए शहर से सटे भगवान दा कला गांव दिया गया था, जहां के किसानों से मिलकर उनके ग्रामीण परिवेश, खेती के तरीके, उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी जुटाई, सोमवार को छात्राओं को विज्ञान केंद्र में ही वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राधेश्याम पटोदिया, मृदा वैज्ञानिक डॉ. मनीराम ने बागवानी में केवड़ा के पौधों की कटिंग तैयार करने का प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया।
वैज्ञानिक बोले किसान रिजके में लगाएं पपीते
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को रिजके में पपीते की खेती करने की सलाह दी है। वैज्ञानिकों का दावा है कि अगर किसान रिजके में पपीता लगाते हैं, तो हजारों रुपए की कमाई भी कर सकते हैं। केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं हेड डॉ. आरएस पाटोदिया ने बताया कि पपीता आमतौर पर 6 गुणा 6 फीट की दूरी पर लगाया जाता है एवं रिजके की क्यारी भी अक्सर 6-7 फीट चौड़ी होता है। इन क्यारियों की डोली पर 6 फीट की दूरी पर 1 गुणा 1 फीट का गड्ढा खोदकर उसमें 5 किलो सड़ी हुई गोबर की खाद अथवा 2 किलो वर्मीकम्पोस्ट, 200 ग्राम सुपरफास्फेट अथवा 100 ग्राम डीएपी. खाद का मिट्टी के साथ मिश्रण बनाकर गड्डा भरकर वापस डोली बना देवें। इस डोली पर उन्नत किस्म का पौधा लगाकर हल्की सिंचाई कर देवें। पपीता का पौधा डोली पर होने से पानी खेत में भरने के बाद भी पौधे के पास पानी नहीं होने से पौधा नष्ट नहीं होगा। पाटोदिया ने बताया कि वर्तमान में कृषि विज्ञान केन्द्र की नर्सरी में किसानों के लिए पपीता की उन्नत किस्म ताईवान रेड लेडी -786, नींबू एवं अनार के पौधे उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि अगर किसान रिजके की खेती के साथ साथ पपीता की खेती अन्तरासस्य के रुप में करते हैं तो एक बीघा खेत में 350-400 पपीता के पौधे लग सकते हैं, जिससे 40-50 हजार रुपये की अतिरिक्त आमदनी की जा सकती है।
Published on:
30 Aug 2018 05:12 pm
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