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खरबूजा, तर काकडी व टमाटर की बंपर पैदावार

—गर्मी में बढ़ी रसीले खरबूजे की मांग—फार्म पौण्ड के पानी का किया उपयोग खेती का स्वरूप बदल रहा है। एक दशक पहले जहां गेहूं, चना व मक्का की फसल लहलहाती थी, अब वहीं उन्नत तकनीकी से खरबूजे, ककडी व टमाटर की बढिय़ा पैदावार हो रही है।
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खरबूजा, तर काकडी व टमाटर की बंपर पैदावार

खरबूजा, तर काकडी व टमाटर की बंपर पैदावार


राजसमंद जिले के झौर के चावड मंगरी क्षेत्र में किसान मुंकुदमाधव चौहान ने खेत के समीप फार्म पौंड बनवाया। यहां से पानी को बूंद- बूंद सिंचाई के माध्यम से खेतों तक पहुंचाया। उन्होंने 20 बीघा में खरबूजा, 16 बीघा में तरकाकडी तथा 7 बीघा में टमाटर की फसल की बुवाई की । इससे वे बंपर पैदावार ले रहे हैं।

मिठास के कारण भरपूर मांग
यहां की तरकाकडी, खरबूजा व टमाटरों की जिले में ही भरपूर मांग है। व्यापारी भी इन खरबूजों की मिठास से प्रभावित होकर इन्हें भीलवाड़ा व उदयपुर मंडी तक ले जा रहे हैं।

वर्षाजल का किया उपयोग
किसान ने बागवानी विभाग के माध्यम से खेतों के समीप सौ गुणा सौ मीटर लम्बा व चौड़ा तथा दस फीट गहरा फार्म पौण्ड खुदवाया। इसमें बारिश के पानी का भण्डारण होता है

ट्रैक्टरों में लाते हैं खरबूजा
खेतों में एकत्रित खरबूजों को मजदूरों से तुड़वाया जाता है। ट्रैक्टरों की सहायता से इन्हें खेतों से बाहर लाया जाता है ताकि कम श्रम लगे व इनकी गुणवत्ता बनी रहे।

मिश्रित खेती लाभ का सौदा
किसान ने मिश्रित खेती को अपनाया है। खरबूजों के पौधों के कुछ दूरी के अंतराल में अमेरिकन भुट्टो के पौधों का भी बीजारोपण किया है। इससे दोहरा लाभ मिलता है।

उपचारित बीजों से अच्छा उत्पादन
किसान मुकेश यादव ने बताया कि उन्नत उपचारित बीजों के प्रयोग से बंपर पैदावार होती है। यह गुणात्मक रूप से भी श्रेष्ठ होती है।

योगेश श्रीमाली — कुंवारिया

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