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Banas River राजस्थान के इस प्रसिद्ध तीर्थ की ‘गंगा भी हो गई मैली’

श्रीनाथजी की 'यमुना स्वरूपाÓ बनास नदी में कूड़ा-करकट, जिम्मेदार नगरपालिका आज तक नहीं बना सकी उद्धार की योजना  

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Banas River राजस्थान के इस प्रसिद्ध तीर्थ की 'गंगा भी हो गई मैली'

Banas River राजस्थान के इस प्रसिद्ध तीर्थ की 'गंगा भी हो गई मैली'

नाथद्वारा. धर्मनगरी कहीं भी हो, उसकी महिमा ही निराली होती है। परंतु सरकार, जनप्रतिनिधि से लेकर अधिकारी तक बेपरवाह हों तो उसे संवारना तो दूर, जो है उसकी सार-संभाल भी भगवान भरोसे ही हो जाती है। ऐसा ही कुछ बयां कर रही है प्रभु श्रीनाथजी की नगरी नाथद्वारा से होकर गुजर रही बनास नदी की वर्तमान हालत।
प्रभु श्रीनाथजी के यहां बिराजने की वजह से बनास नदी को यमुना स्वरूपा कहा जाता है। इसके आंचल में कंचन जल होना चाहिए, जबकि गर्मी का मौसम आने के साथ ही इसका पैंदा दिखाई देने लगा है। यही नहीं इस पवित्र नदी के पैंदे की जो हालत हैं वो इतनी दयनीय है कि बनास के घाट से लेकर डोलों तक कचरे और गंदगी का अंबार लगा हुआ है। इस गंदगी से यमुना स्वरूपा बनास में जो कुछ पानी बचा हुआ है वो भी खराब होकर सड़ांध मारने लगा है।
शहर में आने वाले श्रद्धालु वैष्णवों में से कुछ ही लोग होंगे, जो यहां के वैभव के दर्शन करने के बाद बनास नदी पर आकर यमुना स्वरूपा के दर्शन करने की लालसा के साथ नहाने की स्थिति में नहीं हो तो हाथ पैर या मुंह धोने की ईच्छा मन में लेकर यहां पहुंचते हंै तो नदी के हालत देखकर मन मसोस कर वापस लौट जाते हैं। गत दिनों यहां अहमदाबाद से आए वैष्णव शैलेश भाई भी इस दौरान बनास पुलिया पर पहुंचे। वे यहां छाया में खड़े रहकर बनास नदी के हालात को देखकर बोले कि ठाकुरजी की नगरी में बदहाल स्थिति को सुधारने के लिये कोई कदम नहीं उठाना यहां के प्रशासन की नाकामी ही साबित कर रहा है। उधर, शहर के कुछ पर्यटन प्रेमियों के साथ शहरवासियों ने कहा कि बनास में अभी पानी नहीं है तो प्रशासन को इस मौके का फायदा उठाते हुए नदी के पेटे में पसरा कचरा और गंदगी को नदी से निकलवाकर साफ करवाना चाहिए। इससे मानसून के समय जो पानी आएगा वो प्रदूषित होने से बच जाएगा। ऐसे में यहां नहाने के लिए पहुंचने वाले लोगों के साथ ही श्रद्धालुओं को भी धार्मिक अनुष्ठान करने में राहत मिलेगी। इसके साथ ही नदी का सौंदर्य भी निखर आएगा। वहीं, पास ही मुक्तिधाम भी है, जिससे यदि किसी का दाहसंस्कार होता है तो कई लोग बनास नदी में नहाने के बाद घर जाते हंै। ऐसी स्थिति में बनास में पानी होने के बावजूद गंदगी पसरी रहने की स्थिति में यहां कोई नहाना पसंद नहीं करता। जबकि, इसे साफ कर दिया जाएगा तो उन लोगों को भी सुविधा मिल सकेगी। इसको लेकर लोगों ने रोष जताते हुए यह भी कहा कि प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधि तक इस ओर ध्यान नहीं दे रहे तो कौन इसकी दशा के सुधारेगा।

घाट भी हो रहे बदहाल
बनास नदी तो बदाहाल है ही, इसके घाट भी काफी बदहाल हो रहे हैं। उन पर भी कचरा पसरा हुआ है। वहीं, कई जगहों पर घाट के पत्थर भी टूट गए हैं। ऐसे में इनकी भी समय रहते मरम्मत करा दी जाए तो यमुना स्वरूपा बनास अपने पुराने स्वरूप में लौट सकती है।

जलकुंभी का भी हो समाधान
बनास नदी के क्षेत्र में गनी बाबा की मजार के पास जमा पानी में बड़ी मात्रा में जलकुंभी पसरी हुई है। जो सर्दी के समय तो दाह से सूख गई थी, जबकि अब एक बार फिर से पूरे पानी में पसरती जा रही है। इसको भी समय रहते निकाल दिया जाए तो आने वाले समय में पर्याप्त पानी होने पर इसे पूरी नदी में फैलने से रोका जा सकता है।