
अब मेडिकल कॉलेज को नाथद्वारा चिकित्सालय से जोडऩे की तैयारी!
राकेश गांधी
राजसमंद. आरके जिला चिकित्सालय को मेडिकल कॉलेज में क्रमोन्नत करने की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। केन्द्र व राज्य सरकार ने भी जिला कलक्टर और जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी को राजसमंद में ही मेडिकल कॉलेज खोलने के निर्देश दिए थे, लेकिन जिले में सर्वाधिक बैड वाला अस्पताल नाथद्वारा में होना बताते हुए मेडिकल कॉलेज को राजसमंद की बजाय नाथद्वारा से सम्बद्ध करने की तैयारी की जा रही है। बडारड़ा में चिह्नित जमीन को आरएसआरडीसी के विशेषज्ञ अभियंताओं द्वारा अधिक खर्चीला बताने के बाद अब नाथद्वारा में ही नई जमीन तलाशने के प्रयास शुरू कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं निदेशक (जन स्वास्थ्य) ने 19 सितंबर को निर्देश जारी कर आरके जिला चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी को मेडिकल कॉलेज के लिए भूमि पट्टा बनवाने के लिए अधिकृत किया था। इसके लिए जिला कलक्टर राजसमंद को भी विशेष निर्देश दिए। इस पर राजस्व व चिकित्सा विभाग ने देवपुरिया व मजा में 75 बीघा जमीन आवंटित की गई। इसकी क्षतिपूर्ति के लिए वैर, मजा व अभयसिंहजी का गुड़ा में बिलानाम को चरागाह में कन्वर्ट किया गया। जिला कलक्टर ने 5 फरवरी 20 को आदेश जारी कर यह कार्रवाई की। इस पर राजस्थान राज्य सड़क विकास प्राधिकरण (आरएसआरडीसी) के अभियंताओं ने आवंटित मेडिकल कॉलेज की भूमि का अवलोकन किया, जिसे अधिक खर्चीला बताया, क्योंकि यह मार्बल स्लरी का डम्पिंग यार्ड व पहाड़ी क्षेत्र है। उसके बाद जिला प्रशासन ने नाथद्वारा में भी नई जमीन तलाशने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। क्योंकि मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध चिकित्सालय में 200 या उससे अधिक शैय्या (बैड) होने चाहिए। इस लिहाज से राजसमंद में 150 बैड ही है और नाथद्वारा में 200 बैड का चिकित्सालय है। इस तरह अब जिला चिकित्सालय का मेडिकल कॉलेज में क्रमोन्नत होने की उम्मीदें टूटती दिख रही है और नाथद्वारा चिकित्सालय के मेडिकल कॉलेज में क्रमोन्नत होने की संभावना बढ़ गई है।
आरएसआरडीसी बनाएगा डीपीआर
राजसमंद में मेडिकल कॉलेज की प्राथमिक रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के लिए प्रशासन द्वारा राजस्थान राज्य सड़क विकास निगम (आरएसआरडीसी) को कार्यादेश दे दिए हैं। मेडिकल कॉलेज बनाने की प्रारंभिक रिपोर्ट में अनुमानित खर्च का तखमीना तैयार किया जाएगा। इसके लिए चिकित्सालय, चिकित्सा महाद्यिालय भवन, चिकित्सक व नर्सेज के आवास, धर्मशाला आदि को सम्मिलित किया जाएगा।
राजसमंद में भी जमीन उपलब्ध
मेडिकल कॉलेज के लिए 20 एकड़ जमीन उपलब्ध होनी चाहिए। इसके तहत आरके जिला चिकित्सालय में वर्तमान में 17.263 एकड़ जमीन है और करीब 3 एकड़ जमीन ही कम पड़ रही है। जिला अस्पताल के पास ही बालिका महाविद्यालय के लिए जमीन पहले से रिजर्व है। चूंकि बालिका महाविद्यालय के लिए भावा के पास नई जमीन आवंटित कर दी गई है। ऐसे में अस्पताल के पास शंकरपुरा में बालिका महाविद्यालय की रिजर्व जमीन को मेडिकल कॉलेज के लिए आवंटित किया जा सकता है।
एक ही जगह कॉलेज- चिकित्सालय के नियम
भारतीय चिकित्सा परिषद के मेडिकल कॉलेज एक्ट 1999 के अंतर्गत यह आवश्यक शर्त है कि चिकित्सालय व चिकित्सा महाविद्यालय के भवन एकल भूमि में ही होने चाहिए। बड़े शहर जहां 25 लाख से ज्यादा की आबादी है, उस जगह जमीन दो टुकड़ों में भी चिह्नित की जा सकती है और उसकी दूरी भी 10 किमी. से अधिक नहीं होनी चाहिए। इस पर राजसमंद जैसे छोटे शहर में एक ही भवन में चिकित्सालय व चिकित्सा महाविद्यालय एकल भूमि में ही खुलना चाहिए।
विधानसभा में सवाल से सामने आई कार्रवाई
विधायक किरण माहेश्वरी ने मेडिकल कॉलेज को लेकर विधानसभा में प्रश्न रखा, जिससे मेडिकल कॉलेज नाथद्वारा अस्पताल से सम्बद्ध होने की कार्रवाई सामने आई। इस पर मेडिकल कॉलेज को राजसमंद से दूर बडारड़ा और अब नाथद्वारा चिकित्सालय से सम्बद्ध करने की कार्रवाई को राजनीति खींचतान के नजरिये से देखा जा रहा है। विधायक माहेश्वरी ने विज्ञप्ति जारी कर आरोप लगाया कि नाथद्वारा विधायक व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी के दबाव में प्रशासन द्वारा नियम विरुद्ध मेडिकल कॉलेज के लिए बडारड़ा के पास जमीन आवंटित की है। माहेश्वरी का आरोप है कि बडारड़ा में चिह्नित जमीन को आरएसआरडीसी के अभियंताओं ने अनुचित करार दे दिया और कॉलेज निर्माण में दोगुना खर्च बढऩा बताया है। माहेश्वरी ने डॉ. जोशी पर आरोप लगाया कि उन्हें विधानसभा में भी इस मुद्दे पर नहीं बोलने दिया। माहेश्वरी ने बताया कि राजसमंद जिले में पहले से निजी मेडिकल कॉलेज होने और वह भी उदयपुर जिले की सीमा पर स्थिति होने पर नियमों में रियायत के लिए केन्द्रीय चिकित्सा मंत्री हर्षवद्र्धन को विशेष ज्ञापन भेजकर आग्रह किया है।
नाथद्वारा में और तलाश रहे जमीन
ये सही है कि आरएसआरडीसी के आर्किटेक्चर ने बडारड़ा की जमीन में अधिक खर्च की बात कही है। हालांकि अभी नाथद्वारा में मेडिकल कॉलेज के लिए एक और जमीन तलाशी जा रही है। दिल्ली की टीम ने 200 बैड या उससे अधिक बैड वाले अस्पताल को ही मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध करने को कहा है। जिला मुख्यालय स्थित जिला अस्पताल अभी 150 बैड का ही हैं, जबकि नाथद्वारा स्थित 200 बैड का है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज को नाथद्वारा अस्पताल से ही अटैच किया जाना है।
- अरविन्द पोसवाल, जिला कलक्टर
Published on:
11 Feb 2020 02:33 pm
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