
राजसमंद के ग्रीन शेड में लगी फसल। (फाइल फोटो)
हिमांशु धवल @ राजसमंद. जिले में संरक्षित खेती को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं, इसके बावजूद ग्रीन शेड और शेड नेट योजना कागजों में ही दम तोड़ती नजर आ रही है। स्थिति यह है कि पिछले आठ सालों में 121 किसानों ने ग्रीन हाउस और शेडनेट लगाए, लेकिन पिछले साल और वर्तमान वित्तीय वर्ष में अब तक एक भी काश्तकार ने इसके लिए आवेदन नहीं किया है।
राजस्थान सरकार के उद्यान विभाग की ओर से शेडनेट और ग्रीन हाउस लगाने के लिए नियमानुसार अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। संरक्षित खेती को बढ़ावा देना इसका मुख्य उद्धेश्य है। वातावरण को नियंत्रित कर ऑफ सीजन में भी सब्जी एवं फल की पैदावार की जाती है, जिससे काश्तकार को अच्छे दाम मिल सके। बाजार में ऑफ सीजन में सब्जियों एवं फल आदि की वर्षभर मांग बनी रहती है। इसके कारण पिछले कुछ सालों से संरक्षित खेती (ग्रीन हाउस और शेडनेट) को बढ़ावा दिया जा रहा है। विभाग की ओर से इसके लिए नियमानुसार इकाई लागत का 50 से 70 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। इसके बावजूद काश्तकार इसमें रूचि नहीं ले रहे हैं।
इस बार नहीं आया एक भी आवेदन
जिले में 2012 में पहला शेड नेट लगाया गया था। तब से लेकर 2020 तक करीब 121 किसानों ने 1,29,000 वर्गमीटर में ग्रीन-शेडनेट हाउस की स्थापना की। वित्तीय वर्ष 2020-21 में नाथद्वारा में एक ग्रीन हाउस लगा था। इसके बाद से 2021-22 में एक भी ग्रीन हाउस और शेडनेट के लिए आवेदन नहीं आया। यही स्थिति वर्तमान में चल रहे वित्तीय वर्ष की है। सरकार ने इस वर्ष में सामान्य वर्ग में 14000 वर्गमीटर के व लक्ष्य 60.46 लाख निर्धारित किया है। अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 2000 वर्गमीटर और लक्ष्य 8.90 लाख निर्धारित किया है। शेडनेट हाउस के लिए 4 हजार वर्गमीटर और वित्तीय लक्ष्य 14.20 लाख निधारित किया है।
यह बताया जा रहा कारण
जानकारों के अनुसार ग्रीन हाउस व शेडनेट हाउस लगाने की प्रारंभिक लागत अधिक होती है। जिले में अधिकांश स्थानों पर छोटी जोत है। इसके कारण काश्तकार जोखिम उठाने से डरते हैं। पिछले साल सरकार ने ग्रीन हाउस और शेडनेट आदि लगाने के लिए एजेंसी को चिन्हित किया था, लेकिन इस बार अभी तक यह प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई है।
जलवायु परिवर्तन का नहीं पड़ता फर्क
संरक्षित खेती नवीन कृषि प्रणाली है, जिसके माध्यम से किसान फसलों की मांग के अनुसार वातारण को नियंत्रित कर महंगी फसलों के लिए वातावरण तैयार किया जाता है। जलवायु परिवर्तन से भी फसलों पर कोई विपरित प्रभाव नहीं पड़ता है। तकनीकों के उपयोग से फसलों की अच्छी उत्पादकता के साथ बेहतर गुणवत्ता भी प्राप्त होती है।
काश्तकारों के लिए फायदेमंद
संरक्षित खेती काश्तकारों के लिए फायदेमंद है। इससे उत्पादकता और गुणवत्ता दोनों में इजाफा होता है। इस पर मौसम का भी कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता है। इस साल आवंटित लक्ष्यों को पूरा करने के प्रयास किए जा रहा है, अभी तक एक भी आवेदन नहीं आया है।
- डॉ. खुमान सिंह रूपावत, सहायक निदेशक उद्यान विभाग राजसमंद
Published on:
26 Sept 2022 12:38 pm
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