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राजस्थान में यहां होगी हाईटेक गोशाला, गायों के लिए आइसीयू, 2 करोड़ से भी ज्यादा की आएगी लागत

देवगढ़ जिले की सबसे बड़ी गोशाला देवगढ़ में बन रही है। इसमें न केवल गायों के चारे-पानी का इंतजाम होगा, बल्कि इलाज के लिए ओपीडी, आइसीयू और पूरा मेडिकल स्टाफ काम करेगा। जैन समाज जमीन खरीदकर उस पर गोशाला निर्माण कर रहा है...

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 Ayodhya Gaushala

अयोध्या में बनेगी प्रदेश की सबसे बड़ी मॉडल गौशाला

राजसमंद/ देवगढ़। जिले की सबसे बड़ी गोशाला देवगढ़ में बन रही है। इसमें न केवल गायों के चारे-पानी का इंतजाम होगा, बल्कि इलाज के लिए ओपीडी, आइसीयू और पूरा मेडिकल स्टाफ काम करेगा। जैन समाज जमीन खरीदकर उस पर गोशाला निर्माण कर रहा है।

पिछले दिनों देवगढ़ में हुए चातुर्मास में आए जैन मुनि कोमल की प्रेरणा से जैन समाज के लोगों ने गायों की देखभाल और सुरक्षा के उद्देश्य से गोशाला बनाने का बीड़ा उठाया था। जैन ट्रस्ट की ओर से 2 करोड़ की लागत से 300 बीघा भूमि पर श्राीगुरु सौभाग्य मदन गोशाला बन रही है। इसमें 5000 गायों को रखा जा सकेगा। इसके लिए श्मशान घाट के पास एवं हाइवे पर जाने वाले रास्ते पर स्थित भूमि का चयन किया गया है। गोशाला के लिए प्रवासी देवगढ़ समिति बनाई गई, जो इस कार्य को देख रही है। जैन मुनि कोमल की प्रेरणा से यह संकल्प लिया था। प्रवासी समिति देवगढ़ का एक ट्रस्ट बनाया। होली चातुर्मास में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ कई मंत्री एवं गुरु सौभाग्य मुनि कुमुद, मदन मुनि, सहित अनेक साधु-साध्वियों की मौजूदगी में गोशाला का उद्घाटन किया जाएगा।

2 करोड़ रुपए से भी ज्यादा की लागत
300 बीघा भूमि पर इस गोशाला पर 2 करोड़ रुपए से भी अधिक की लागत आएगी, जिसमें 100 टन लोहा काम में लिया जा रहा है। यह 6 माह में बनकर तैयार होगी। गोशाला में 5 हजार गोवंश को रखा जा सकेगा। उनके लिए मेडिकल सुविधा उपलब्ध होगी और गोबर गैस प्लांट भी लगाया जाएगा। अत्याधुनिक गोशाला के लिए टीन शेड लगा दिया है।

चरने का होगा बंदोबस्त
यह गोशाला जिलेभर के लिए मॉडल गोशाला के रूप में तैयार की जा रही है। न केवल गायों के रहने की व्यवस्था की जाएगी, बल्कि गोचारण के लिए भी भूमि तय की गई है। गोशाला में सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी, जिससे गोवंश को कोई परेशानी नहीं हो। देवगढ़ नगर एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में खुला गोवंश एक बड़ी चुनौती के रूप सामने आया है। जिला प्रशासन की अनुमति के बाद देवगढ़ नगरपालिका से जमीन खरीदकर ट्रस्ट ने गोशाला खोलने का निर्णय लिया।