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हर दिन श्री द्वारकाधीश को लगता है 52 पान बीड़ा का भोग, सेवा में जुटे हैं पचास से ज्यादा सेवक

राजसमंद में द्वारकाधीश मंदिर में अनूठी सेवा

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हर दिन श्री द्वारकाधीश को लगता है 52 पान बीड़ा का भोग, सेवा में जुटे हैं पचास से ज्यादा सेवक

लक्ष्मणसिंह राठौड़ @ राजसमंद

तृतीय पीठ प्रन्यास के श्री द्वारकाधीश मंदिर में श्री प्रभु को प्रतिदिन 52 पान बीड़ा का भोग धराया जाता है। अल सुबह से सूर्यास्त तक ठाकुरजी के आठ दर्शन होते हैं और हर दर्शन में विविध सामग्री के भोग धराए जाते हैं। श्री प्रभु को बाल भाव से लाड लडाने व झूला झुलाने के एक से बढ़कर एक मनमोहक मनोरथ होते हैं। ठाकुरजी की सेवा में गोस्वामी परिवार के अलावा करीब पचास से ज्यादा सेवक जुटे हुए रहते हैं।

गिरधरगढ़ में श्री द्वारकाधीश के सुबह 7.15 बजे मंगला दर्शन खुलते हैं, जो करीब आधे घंटे तक अनवरत होते हैं। फिर पट बंद होकर 9 बजे वापस खुलते हैं, जिसमें श्री प्रभु के शृंगार दर्शन होते हैं। इसी तरह 10 बजे ग्वाल, 11.15 बजे राजभोग, 4.30 बजे उत्थापन, 5.15 बजे भोग, 5.45 बजे आरती व 7.30 बजे आरती के दर्शन होते हैं। मौसम व मंदिर में विशेष पर्व- महोत्सव के दौरान दर्शनों में आंशिक फेरबदल होता रहता है। करीब आधे से एक घंटे तक का समय आगे पीछे होता है। इसके तहत श्री प्रभु को प्रतिदिन 52 पान बीड़े के अलावा विभिन्न पकवानों का भोग धराया जाता हैं। ठाकुरजी को भाग धराने के बाद दो दर्जन से अधिक श्रद्धालुओं को नियमित प्रसाद बिठाकर जिमाया जाता है।

विभागों में विभक्त है ठाकुरजी सेवा
मंदिर में श्री प्रभु की सेवा की सारी व्यवस्था का जिम्मा मुखियाजी व द्वितीय मुखियाजी का है। इन्हीं की देखरेख में ठाकुरजी की सेवा की परम्परा है। सेवा के आधार पर हर सेवकों के विशेष पदनाम है। एक मुखिया, सहायक मुखिया, 5 भीतरिया, 5 जलघरा, 4 खासा भंडारी, 6 खर्च भंडारी, 6 पानघर- फूलघर, 3 समाधानी, 3 झापटिया, दो कीर्तनिया, एक पखावज, एक दर्जी मुखिया, गहना घरिया आदि है।

भीतरिया : निज मंदिर भोग लाने, ले जाने, धराने से लेकर सफाई के साथ सभी तरह की आंतरिक व्यवस्था।

जलघरा : जल भरना, बर्तन सफाई, भोग भंडारी को देना, सोने-चांदी के बर्तन खाली करना।

खासा भंडारी : भोग के आधार पर दूध, दही, अनाज, सब्जी सब्जी, फल आदि सामग्री तैयार कर रसोईघर तक पहुंचाने का जिम्मा।

खर्च भंडार : ठाकुरजी की सेवा, भोग व शृंगार के लिए बाजार से सामग्री खरीदने का कार्य।

पानघर-फूलघर : प्रतिदिन ठाकुरजी के लिए पान बीड़ा तैयार करना। मौसम के अनुरुप ठाकुरजी की सेवा के लिए विविध तरह के फूलों का प्रबंध।

समाधान : श्री प्रभु के दर्शन, मनोरथ की सेवा के बारे में जानकारी, मनोरथ के लिए निर्धारित राशि की रसीद कटवाना व विशिष्टजनों का मंदिर परंपरानुसार समाधान कर प्रसाद वितरण।

झापटिया : कतारबद्ध दर्शन करवाते हुए श्रद्धालुओं को आगे से आगे बढ़ाने का कार्य।

कीर्तनिया : हर दर्शन पर विशेष कीर्तन का गान किया जाता है। खास पर्व, महोत्सव व मनोरथ में पखावज का वादन किया जाता है।