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बेलगाम हो गई है नौकरशाही- माहेश्वरी

- विधानसभा में प्रशासनिक सेवा एवं पेंशन पर अनुदान मांग पर चर्चा

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बेलगाम हो गई है नौकरशाही- माहेश्वरी

बेलगाम हो गई है नौकरशाही- माहेश्वरी

राजसमंद. सदन में प्रशासनिक सेवा एवं पेंशन पर अनुदान मांग पर चर्चा करते हुए विधायक किरण माहेश्वरी ने बेलगाम नौकरशाही पर नियंत्रण की मांग की। उन्होंने कहा कि अधिकारी स्वयं को जनता का मालिक समझने लगे हैं। सिटीजन विण्डो एवं स्टाफ विण्डो की घोषणा कागजों में रह गई है।
विधायक ने कहा कि जिला कलक्टर, उपखण्ड अधिकारी आदि कार्यालयों के सामने ग्रामीण घंटों बैठे रहते हैं, उन्हें बुलाया नहीं जाता है। पूछने पर कहा जाता है, साहब बैठक में व्यस्त है, बाहर इंतजार करने वालों को यही सुनने को मिलता है। प्रत्येक प्रशासनिक अधिकारी सवेरे 10.00 से 12.00 बजे तक जन सुनवाई का समय रखें। सभी प्रकार की बैठकों के लिए सप्ताह में 2 दिन निश्चित कर दिए जाए। जिला कलक्टर 80 से अधिक समितियों का अध्यक्ष होता है।
किरण ने सुझाव दिया कि प्रशासनिक कुशलता के लिए प्रत्येक जिले में कलक्टर (प्रशासन) एवं कलक्टर (विकास) के पृथक दो पद होने चाहिए। प्रशासनिक अधिकारी उच्चता की मनोग्रंथी से ग्रस्त है। वे सांसदों एवं विधायकों से चर्चा ही नहीं करते। उन सभी समितियों में जहां जन प्रतिनिधि सदस्य है, बैठकों का समय उनसे चर्चा करके ही निश्चित होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर रोष व्यक्त किया कि अधिकारी सूचना के अधिकार के प्रति लापरवाही रखते हैं व सूचनाएं देने से कतराते हैं। सूचना अधिकार के प्रति असंवेदनशील एवं लापरवाह अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने सदन में बताया कि समाज कल्याण विभाग एवं श्रम विभाग में योजनाओं के आवेदन पर अधिकांश प्रलेख अपूर्ण है अथवा प्रक्रियाधीन है, ऐसी टिप्पणी दी जाती है। यह स्पष्ट दर्शाया जाना चाहिए कि क्या प्रलेख और चाहिए अथवा प्रक्रिया किस स्तर पर लंबित है एवं कब पूर्ण होगी। न्यून सरकार और सुशासन के लिए अधिकारियों पर लगाम आवश्यक है।
किरण ने कहा कि 6 लाख पेंशनर्स के 200 करोड़ रुपए बाकी चल रहे हैं। सेवानिवृति से एक-दो दिन पहले 16 सीसी की अथवा अन्य जांच की सूचना दे देते हैं और सेवानिवृति के लाभ रोक लिए जाते हैं। सेवानिवृति के बाद लंबित सभी जांचें एक वर्ष में पूरी करें अन्यथा सेवानिवृति लाभो का पूर्ण भुगतान किया जाए। उन्होंने कहा कि जनकल्याण योजनाओं मेें असंवेदनशीलता रखने वाले अधिकारियों को घर भेज देना चाहिए। श्रमिक कल्याण मण्डल के उदयपुर जिले में 8000 आवेदनों में 6000 और राजसमन्द जिले में 3500 आवेदनों मेें से 1600 आवेदन निरस्त कर दिए गए। यह असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा है। नामान्तरण करवाने में बहुत विलम्ब हो रहा है। राजसमन्द जिले में खमनोर एवं भीम को छोड़ सभी तहसीलों मेें नामान्तरण ऑनलाइन नहीं हुए हैं। नामान्तरण कार्य आवेदन के एक सप्ताह में पूर्ण किए जाए। नामान्तरण प्रक्रिया पूर्णत: ऑनलाइन हो।
अधिकारियों की पदोन्नति उनके कार्य निष्पादन के आधार पर ही होनी चाहिए। किरण ने नरेगा में मस्टररोल जारी करने में हो रहे कथित भारी भ्रष्टाचार की ओर भी सदन का ध्यान आकृष्ट किया।