
राजसमंद के निकट एक खेत बुवाई के लिए तैयार।
राजसमंद. जिले में रबी की फसलों की बुवाई का दौर जारी है, लेकिन डीएपी खाद की कमी के कारण ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि डीएपी खाद के लिए लोग क्रय-विक्रय सहकारी समिति के चक्कर लगा रहे हैं। हालांकि कृषि विभाग का दावा है कि जिले में 85 एमटी डीएपी उपलब्ध है।
जिले में रबी की बुवाई का दौर जारी है। रबी में गेहूं और जौ की फसल की बुवाई में डीएपी खाद की आवश्यकता होती है। जानकारों के अनुसार डीएपी में 18 प्रतिशत नाइट्रोजन तथा 46 प्रतिशत फासफोरस होता है। इस 18 प्रतिशत नाइटोजन में 15.5 प्रतिशत अमोनिया नाईट्रेट होता है। इससे पौधे की बढ़वार अच्छी होती है। जिले में अभी गेहूं और जौ की बुवाई जारी है। इसमें सर्वाधिक डीएपी खाद की आवश्यकता होती है। हालांकि खाद-बीज की दुकानों पर डीएपी उपलब्ध बताया जा रहा है, लेकिन इसके साथ एक नैनो यूरिया की बोतल दी जा रही है, इसके कारण काश्तकार क्रय विक्रय सहकारी समिति और ग्राम सहकारी समिति के चक्कर लगा रहे हैं। इसमें से अधिकांश स्थानों पर डीएपी उपलब्ध नहीं होने के कारण काश्तकारों को चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
रबी की करीब 50 फीसदी बुवाई : जिले में रबी की बुवाई का काम जारी है। कृषि विभाग के अनुसार इस बार रबी की फसल का 48980 हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें वर्तमान में करीब 24,500 हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी है। जिले में 15 अक्टूबर से 15 नवम्बर के बीच रबी की बुवाई की जाती है। इस बार विभाग ने गेहूं की 27830 हेक्टेयर में, जौ की 8050 हक्टेयर में, चना 8910, सरसों 2360, तारामीरा 210 और 3240 हेक्टेयर अन्य फसलों की बुवाई का लक्ष्य रखा है। इसमें से करीब 50 फीसदी बुवाई हो गई है।
152 एमटी जल्द मिलेगा डीएपी: कृषि विभाग के उपनिदेशक विस्तार के.सी.मेघवंशी ने बताया कि जिले में वर्तमान में करीब 85 एमटी डीएपी उपलब्ध है। इस सप्ताह के अंत तक 152 एमटी डीएपी और उपलब्ध होने की संभावना है। इसके साथ ही कृषि विभाग की ओर कृषकों को डीएपी के स्थान पर सिंगल सुपर फास्ट का उपयोग करने के लिए प्रेरित कर रहा है। यह डीएपी से भी सस्ता पड़ता है और जिले में यह प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। कृषि विभाग के अनुसार डीएपी के मुकाबले सिंगल सुपर फास्ट का ढ़ाई गुना डालना होता है, इसके बावजूद यह डीएपी से सस्ता पड़ता है।
240 की दवा खरीदो तब मिलेगा डीएपी: मुंडोल निवासी काश्तकार जगदीश पालीवाल ने बताया कि क्रय विक्रय सहकारी समिति में डीएपी नहीं मिलने पर खाद-बीज बेचने की दुकान से डीएपी खरीदा, लेकिन दुकानदार ने शर्त रखी की इसके साथ 240 रुपए की फसल पर छिड़कने की दवा भी खरीदनी पड़ेगी, इसके बाद ही डीएपी दूंगा। उन्होंने बताया कि मजबूरी में वह बोतल खरीदनी पड़ी, जबकि उसकी आवश्यकता ही नहीं है।
तीन-चार बार लगाया चक्कर : पड़ासली के काश्तकार अर्जुन सिंह ने बताया कि खेत में रबी की बुवाई करनी है। बुवाई के लिए डीएपी की आवश्यकता है, लेकिन क्रय विक्रय सहकारी समिति पर तीन-चार बार चक्कर लगा चुका हूं, लेकिन डीएपी नहीं मिल रहा है। रविवार को भी अवकाश के बावजूद इस आस से यहां आया हूं कि डीएपी मिल जाए, लेकिन नहीं मिला।
क्रय विक्रय सहकारी समिति में डीएपी अभी उपलब्ध नहीं है। पिछले कुछ दिनों से माल नहीं आया है। इसके लिए डिमांड भेज रखी है। वर्तमान में 400 बैग की आवश्यकता है। डीएपी नहीं होने के कारण काश्तकार चक्कर लगा रहे हैं। समिति में यूरिया उपलब्ध है।
कैलाश तालेसरा, लेखापाल क्रय विक्रय सहकारी समिति राजसमंद
Published on:
08 Nov 2022 12:17 pm
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