
राजसमंद. शहर में दर्जनों ऑटो परमिट से बाहर दौड़ रहे हैं। इन पर कोई लगाम नहीं होने से ये ५ से २० किलोमीटर तक की दूरी अवैध रूप से तय करने में भी संकोच नहीं कर रहे हैं। इनसे निजी बस संचालकों और रोडवेज को चपत लग रही है, वहीं परिवहन विभाग को राजस्व का चूना भी लग रहा है। सवारियों को भी दर-दर भटकना पड़ रहा है। ऑटों चालकों की लापरवाही इतनी है कि ओवरलोड सवारियों को भरकर जोखिम उठा रहे हैं। इन पर लगाम कसने में जिम्मेदार पूरी तरह उदासीनता हैं। ज्यादातर ऑटो चालक उसी रूट की सवारियों को भर लेते हैं, जहां निजी और रोडवेज बसों के रूट बने हुए हैं। निजी बस संचालकों की मानें तो बस के रूट समय से पूर्व ही ये सवारियों को टेम्पो में बैठा देते हंै। जाने की जल्दी में सवारियां भी निसंकोच बैठ जाती हैं। बस संचालकों का दर्द है कि परमिट लेकर बसें चलाने पर भी उन्हें पूरे रूट पर खाली जाना पड़ता है।
इन रूट पर बिना परमिट के ऑटो
१० से २० ऑटो राजनगर, सनवाड़ हाईवे पर खड़े हो जाते हैं। बस को आता देख ये पहले ही सवारियों को ऑटो में बैठा देते हैं। ये सनवाड़ से सापोल तक २० किमी का सफर तय करते हैं, जबकि परमिट केवल शहरी इलाके का ही है। राजनगर से १५ किलोमीटर केलवा तक भी ऑटो चल रहे हैं। इधर, कांकरोली से भावा, मादड़ी, पीपली, मोही, कुंवारिया तक ऑटो दौड़ रहे हैं। दूसरी तरफ कांकरोली से एमड़ी, भाटोली, नाकली, राज्यावास, ओड़ा, चौकड़ी व रेलमगरा १२ से ३५ किलोमीटर तक दौड़ पड़ते हैं।
बसों के किराए पर कर रहे चोट
ये ऑटो नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे हैं। ऑटो चालक सवारियों से बस किराए की तुलना में अत्यधिक किराया वसूल रहे हैं। ये राजनगर और सनवाड़ से सापोल तक का किराया ३५ रुपए वसूलते हैं, जबकि बस का किराया काफी कम है। कांकरोली से कुंवारिया तक ४० रुपए, ओड़ा, राज्यावास तक का किराया १५ से ३० रुपए है।
जोखिम भरा सफर
परमिट से बाहर तो जा ही रहे हैं, ज्यादा पैसों के लालच में ये ओवरलोड सवारियां भी बैठा रहे हैं। नियमों के हिसाब से एक ऑटो में चार सवारियों को ही बैठाया जा सकता है, वहीं ये १० से १४ सवारियां तक बैठा रहे हैं। ऑटो के आगे-पीछे लटकते हुए जोखिमभरा सफर कर रहे हैं। यात्रियों की मुश्किल यह हैकि जिस रूट पर बस नहीं जाती, उन्हें टेम्पो में मजबूरन बैठना पड़ता है। कुम्भलगढ़ रूट पर टेम्पो चलने से बसों को पर्याप्त सवारियों नहीं मिलती हैऔर बसें सनवाड़ से ही स्थगित कर दी जाती है। ऐसे में केलवाड़ा की सवारियों को आगे कोई साधन नहीं मिलने से उन्हें भटकना पड़ता है। मौके का फायदा उठा टेम्पो चालक ५०० से ८०० रुपए तक किराया वसूलते हैं।
कार्रवाई की जाती है...
परमिट के बाहर टेम्पो चलने पर हमेशा चालान बनाते हैं। निरीक्षण दल द्वारा जांच की जाती है। अब भी ऐसा हो रहा है, तो कार्रवाई की जाएगी।
नैनसिंह सौदा, जिला परिवहन अधिकारी राजसमंद
Published on:
15 Apr 2018 11:38 am
बड़ी खबरें
View Allराजसमंद
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
