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इस सदी में पांचवी बार 15 को बनेगी मकर संक्रांति…पढ़े क्या है कारण

कुंवारिया. इस वर्ष मकर संक्रांति पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। मध्य रात्रि बाद मकर राशि में सूर्य प्रवेश करेंगे और ब्रह्म मुहूर्त से ही पुण्यकाल प्रारंभ होगा।

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दानवीरों का अनुकरण करने और देने की आदत को जीवन में उतारने का तिल भर प्रयास करने का दिन

दानवीरों का अनुकरण करने और देने की आदत को जीवन में उतारने का तिल भर प्रयास करने का दिन

ज्योतिर्विद भरत कुमार खण्डेलवाल ने बताया कि पोष शुक्ला तीज रविवार मध्य रात्रि बाद 2 बजकर 40 मिनट से सूर्य देव अपने पुत्र शनि की मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही उत्तरायण का महापर्व शुरू होगा। इस दिन से शनै-शनै सूर्य देव ईशान दिशा की ओर से निकलना शुरू होंगे। इससे दिन मान तिल-तिल भर बढ़ता जाता है तथा रात्रि मान घटता जाता है। धरती के उत्तरी गोलार्ध में प्रचुर ऊर्जा प्रवाह होता है। इस सदी में वर्ष 2008 से प्रति चौथे वर्ष मकर संक्रांति 15 जनवरी को पड़ रही है। ऐसे में 2008, 12, 16, 20 और अब 24 में 15 जनवरी को मकर राशि में सूर्य प्रवेश हो रहा है। इस तरह यह इस सदी की पांचवीं मकर संक्रांति है, जो 15 जनवरी को होगी। इसके साथ ही मलमास की भी समाप्ति होने से मांगलिक कार्य भी शुरू हो जाएंगे।

प्रतिवर्ष औसत 20 मिनट लेट होरही है पृथ्वी
प्रतिवर्ष औसत 20 मिनट देरी से मकर राशि से सूर्य प्रवेश करता है। ऐसे में प्रति 72 वर्ष में सूर्य संक्रांति 24 घंटे अर्थात् एक दिन आगे खिसक जाती है। सन् 1936 में पहली बार 14 जनवरी को मकर संक्रांति हुई थी। इसी तरह 72 वर्ष बाद 2008 में पहली बार 15 जनवरी को मकर संक्रांति हुई थी। इसी तरह सन् 2080 में पहली बार 16 जनवरी को मकर संक्रांति होगी।

इनका करें दान: पक्षियों को अनाज, पशुओं को चारा, याचकों को गुड़ तिल्ली के लड्डू, भोजन, पकवान, खिचड़ी, चावल, उड़द, कंबल एवं घरेलू उपयोग की वस्तुएं विशेष महत्व रखती हैं । इस दिन 13 वस्तुओं की दान करने का भी विधान है।

पुण्य काल : ज्योतिर्विद खण्डेलवाल ने बताया कि 15 जनवरी को ब्रह्म मुहूर्त से ही सरोवर, नदी, जलाशयों पर स्नान, ध्यान, सूर्य देव को जल अर्पण करके, तिल, गुड़, वस्त्र एवं घरेलू उपयोगी वस्तुओं का दान करने का विधान है। इससे मानसिक प्रसन्नता एवं खुशहाली की प्राप्ति होती है