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श्री द्वारकाधीश के फूल मण्डली और सोने के हिण्डोले के दर्शन में उमड़े श्रद्धालु

गोस्वामी परिवार में विवाद के बीच दूसरे दिन भी परंपरानुसार हुए मनोरथ

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राजसमंद. पुष्टिमार्गीय वल्लभ सम्प्रदाय की तृतीय पीठ प्रभु द्वारकाधीश मन्दिर में अधिकमास मनोरथों के आयोजनों की शुरुआत बुधवार को राजभोग के दर्शन में फूल-मण्डली के साथ हुआ। शाम को प्रभु को सोने के हिण्डोले में बिराजित किया। उत्सवी आगाज के मौके पर पीठाधीश्वर गोस्वामी बृजेश कुमार भी उपस्थित हुए। स्थानीय एवं बाहर आए सैकड़ों श्रद्धालु सुबह से ही प्रभु दर्शन को लालायित थे। प्रतिदिन विविध मनोरथ होंगे, जिन्हें लेकर श्रद्धालुओं में बेहद उत्साह बना हुआ है। सुबह अधिकमास उत्सव के तहत मंदिर में विभिन्न प्रकार की तैयारियां चल रही थी। स्थानीय, किशनगढ़, नडिय़ाद आदि जगहों से श्रद्धालु मनोरथ के लिए आए। करीब १२ बजे तैयारियां पूरी होने पर दर्शन खुले, तो श्रद्धालु उमड़ पड़े। उसके बाद राजभोग की आरती हुई। सुबह श्रृंगार की झांकी के समय तृतीय पीठाधीश्वर गोस्वामी बृजेश कुमार ने प्रभु का श्रृंगार किया। श्रीमस्तक पर मोती के खूंप, चन्दनी विभिन्न छाप के धोती-उपरना, मोती के आभरण धराए गए। उसके बाद राजभोग के दर्शनों में प्रभु को उष्णकालीन सेवा के भाव से गुलाब के फूल की मण्डली में बिराजित किया। इन अलौकिक दर्शनों के लिए सैकड़ों श्रद्धालु मन्दिर परिसर में जमा थे, वहीं कीर्तनकार अधिक मास के पदों का गायन कर भक्तिमय माहौल को द्विगुणित कर रहे थे। सांयकालीन मनोरथों में शयन के दर्शनों में प्रभुश्री को सोने के हिण्डोलने में बिराजित कर दर्शन करवाए गए। उल्लेखनीय है कि अधिकमास में पूरे वर्षभर के मनोरथ एकसाथ करवाए जाते है। इस बार अधिकमास 16 मई से 13 जून तक चलेगा और प्रतिदिन प्रभु को नित्य नए मनोरथों से अंगीकारित किया जाएगा। इन दर्शनों के लिए गुजरात, महाराष्ट्र व देश-विदेश से वैष्णव पहुंच रहे हैं।

पहले दिन सांझी व साहिबान की मंडली के हुए दर्शन
नाथद्वारा. आराध्य प्रभु श्रीनाथजी मंदिर में बुधवार से अधिक मास के श्रीगणेश के साथ ही विविध मनोरथ के दर्शन का सैकड़ों श्रद्धालुओं ने लाभ लिया। इसमें सायंकाल के समय खासी रेलमपेल रही। प्रभु श्रीनाथजी को अधिक मास के अवसर पर वस्त्र सेवा में केसरी धोती पटका एवं श्रीमस्तक पर केसरी रंग के कुल्हे पर पंख चन्द्रिका की जोड़ एवं शीशफूल श्रीकर्ण में मोती के कुंडल आदि सुशोभित कराये गए। वहीं, अधिकमास के मनोरथ के अन्तर्गत राजभोग की झांकी के समय साहिबान की मंडली धराई गई। जबकि, सायंकाल भोग आरती की झांकी के समय सांझी के मनोरथ के अवसर पर श्रीजी बावा के संमुख मणिकोठा में फूलों से अलौकिक सांझी का अंकन किया गया। इसी प्रकार निधि स्वरूप लाड़ले लालन को भी श्रीजी के अनुरूप राजभोग में मंडली एवं सायंकाल भोग आरती में निज मंदिर के बाहर अलौकिक सांझी धराई गई। वहीं, कीर्तनकारों ने भी विशेष कीर्तन के गान किए ।