
पूर्वजों के प्रति आस्था के चलते खूब बिक रही मूर्तियां
प्रमोद भटनागर/योगेश श्रीमाली
खमनोर. मिट्टी की मूर्तियों के लिए विश्व प्रसिद्ध मोलेला गांव में इन दिनों दैवीय मूर्तियां ले जाने वालों की रेलमपेल लगी है। मूर्तियां लेने के लिए श्रद्धालु दूर से पैदल आते हैं और सिर पर उठाकर लेकर जाते हैं। वर्तमान में पूर्वज स्थापना का दौर जोरों पर है तो मूर्तियों की बिक्री भी परवान पर है।
मोलेला में इन दिनों पूर्वजों की ूमूॢतयों की मांग ज्यादा है। वहीं, आदिवासी क्षेत्र में भेरूजी (देवराज) की मूर्तियों की खास मांग रहती है। मूर्ति खरीदने वाले आदिवासी रात्रि विश्राम मोलेला में ही करते हैं। पूजा-अर्चना करके फिर मूर्ति लेकर निकलते हैं। रास्ते में विश्राम करने पर मूर्तियों को साफ-सुथरी जगह पर ही रखते हैं। मूर्तियों को लाल व सफेद कपड़े में लपेट कर ले जाया जाता है। इन मूर्तियों को खास वैशाखी पूर्णिमा के दिन रीति-रिवाज व पूजा-पाठ करके स्थापित करते हैं। मूर्तियों में भेरूजी, माताजी, गणेश जी एवं पूर्वज बावजी की खासतौर पर शामिल होती है। गांव के लोगरलाल कुम्हार ने बताया कि मूर्तियां ले जाने का वैशाखी पूर्णिमा तक अंतिम दौर चलता है। राजस्थान, गुजरात व मध्यप्रदेश से भी लोग मूर्तियां लेने यहां पहुंचते हैं। लोक देवी-देवताओं के प्रति आस्था के साथ जुड़े होने से पूरे रीति-रिवाज से ही लेकर जाते हैं।
वर्ष भर की मेहनत का वैशाख में मिलता है मूर्तिकारों को फल
-वैशाख शुक्ल पक्ष के चलते जिले ही नहीं पूरे मेवाड़ में पूर्वज स्थापना का दौर जोरों पर
कुंवारिया. तहसील मुख्यालय सहित आसपास के क्षेत्र में विगत कुछ वर्षों से आम जनता में मृत परिजनों को पूर्वज के रूप में स्थापना करने का चलन काफी बढ़ गया है। ऐसे में इन पूर्वजों की प्रतिमाओं की मांग भी काफी बढ़ी है। इसे कस्बे के मूर्ति कलाकार पूरी कर रहे हैं। वैशाख माह के शुक्ल पक्ष में ही ज्यादातर पूर्वजों की स्थापना की जाती है।
क्षेत्र के लोगों की मान्यता है कि मृत परिजन की आत्मा की शांति के लिए पत्थर की प्रतिमा बनाकर उसकी विधि-विधान व पूजा-अर्चना के साथ स्थापना कराने से मृत आत्मा को शांति मिलती है व घर परिवार पर भी मृत आत्मा का शुभ आर्शिवाद बना रहता है। मुर्तिकार कैलाश यादव, सोनू यादव ने बताया कि पिछले कई वर्षों से मूर्ति बनाने का कार्य कर रहे हैं पर पिछले पांच-सात वर्षांे से तो पूर्वज की स्थापना करने का काफी चलन बढ़ा है। ऐसे में वैशाख माह के शुक्ल पक्ष में पत्थर की मूर्तियों की जबरदस्त मांग रहती है। ऐसे में ज्यादातर लोग तो पहले से ही मूर्तियंा बनवाने का ऑर्डर दे देते हैं। ऐसे ेमं सालभर की मेहनत का फल वैशाख में अवश्य मिलता है। उन्होंने बताया कि पहले समस्त कार्य हाथों से ही होता था, परन्तु मशीनों के चलन से अब काफी समय की बचत होती है व कार्य भी ज्यादा होता है। उन्होंने बताया कि पूर्वज की प्रतिमा तीन सौ से पन्द्रह हजार रुपए तक की होती है। इसमें सबसे पहले पूर्वज (संबंधित परिजन) के चित्र को पाषाण पर उकेरा जाता है, जिसके बाद उसमें मनमोहक रंगो को भरा जाता है, जिससे प्रतिमाएं सजीव सी लगने लगती है।
अपने पूर्वज की मूर्ति ले जाने वाले पीपली अहीरान के भैरूलाल अहीर ने बताया कि उसके काका की प्रतिमा की स्थापना करने के लिए ले जा रहे हैं। पं. मांगीलाल ने बताया कि पूर्वज की स्थापना वैशाख माह के शुक्ल पक्ष में किया जाता है। इसमें भी वर्तमान में काफी लोग दसमी तिथि से पूर्णिमा के मध्य में शुभ मुहूर्त देखकर स्थापना कराते हंै। कस्बे के मूर्ति कलाकारों जिले के साथ ही अन्य स्थानों से भी लोग प्रतिमाएं बनवाने पहुंचते हैं। मूर्तिकार सोनू ने बताया कि इस बार वैशाख माह में कुंवारिया के मूर्ति कलाकारों ने ६०० से ज्यादा प्रतिमाएं बनाई है।
Published on:
19 May 2019 12:41 pm
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