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OMG! राजस्व विभाग ने विधवा की बेशकीमती जमीन को अन्य महकमों व समिति को कर दी आवंटित

अफसर-कार्मिकों की धांधली उजागर होने के बाद विधवा ने न्याय नहीं मिलने पर दी आत्महत्या की चेतावनी
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राजसमंद

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Laxman Singh Rathore

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Updated: 2 May 2018, 10:54 AM IST

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ओमप्रकाश शर्मा @ कुंभलगढ़

गवार ग्राम पंचायत के राजस्व ग्राम बीड़ा की भागल की एक विधवा ने उसकी करोड़ों रुपए की जमीन राजस्व विभाग के कार्मिकों पर गलत ढंग से अन्य विभागों एवं समिति को आवंटित कर उसे बेदखल कर देने का अरोप लगाया है। इसको लेकर विधवा ने हक नहीं मिलने पर तहसील कार्यालय के सामने आत्महत्या करने की चेतावनी देते हुए एक माह के भीतर मामले के निस्तारण की गुहार लगाई है। बीड़ा की भागल निवासी चुन्नीबाई पत्नी नोजासिंह ने बताया कि उसके पति की मृत्यु २४ वर्ष पूर्व हो गई थी, उसके बाद छह बच्चों समेत पूरे परिवर की जिम्मेदारी उस पर पड़ गई थी। तब से वह इसी जमीन से भरण-पोषण करती आ रही है। बताया कि इस जमीन पर उसका ३५-४० वर्षों का कब्जा होकर राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम १९५६ की धारा ९१ के तहत लगातार दर्ज है। वहीं, जमीन को कास्त लायक बनाने के लिए उसने समय-समय पर लाखों रुपए का खर्चा भी किया है। पीडि़ता ने बताया कि केलवाड़ा कस्बे से दुर्ग जाने वाले मुख्य मार्ग पर तालाब किनारे आराजी नम्बर २९१ में उसके ससुर के समय से लगभग ६५ वर्ष पूर्व उसके हिस्से में ढाई बीघा जमीन आई थी। उसमें से वर्ष १९८४ में उसको बिना बताए राजस्व विभाग ने १२ बिस्वा जमीन राणा प्रताप प्रौढ़ शिक्षा समिति केलवाड़ा के नाम आवंटन कर डाली। उस समय तो वे कब्जा लेने भी नहीं आए, लेकिन ११ वर्ष बाद जब वे कब्जा लेने आए तो मौके पर तत्कालीन पटवारी, आरआई एवं समिति के लोग आए और यह बोलकर कब्जा ले लिया कि शेष जमीन शीघ्र उसके नाम दर्ज करा दी जाएगी।

फिर हुआ आवंटन
मामला यहीं नहीं रुका। राजस्व विभाग के कार्मिकों ने कब्जेशुदा जमीन को बिलानाम बताकर १९९३ में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग उदयपुर को १० बिस्वा जमीन इसी आराजी नम्बर से और आवंटन कर दी। लगभग छह वर्ष पूर्व आकर डरा-धमका कर १० बिस्वा जमीन का कब्जा भी यह कहते हुए ले लिया कि शेष जमीन के वो चारदीवारी बना दे और बची हुई जमीन उसके नाम दर्ज कर दी जाएगी।

पैरों तले जमीन खिसक गई
जमीन उसके नाम दर्ज हो जाएगी इसी आस के साथ तब से लेकर अब तक वह शेष बची जमीन से परिवार का भरण-पोषण करती आ रही है। लेकिन, विधवा चुन्नीबाई के पैरों तले जमीन तब खिसक गई, जब उसको वन-विभाग के अधिकारियों ने मौके से हट जाने एवं उसके नवनिर्मित मकान को खाली करने के लिए कह दिया। जिला कलक्टर को सौंपे ज्ञापन में विधवा ने लिखा है कि २०१३ में राजस्व विभाग के कार्मिकों ने कागजों में बिलानाम बताकर २ बीघा जमीन का वन-विभाग को आवंटन कर दिया और सिर्फ तीन माह पूर्व ही पटवारी, आरआई, पुलिस एवं वन-विभाग के अधिकारी मौके पर आए और उसका घर एवं सम्पूर्ण जमीन खाली करने के लिए बोल दिया।

यहां क्या हुआ है, मुझे पता नहीं है, लेकिन इतना जानता हूं कि बिलानाम एवं निर्विवाद खाली जमीन का ही आवंटन किया जाता है।
भूराराम देवपाल, तहसीलदार, कुंभलगढ़

मेरे पास भी आया है पूरा प्रकरण जांच के बाद ही पता चलेगा कि वास्तव में क्या और कैसे हुआ।
गोविन्दङ्क्षसह रत्नू, उपखण्ड अधिकारी, कुंभलगढ़

२०१२ के बाद उक्त जमीन राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम १९५६ की धारा ९१ के तहत दर्ज नहीं है।
मुकेश कुमार, पटवारी, ग्राम गवार

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