
पांच माह से बिना डॉक्टर के चल रहा अस्पताल!
अश्वनी प्रतापसिंह @ राजसमंद. पब्लिक प्राईवेट प्रार्टनरशिप (पीपीपी) मोड के तहत जिले में संचालित अस्पतालों का संचालन भगवान भरोसे हो रहा है। यहां न तो नियमानुसार स्टाफ है और न ही मरीजों को सुविधाएं दी जा रही हैं। राजस्थान पत्रिका ने शुक्रवार को जिला मुख्यालय से करीब २५ किमी दूर गजपुर में संचालित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं के हालत जाने तो चौकाने वाली बात सामने आई। यहां पिछले पांच-छह माह से कोई चिकित्सक नहीं है और अस्पताल मेल नर्स और एएनएम के भरोसे संचालित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चिकित्सक नहीं होने के कारण प्रसव के लिए महिलाओं को जिला मुख्यालय ले जाना पड़ता है। इधर लम्बे समय से अस्पताल में चिकित्सक नहीं होने से आस-पास झोलाछापों की चांदी मढ़ रही है।
ये मिले हालात
पत्रिका टीम शुक्रवार सुबह 19.45 बजे गजपुर में पीपीपी मोड से संचालित अस्पताल पहुंची। यहां मेलनर्स निशुल्क दवा काउंटर पर बैठा था जबकि संस्थान द्वारा लगाया गया जिला कॉडिनेटर मरीजों को दवाएं लिख रहा था। संस्थान में एक एलएचवी, एक एएनएम, एक लैब टैक्निीशियन व एक सफाई कर्मी मौके पर मौजूद थी, जबकि चिकित्सक और फॉर्मेस्टिट के छुट्टी पर होने की बात बताई गई। यहां तक की चिकित्सक का कक्ष भी बाहर से बंद था। मौके में एक गर्भवती सहित तीन मरीज दवाएं लेने के लिए खड़े थे, जो दवाएं लेेने आए थे।
डॉक्टर साहब पीजी की परीक्षा देने गए है...
संस्थान के जिला कॉडिनेटर मदन मेघवाल ने बताया कि यहां डॉ. अजय गोयल सेवाएं दे रहे हैं, अभी वह पीजी की परीक्षा देने के लिए छुट्टी लेकर गए हुए है और करीब १५ दिन से नहीं आ रहे। मेघवाल ने बताया कि मुझे संस्थान ने जिला कॉडिनेटर के रूप में लगा रखा है जहां स्टॉफ की कमी होती है वहां मैं सेवाएं देता हूं।
झोलाछापों की मढ़ रही चांदी
अस्पलात में लम्बे समय से चिकित्सक नहीं रहने से यहां तथा आस-पास के गांवों में करीब दर्जनभर झोलाछापों ने दुकानें खोल दी। ग्रामीणों ने बताया कि वे इंजेक्शन से लेकर सभी तरह की दवाएं लिखते हैं। कईबार तो ये झोलाछाप ऑपरेशन भी कर देते हैं। हालांकि गुरुवार को चिकित्सा विभाग द्वारा झोलाछापों पर की गई कार्रवाई के चलते शुक्रवार को सभी ने दुकानें बंद कर रखी थी।
महीनों बाद सितम्बर में लगाया था चिकित्सक
गजपुर अस्पताल में चिकित्सक के नहीं होने की समस्या चार-पांच महीनें की ही नहीं है बल्कि इससे पूर्व भी यहां चिकित्सक नहीं था। बताया गया कि ग्रामीणों की शिकायत पर सितम्बर 2019 में यहां एक चिकित्सक कागजी तौर पर लगाया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि वह भी नियुक्ति के बाद से शायद ही कभी अस्पताल आया हो।
15-20 गांवों के आते हैं लोग
गजपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के आस-पास १५ से २० किमी की परिधि में कोई दूसरा अस्पताल नहीं है। इससे यहां तीन प्रमुख पंचायत गजपुर, कोयल, कालिंजर के दो दर्जन से अधिक गांव, ढाणियों के मरीज यहां उपचार के लिए आते हैं।
चिकित्सक नहीं देखा...
मैं तो १५-२० दिन में एक बार अस्पताल जाता ही हूं, लेकिन पिछले पांच-छह माह से वहां चिकित्सक नहीं देखा। ये झूठ बोलते हैं कि यहां कोई चिकित्सक लगा है। यहां कोई चिकित्सक नहीं है। मेल नर्स ही दवाएं लिखता है। वह भी इजेक्शन नहीं लिखता। ऐसे में छोटी-मोटी बीमारी के लिए भी हमें या तो राजसमंद जाना पड़ता है या फिर झोलाछापों को दिखाना पड़ता है।
-पर्वतसिंह, निवासी, बारिंड
गर्भवतियों को समस्या है...
यहां पिछले पांच-छह माह से कोई चिकित्सक नहीं है, ऐसे में गर्भवती महिलाओं को खासी परेशानी होती है। टीकाकरण को छोड़कर यहां उन्हें कोई सुविधा नहीं मिलती। उन्हें उपचार के लिए मजेरा या फिर राजसमंद ही जाना पड़ता है। प्रसव के दौरान तो भारी समस्या है।
-किशनलाल सुथार, निवासी, चतराजी का गुड़ा
सरकारी स्तर पर हो संचालन
अस्पताल में चिकित्सक नहीं है, जिससे हमें उपचार केलिए २० से २५ किमी सफर करना पड़ता है। अब सर्दी का मौसम है, खासी-जुकाम आम बात है। ऐसे में झोलाछाप को दिखाओ या फिर मेल नर्स से उपचार लो। इसका संचालन तो सरकारी स्तर पर ही होना चाहिए। ताकि व्यवस्थाएं सुधर सकें।
-सुरेंद्रसिंह, निवासी मोयणा, गजपुर
बात करेंगे...
गजपुर अस्पताल में चिकित्सक नहीं होने की हमें कोई जानकारी नहीं है। अस्पताल को जिस संस्थान ने ले रखा है उससे बातकर पता करवाएंगे आखिर स्टाफ क्यों नहीं लगा है।
-डॉ. जेपी बुनकर, सीएमएचओ, राजसमंद
Published on:
04 Jan 2020 11:34 am
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