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स्टार्टअप इकोसिस्टम की दिशा में हो काम, युवाओं को मिले विशेष प्रोत्साहन,सरकार खोले स्टार्टअप के द्वार

राजसमंद, जो पारंपरिक रूप से कृषि, मार्बल व लघु उद्योग के लिए जाना जाता है, आज युवा उद्यमियों का संभावित स्टार्टअप हब बनने की दिशा में अनुभवहीन यात्रा पर है। हालांकि स्थानीय युवाओं में नवप्रवर्तन की ऊर्जा है, लेकिन इन् स्टार्टअप्स को सरकार द्वारा वादों की तुलना में अपेक्षित समर्थन और संसाधन नहीं मिल पा […]

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StartUp And Innovations

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राजसमंद, जो पारंपरिक रूप से कृषि, मार्बल व लघु उद्योग के लिए जाना जाता है, आज युवा उद्यमियों का संभावित स्टार्टअप हब बनने की दिशा में अनुभवहीन यात्रा पर है। हालांकि स्थानीय युवाओं में नवप्रवर्तन की ऊर्जा है, लेकिन इन् स्टार्टअप्स को सरकार द्वारा वादों की तुलना में अपेक्षित समर्थन और संसाधन नहीं मिल पा रहे हैं। खासकर बजट, फंडिंग, टैक्स प्रोत्साहन, और इन्फ्रास्ट्रक्चर के मामले में, यही कारण है कि यहां नया स्टार्ट अप नहीं पनप पाए। हालात ऐसे हैं जो युवा स्टार्टअप की दुनिया में है वें दूसरी जगहों पर काम कर रहे हैं। राजसमंद जिला ऐसा हैं जहां इसकी सख्त आवश्यकता है। यदि सरकार की ओर से बजट में इनके लिए कोई विशेष प्रावधान करती है तो युवाओं को प्रोत्साहन मिलेगा और दूसरे लोगों को भी इससे प्रेरणा मिलेगी। लगने को उद्योगों के रूप में मार्बल, माइनिंग से जुड़े उद्योग हैं, लेकिन इनकी माली हालत भी खस्ता है। क्योंकि इनके लिए जीएसडी और नियमों की पेचीदगियां काफी है। जिससे ये उद्योग पनपने की बजाय उजड़ने के कगार पर हैं। मजदूर पलायन करने को मजबूर है।

स्टार्टअप्स को रोज़-दिन की चुनौतियां

फंडिंग संबंधित परेशानियां:

  • सरकारी योजनाएं (जैसे आई स्टार्ट) के तहत स्टार्टअप्स को प्री-सीड में 2 लाख 40 हजार तक ग्रांट, और महिलाओं के नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स को अतिरिक्त सहायता दी जाती है, लेकिन वास्तविक पहुंच अक्सर सीमित रहती है।
  • बीज और विकास चरण के लिए अनुदान तथा स्केल-अप फंड भी उपलब्ध है, परंतु राशि एवं पहुंच सीमित हो सकती है।
  • स्टार्टअप्स अक्सर निवेशकों तक पहुंच पाने में संघर्ष करते हैं; उद्यम पूंजी और एंजेल निवेशकों को आकर्षित करना छोटे जिलों में मुश्किल है।

समस्या: फंडिंग तक पहुंच का डिज़ाइन स्थानीय स्टार्टअप्स के लिए केंद्रित नहीं है। न तो निवेशक नेटवर्क और ना ही मेन्टरशिप मजबूत स्तर पर उपलब्ध।

टैक्स और सरकारी मान्यता की कठिनाई

केंद्रीय स्टार्ट अप कार्यक्रम के तहत सेक्शन 80- आईएसी जैसे प्रावधान से तीन वर्षों तक 100 प्रतिशत टैक्स छुट मिल सकती है। लेकिन डीपीआईआईटी पंजीकरण और प्रक्रिया की जटिलता (पंजीकरण के लिए समय, दस्तावेज़ीकरण, और पालन-कर प्रक्रियाएं) स्थानीय स्टार्टअपों के लिए बाधा बनी रहती हैं।

समस्या: टैक्स़ छूट और सरकारी मान्यता के लाभ तकनीकी सक्षमता और जानकारी के अभाव में अक्सर सीधे स्थानीय स्टार्टअप तक नहीं पहुंचते।

शहरी-ग्रामीण अंतर

  • राजसमंद के ग्रामीण इलाके (जैसे जोधपुर-राज्य से तुलना करें तो) में इंटरनेट कनेक्टिविटी, को-वर्किंग स्पेस, मेंटरशिप, और तकनीकी सुविधाएँ सीमित हैं।
  • ग्रामीण स्टार्टअपों को डिजिटल भुगतान सिस्टम, तेज़ इंटरनेट, लॉजिस्टिक सपोर्ट और बाजार तक स्वाभाविक पहुंच नहीं मिल पाती।
  • ढुलाई और सप्लाई-चैन नेटवर्क का अभाव गांव-आधारित इनोवेशन को बड़े स्तर पर उतारने में बाधा है।

समस्या: शहरी और ग्रामीण स्टार्टअप्स के अनुभव और अवसरों में व्यापक अंतर है, जिससे प्रदेश स्तरीय योजनाएं जब तक स्थानीय स्तर तक ढली नहीं जातीं, तब तक असंतुलन बना रहता है।

यूनिकॉर्न से लोकल स्टार्टअप तक: राजसमंद का रास्ता

भारत में कुल स्टार्टअप्स की संख्या लगातार बढ़ रही है और कई यूनिकॉर्न तक पहुंच चुके हैं, लेकिन इनमें से बहुत कम ही छोटे जिलों से उभरे हैं।

राजसमंद के लिए स्थानीय सुझाव

  • स्थानीय इनक्यूबेशन सेंटर: राजसमंद में एक इनोवेशन हब / इन्क्यूबेटर स्थापित किया जाना चाहिए, जहां युवा अपने बिज़नेस प्लान पर कार्य कर सकें, तथा मेंटरशिप, को-वर्किंग स्पेस, और ग्राहक जुड़ाव जैसी सुविधाएँ मिले।
  • तकनीकी वर्कशॉप्स और बूट कैम्पस: स्थानीय कॉलेजों और आईटीआई/ इंजीनियरिंग संस्थानों के साथ साझेदारी कर, स्टार्टअप कौशल (मल्टीमीडिया, एआई, मार्केटिंग, बिजनेस मॉडलिंग) पर कार्यशालाएं आयोजित की जानी चाहिए।
  • ग्रामीण नवाचार को बढ़ावा: राजसमंद के कृषि, जल प्रबंधन, मार्बल व लघु उद्योग जैसे स्थानीय क्षेत्रों में एग्रीटेक, हेल्थटेक, प्रॉपटेक आदि समाधान-उन्मुख स्टार्टअप्स जन्म ले सकते हैं, बशर्ते उन्हें स्पेक्ट्रम-अनुकूल फंडिंग और समर्थन मिले।

बजट में हो ये प्रावधान

  • राजस्थान सरकार के आने वाले बजट में विशेष “राजसमंद स्टार्टअप कोष” का प्रावधान होना चाहिए
  • बुनियादी ढांचे पर स्थानीय टैक्स छूट (जैसे व्यवसाय कर, संपत्ति कर में 50–100 प्रतिशत छूट)।- जीएसटी-रिफंड, या मशीनरी आयात शुल्क में छूट जैसी प्रावधानें राजसमंद के स्टार्टअप्स को सक्षम बना सकती हैं।
  • राजस्थान नीति के अनुसार नवाचार भत्ता जैसे 10 हजार प्रतिमाह (पहले से प्रस्तावित) जैसे प्रावधान को राजसमंद आदि जिलों में विशेष रूप से लागू किया जाए।
  • हर तहसील/नगर में स्टार्टअप सेल, जहां आवेदन, मार्गदर्शन और प्रक्रिया सहायता मिले।- कम दस्तावेज़ीकरण, डिजिटल पोर्टल में त्वरित समीक्षा की जाए।
  • हर तीन महीनों में जहां उत्पाद प्रदर्शित हो, निवेशक बैठक हो।