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राजस्थान के इस खूबसूरत किले पर शुरू हुआ तीन दिन का रंगारंग उत्सव, पर्यटकों ने कलाकारों संग लगाए ठुमके

Kumbhalgarh Festival-2023 कुंभलगढ़ फेस्टिवल के पहले दिन बाड़मेर की लाल आंगी गैर नृत्य रहा मुख्य आकर्षण का केंद्र  

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Kumbhalgarh Festival-2023 दुर्ग की यज्ञवेदी परिसर में जिला एवं स्थानीय प्रशासन तथा पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार से शुरू हुए तीन दिवसीय कुंभलगढ़ फेस्टिवल में कलाकारों की प्रस्तुतियों ने मन मोह लिया। कलाकारों ने आवोजी पधारे म्हारे देश... गाने की प्रस्तुति दी। राजस्थान के विभिन्न शहरों व कस्बों से आए कलाकारों ने मुख्य रूप से घूमर नृत्य, चकरी, सहरिया स्वांग, कच्छी घोड़ी, लाल आंगी गैर, मांगणियार, बांकिया वादन, बेहरूपिया, चंग के साथ तेरहताल, भवईं नृत्य की प्रस्तुतियों ने पर्यटकों व दर्शकों का मन मोह लिया। कलाकारों संग पर्यटकों ने भी खूब ठुमके लगाए।

इससे पूर्व पर्यटन विभाग की उप निदेशक डायरेक्टर शिखा सक्सेना, उपखण्ड अधिकारी जयपाल सिंह राठौड, जिला पर्यटन अधिकारी जितेंद्र माली, विवेक जोशी, हेजिटेज सोसायटी के सचिव कुबेरसिंह सोलंकी, पथ्वीसिंह झाला और रानू ने दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया।

पर्यटन उपनिदेशक सक्सेना ने बताया कि बाड़मेर के देऊ खान मांगणियार लंगा गायक ने गणपति वन्दना और विजय भट्ट, उदयपुर ने आकर्षक कच्छी घोड़ी नृत्य पेश किया। किशनगढ़ के वीरेंद्र सिंह ने घूमर नृत्य, बारां से आए शिवनारायण का चकरी नृत्य, बारां के गोपाल धानुक ने सहरिया स्वांग नृत्य, बाड़मेर से आए तगाराम का सफेद आंगी गैर नृत्य, धनराज कुंभलगढ़ का बांकिया वादन, चित्तौड़ से आए बहरूपिये ने भी विभिन्न भेष बनाकर खूब वाह-वाही लूटी। चूरू से आए सुरेश का होली पर होने वाला चंग नृत्य, जोधपुर से आए पारसनाथ कालबेलिया ने कालबेलिया नृत्य पेशकर खूब ठुमके लगाए। जीवनदास समीचा और धनदास गोगुंदा का तेरह ताल नृत्य ने भी खूब तालियां बटोरी।