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राजसमंद. प्रदेश में महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए भरसक प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए सरकार की ओर से योजनाएं भी संचालित की जा रही है, लेकिन जिस विभाग को योजनाओं की क्रियान्वित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उस विभाग की स्वयं की हालत खस्ता है। स्थिति यह है कि महिला अधिकारिता विभाग में 15 में से मात्र दो कार्मिक कार्यरत है। ऐसे में विभाग का संचालन और योजनाओं की क्रियान्विति कैसे होती होगी इसका स्वत: ही अंदाजा लगाया जा सकता है। शहर के पंचायत समिति के निकट महिला अधिकारिता विभाग संचालित है। वर्षो से संचालित इस विभाग का काम महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, उन्हें नि:शुल्क प्रशिक्षण दिलाना, स्वच्छता के लिए प्रेरित करना, असहाय और जरूरतमंद महिलाओं के लिए वन स्टॉप सेन्टर संचालित करना और आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। विभाग की योजनाओं की क्रियान्विति कराने और सुचारू रूप से संचालित करने की जिम्मेदारी सुपरवाइजरों की होती है, लेकिन विडंबना यह है कि जिले में आठों ब्लॉक में यह पद रिक्त चल रहे हैं। विभाग में उपनिदेशक सहित 15 पद स्वीकृत है, लेकिन वर्तमान में सिर्फ उप निदेशक और एक सूचना सहायक का पद भरा हुआ है। विभाग की ओर से दो कार्मिक संविदा पर लगा रखे हैं। इसके कारण विभाग संचालित हो रहा है। इसके बावजूद विभागीय उच्चाधिकारी और जनप्रनिधि भी इस और ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसके कारण कार्मिकों पर भी काम का बोझ बढ़ता जा रहा है।
महिला अधिकारिता विभाग की सहायक निदेशक रश्मि कौशिक के पास पिछले तीन माह से महिला बाल विकास विभाग के उपनिदेशक का अतिरिक्त चार्ज भी है। आईसीडीएस उपनिदेशक के वीआरएस ले लेने के बाद से यह चार्ज उनके पास है। जिले में 1135 आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित है। विभागीय कई योजनाएं भी संचालित है।
सरकार के आदेशानुसार काम किया जा रहा है। योजनाओं की क्रियान्विति के प्रयास किए जाते हैं। आईसीडीएस का अतिरिक्त चार्ज है। जो स्टाफ उपलब्ध है उससे काम लिया जा रहा है, कमी के कारण असुविधा तो होती है।
Published on:
04 Feb 2025 11:10 am
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