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जहां बदबू , वहां अब सुकून: नाथद्वारा का डंपिंग यार्ड बना ग्रीन-इको ज़ोन, गायों के गोबर से तैयार कर रहे वर्मी कंपोस्ट

शहर से हर रोज निकलने वाला करीब 14 से 15 टन गीला और सूखा कचरा गुंजोल में बने नगरपालिका के डंपिंग यार्ड में अब कई दिनों तक पड़ा रहकर सड़ता और इधर-उधर फैलता नहीं है।

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Green Eco Zone

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नाथद्वारा. शहर से हर रोज निकलने वाला करीब 14 से 15 टन गीला और सूखा कचरा गुंजोल में बने नगरपालिका के डंपिंग यार्ड में अब कई दिनों तक पड़ा रहकर सड़ता और इधर-उधर फैलता नहीं है। न ही इसमें खुले घूमने वाले गोवंश और अन्य मवेशी घुसकर मुंह मारते हैं, बल्कि इसे खाद और कंपनियों के लिए रो-मटीरियल के रूप में परिवर्तित किया जा रहा है। डंपिंग यार्ड के आसपास आने वाले लोग अब बदबू के कारण नाक-भौं सिकोड़ने पर मजबूर नहीं होते। अब यह क्षेत्र हरियाली, साफ हवा और सुकून देने वाले वातावरण का अहसास कराता है।

गुंजोल ग्राम पंचायत में काली मगरी के पास बने इस डंपिंग यार्ड की नगरपालिका ने महज 11 माह में तस्वीर बदल दी है। कहा जा रहा है कि इसे और बेहतर बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। डंपिंग यार्ड के बाहरी क्षेत्र में विकसित किया गया ट्रेकिंग-वे सुबह की अच्छी सैर के लिए मुफीद बन गया है। नगरपालिका आयुक्त खुद यहां सुबह सैर करने आ रहे हैं और वह अपनी मॉर्निंग वॉक के साथ ही कचरा निस्तारण के पूरे सिस्टम की मॉनिटरिंग भी कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि पत्रिका ने गुंजोल में काली मगरी क्षेत्र में बने नगरपालिका के डंपिंग यार्ड में अधूरी चारदीवारी में घुसकर लावारिस गायों-बछड़ों व अन्य मवेशियों के प्लास्टिक कचरा व वेस्ट खाने, कचरा जलाने से कई दिनों तक धुंआ उठने, गंदगी फैलने, आसपास का वातावरण दूषित होने सहित यार्ड के बिगड़े हुए हालातों पर 21 जनवरी 2025 को नगरपालिका ने डाला कचरा, गोवंश के लिए बन रहा जान का खतरा शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी, जिसके बाद नगरपालिका ने इसमें सुधार शुरू करने की बात कही थी।

गीला कचरा ऐसे बन जाता है खाद

शहर से संग्रहित कर यहां लाया गया गीला और सूखा कचरा संग्रहण वाहन के डंपिंग यार्ड में प्रवेश करते ही पृथक-पृथक खाली कर दिया जाता है। गीला कचरा यहां बनाई गई सीमेंट की कुंडियों (पिट) में डालते हैं। उसमें बायो कुलम और सेनिट्रेड, ये दो प्रकार के पावडर मिलाए जाते हैं। बायो कुलम गीले कचरे को धीरे-धीरे खाद में बदलता है, वहीं सेनिट्रेट मच्छर-मक्खियों और बदबू को खत्म करता है। इसे 7 से 10 दिन में एक बार पलटना पड़ता है। इस प्रकार करीब 45 दिन में गीले कचरे से खाद बनकर तैयार होती है। फिर इस खाद को पिट से बाहर निकालकर छलनी के माध्यम से छाना जाता है और बोरे और कट्टों में पैक कर दिया जाता है।

वर्मी कंपोस्ट भी बना रहे, उद्यानों और स्कूलों में सप्लाई

वर्मी कंपोस्ट बनाने की प्रक्रिया 70 से 80 दिनों की होती है। नगरपालिका के कांजी हाउस और गोशाला से यहां गायों का गोबर लाया जाता है। उसे पिट में डाला जाता है। उपर से केंचुए डाले जाते हैं। केंचुए गोबर को खा-खाकर नीचे उतरते जाते हैं और उपर की सतह पर वर्मी कंपोस्ट बनकर एकत्र होता जाता है। 70-80 दिनों में तैयार इस खाद को हटाकर व केंचुए को अलग कर फिर से पिट में उन्हें गोबर में छोड़कर यही प्रक्रिया वर्मीकंपोस्ट तैयार करने में लगातार अपनाई जाती है। बताया गया कि खाद को नगरपालिका के जितने भी उद्यान हैं, उनमें डाला जा रहा है। इसके लिए उपखंड क्षेत्र के कई सरकारी स्कूलों में पौधों व हरियाली के संवर्धन में काम में लेने के लिए भी भेजा गया है।

संग्रहण और निस्तारणः नगर भी साफ-सुथरा और डंपिंग यार्ड भी

डंपिंग यार्ड में रेप कीपर्स (कचरा बीनने वाले) रिसाइकेबल मटेरियल (पुनर्चक्रण योग्य सामग्री) को छांटते हैं। यह मटेरियल सीमेंट कंपनी में भेजा जाता है। उसके बाद बचा हुआ नॉनरिसाइकेबल मटेरियल या वेस्ट कबाड़ी के पास भेज दिया जाता है, जिसे वह बेच देता है। नगरपालिका का कहना है कि कचरा संग्रहण से निस्तारण तक की इस पूरी प्रक्रिया के बाद कुछ भी नहीं बचता है। शहर से एकत्र गीला और सूखा कचरा शुरू से अंत तक की प्रक्रिया पूरी होने से खत्म हो जाता है।

रोज का कचरा रोज निस्तारण में, ढेर नहीं लगता

खास बात यह है कि अब पहले की तरह कचरा डंप करने और लगातार ढेर लगने की समस्या नहीं है। प्रतिदिन शहर से करीब 14 से 15 टन कचरा एकत्र होता है, जिसे हर रोज इसी तरह पृथक-पृथक कर प्रोसेस में डाल दिया जाता है, जिससे कचरे का निस्तारण भी जल्दी हो जाता है और पर्यावरण भी स्वच्छ रहता है। हवा और आसपास का वातावरण दूषित नहीं होता है। आयुक्त सौरभ कुमार जिंदल का कहना है कि वह डंपिंग यार्ड एरिया में मॉर्निंग वॉक से कचरा निस्तारण की प्रक्रिया व प्रगति की निगरानी कर रहे हैं।

गीले व सूखे कचरे में एकत्रीकरण

गीले-कचरे में सब्जी कटिंग के बाद बचा हुआ वेस्ट, फलों के छिलके, सब्जी मंडी का जैविक कचरा, घरों, रेस्टोरेंट, होटलों इत्यादि से बचा हुआ भोजन, जबकि सूखे कचरे में विभिन्न प्रकार के कागज, पैकेजिंग बॉक्स, प्लास्टिक बोलतें, रेपर, पॉलिथिन की थैलियां सहित अन्य प्रकार की चीजें एकत्र की जाती हैं।

चारदीवारी से सुरक्षित यार्डः छाया-फलदार पौधे लगाए

डंपिंग यार्ड अब चारदीवारी से पूरी तरह पैक है। बीच में एक बड़ा गेट, जिससे कचरा संग्रहण वाहनों का प्रवेश और निकासी हो रही है। चारदीवारी के बाहर फलदार एवं छायादार पौधे लगाए गए हैं। हरियाली भरे वातावरण से यह बढ़िया ट्रेकिंग एरिया बन गया है। आसपास के क्षेत्र में और भी पौधे लगाने की योजना चल रही है। पालिका ने एक कंपनी को काम दे रखा है और वह निगरानी कर रही है। पौधों की सिंचाई के लिए डंपिंग यार्ड के चारों और अंडरग्राउंड पाइपलाइन बिछाई गई है। यहां खुदी बोरवेल से सप्लाई कर पौधों को पानी दिया जा रहा है।

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