
शिक्षा के नाम पर जो बच्चियों के साथ छेड़छाड़ करता है, वो गुरू के नाम पर कलंक है
राजसमंद. पंचायत समिति राजसमंद सभागार में मंगलवार को राजस्थान बाल संरक्षण आयोग के सदस्यों द्वारा उपखण्ड अधिकारी राजेन्द्र प्रसाद अग्रवाल की अध्यक्षता में पंचायत स्तरीय समीक्षा बैठक ली गई। इस दौरान आयोग के सदस्यों ने प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस व शिक्षा के स्तर पर काम करने वाले जिम्मेदारों को दो टुक कहते हुए बच्चों के अधिकारों के प्रति ढिलाई बरतने पर खासी नारजगी जताई। आयोग सदस्य एसपी सिंह ने कहा कि शिक्षा के स्तर में गरीब बच्चों को आरटीआई के तहत निशुल्क शिक्षा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जहां पर २५० सीटें निशुल्क होती है, वहां पर केवल ५० सीटों पर ही प्रवेश दिया जाता है। इस पर लगाम बहुत जरूरी है। उन्होंने बच्चों के शोषण एवं अधिकारों के हनन को लेकर सख्त निर्देश दिए कि सभी विभाग बच्चों के प्रति गंभीरता दिखाए, उन्होंने पंचायत व ग्रामीण स्तर पर बांल संरक्षण की बैठक न होने पर काफी नारजगी जताई। इस उन्होंने ब्लॉक शिक्षा अधिकारी एवं विकास अधिकारी को निर्देश दिए कि वे महीने में एक बार ग्रामीण एवं पंचायत स्तरीय बैठक कराए।
६७ बच्चियां राजसमंद में अवैध तरीके से रखा, जिम्मेदारों को पता नहीं
आयोग के सदस्य एसपी सिंह ने प्रशासन एवं पुलिस विभाग पर नारजगी जताते हुए वृताधिकारी राजेन्द्र सिंह राव से जवाब मांग कि शहर के किसी होटल में ६७ नाबालिग बच्चियां रहती है और जिम्मेदारों को इसे कानो-कान खबर नहीं रहती है।उन्होंने इस रवैए पर गौर निंदा करते हुए कहा कि ये लापरवाही बच्चों को सुरक्षा प्रदान करने से रोक रही है। इसके जवाब में पुलिस उपाधीक्षक राव ने कहा कि नीचे स्तर के अधिकारी इस पर लापरवाही बरतते है, इसके चलते आगे तक इसकी सूचना न आने से चुक हो जाती है।
वृताधिकारी से लिया पोक्सों के मामलों का ब्यौरा
बाल संरक्षण आयोग सदस्य उमा रत्नु ने सभी अधिकारियों को जागरूक रहने का आहन किया। और साथ ही पोक्सो एक्ट के मामलों में वृताधिकारी राजेन्द्र सिंह राव से मामलो की जानकारी मांग की गई। इस पर राव ने बताया कि जिले में इस वर्ष कुल २९ मामले पोक्सो में दर्ज किए गए। जिसमें आठ पेंडिग व चार पर एफआर लगी होने की बात बताई। उन्होंने ज्यादातर दबाव १३ वर्ष से कम उम्र की बच्चियों के लिए दिया गया। कहा किऐसी बच्चियों की सुनवाई जल्द करें।
Published on:
17 Jul 2018 02:34 pm
