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COURT ORDER : उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी के निर्वाचन मामले में हाईकोर्ट ने मांगे दस्तावेज : पुलिस करेगी कार्रवाई

- राजसमंद विधायक निर्वाचन के दस्तावेजों में हेराफेरी का मामला

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राजसमंद. उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी के राजसमंद विधायक पद पर निर्वाचन मामले में जोधपुर हाईकोर्ट ने सरकार से दस्तावेज मांगे हैं।


सिंगल बेंच में सुनवाई करते हुए पीठासीन अधिकारी पुष्पेन्द्र सिंह भाटी ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद राजनगर थाने में दर्ज प्रकरण की जांच पर स्थायी स्थगनादेश देने से इनकार कर दिया। साथ ही निर्वाचन मामले के तमाम दस्तावेज तलब किए हैं। ज्ञात हो, एडवोकेट जितेन्द्र खटीक द्वारा माहेश्वरी की निर्वाचन प्रक्रिया को अदालत में चुनौती दी थी, जिसके बाद अदालत के निर्देश पर राजनगर थाने में एफआईआर दर्ज हुई। नामांकन-पत्र में गड़बड़ी की जांच के विरुद्ध मंत्री की याचिका पर हाईकोर्ट ने अंतरिम स्थगनादेश दिया था। ताजा सुनवाई में एफआईआर को तुरंत प्रभाव से निरस्त करने की गुहार भी अदालत ने खारिज कर दी। किरण माहेश्वरी बनाम राज्य वगैरह मामले में अदालत चार सप्ताह बाद सुनवाई करेगी। प्रकरण में 11 सितम्बर व 5 अक्टूबर को सुनवाई हो चुकी है।


राज्यहित में दस्तावेज जारी करने पर सवाल
इधर, याचिकाकर्ता जितेन्द्र खटीक ने नामांकन-पत्र की प्रति राज्यहित में जारी करने को लेकर जिला प्रशासन पर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्पष्ट जाहिर होता है कि अधिकारी मंत्री के दबाव में काम कर रहे हैं।


थाने में दर्ज है एफआईआर
राजसमंद विधायक के लिए किरण माहेश्वरी द्वारा प्रस्तुत नाम निर्देशन पत्र में हेराफेरी को लेकर राजनगर थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। आरोप है कि नाम निर्देशन पत्र स्वीकार नहीं होने के बावजूद किरण माहेश्वरी को विधायक निर्वाचित घोषित कर दिया। इसके लिए तत्कालीन निर्वाचन अधिकारी व राजसमंद के मौजूदा अतिरिक्त जिला कलक्टर ब्रजमोहन बैरवा पर भी लापरवाही बरतने का आरोप है। उल्लेखनीय है कि थाने में सीधे एफआईआर दर्ज नहीं होने पर जितेंद्र खटीक ने न्यायालय में इस्तागासा दायर किया, जिस पर न्यायालय द्वारा एफआईआर दर्ज कर जांच करने के लिए राजनगर थाना प्रभारी को निर्देश दिए। उल्लेखनीय है कि इस मामले में उच्च शिक्षा मंत्री व अतिरिक्त जिला कलक्टर की ओर से जिला एवं सेशन न्यायालय में भी स्थगनादेश के लिए वाद दायर किया, लेकिन बाद में न्यायालय द्वारा वाद को निरस्त कर दिया।