
StartUp And Innovations
राजसमंद, जो पारंपरिक रूप से कृषि, मार्बल व लघु उद्योग के लिए जाना जाता है, आज युवा उद्यमियों का संभावित स्टार्टअप हब बनने की दिशा में अनुभवहीन यात्रा पर है। हालांकि स्थानीय युवाओं में नवप्रवर्तन की ऊर्जा है, लेकिन इन् स्टार्टअप्स को सरकार द्वारा वादों की तुलना में अपेक्षित समर्थन और संसाधन नहीं मिल पा रहे हैं। खासकर बजट, फंडिंग, टैक्स प्रोत्साहन, और इन्फ्रास्ट्रक्चर के मामले में, यही कारण है कि यहां नया स्टार्ट अप नहीं पनप पाए। हालात ऐसे हैं जो युवा स्टार्टअप की दुनिया में है वें दूसरी जगहों पर काम कर रहे हैं। राजसमंद जिला ऐसा हैं जहां इसकी सख्त आवश्यकता है। यदि सरकार की ओर से बजट में इनके लिए कोई विशेष प्रावधान करती है तो युवाओं को प्रोत्साहन मिलेगा और दूसरे लोगों को भी इससे प्रेरणा मिलेगी। लगने को उद्योगों के रूप में मार्बल, माइनिंग से जुड़े उद्योग हैं, लेकिन इनकी माली हालत भी खस्ता है। क्योंकि इनके लिए जीएसडी और नियमों की पेचीदगियां काफी है। जिससे ये उद्योग पनपने की बजाय उजड़ने के कगार पर हैं। मजदूर पलायन करने को मजबूर है।
फंडिंग संबंधित परेशानियां:
समस्या: फंडिंग तक पहुंच का डिज़ाइन स्थानीय स्टार्टअप्स के लिए केंद्रित नहीं है। न तो निवेशक नेटवर्क और ना ही मेन्टरशिप मजबूत स्तर पर उपलब्ध।
केंद्रीय स्टार्ट अप कार्यक्रम के तहत सेक्शन 80- आईएसी जैसे प्रावधान से तीन वर्षों तक 100 प्रतिशत टैक्स छुट मिल सकती है। लेकिन डीपीआईआईटी पंजीकरण और प्रक्रिया की जटिलता (पंजीकरण के लिए समय, दस्तावेज़ीकरण, और पालन-कर प्रक्रियाएं) स्थानीय स्टार्टअपों के लिए बाधा बनी रहती हैं।
समस्या: टैक्स़ छूट और सरकारी मान्यता के लाभ तकनीकी सक्षमता और जानकारी के अभाव में अक्सर सीधे स्थानीय स्टार्टअप तक नहीं पहुंचते।
समस्या: शहरी और ग्रामीण स्टार्टअप्स के अनुभव और अवसरों में व्यापक अंतर है, जिससे प्रदेश स्तरीय योजनाएं जब तक स्थानीय स्तर तक ढली नहीं जातीं, तब तक असंतुलन बना रहता है।
भारत में कुल स्टार्टअप्स की संख्या लगातार बढ़ रही है और कई यूनिकॉर्न तक पहुंच चुके हैं, लेकिन इनमें से बहुत कम ही छोटे जिलों से उभरे हैं।
Published on:
25 Jan 2026 11:42 am
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