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राजस्थान के इस शहर के जिला कलक्टर भी नहीं दे रहे ध्यान…पढ़े पूरा मामला

नाकली में चल रहा आईसीएआर का प्रोजेक्ट भी बंद, मिलती थी सटीक जानकारी कृषि विज्ञान केन्द्र सहित जिला मुख्यालय पर नहीं कहीं कोई व्यवस्था

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नाकली गांव में लगा तापमान मापने का मशीन

राजसमंद. जिले के मौसम संबंधी जानकारी अब नहीं मिलेगी, इसका मुख्य कारण नाकली में चल रहे प्रोजेक्ट का बंद होना है। इसके बंदô होने के कारण जिले के मौसम की सटीक और सही जानकारी नहीं मिल सकेगी। इसके अलावा जिले में कहीं भी मौसम वैद्य शाला नहीं है। उदयपुर स्थित महाराणा प्रताप कृषि विश्विद्यालय के तत्वावधान में इंडियन काउंसिंल एग्रीकलचर रिसर्च (आईसीएआर) के द्वारा 2012 से निकरा प्रोजेक्ट संचालित किया जा रहा था। इसके तहत अमलोई, नाकली, भाटोली और मैनपुरिया गांव को गोद ले रखा था। यहां पर मौसम परिवर्तन और कृषि संबंधी रिसर्च के लिए छोटी सी नाकली में मौसम वैद्य शाला बना रखी थी। इससे इसके आस-पास की जानकारी मिलती थी। सुबह 7.30 बजे और दोपहर में 2.30 बजे डाटा लिया जाता था। यहां से तापमान, बारिश, मौसम, फसलों संबंधी एजवाइजरी आदि जारी की जाती थी। इससे आमजन को मौसम की सटीक और सही जानकारी मिलती थी, लेकिन भारत सरकार ने फंड की कमी के चलते आईसीएआर के प्रोजेक्ट को बंद कर दिया है। इसके कारण पिछले कुछ दिनों से मौसम संबंधी जानकारी नहीं मिल पा रही है। इसके कारण आमजन को भी परेशानी हो रही है।

केवीके में भी तापमान मापी यंत्र

कृषि विज्ञान केन्द्र में भी तापमान मापने का यंत्र स्थापित नहीं है। इसके कारण अब जिले के मौसम संबंधी जानकारी नहीं मिल पा रहा है। तहसील स्तर पर सिर्फ वर्षा मापी यंत्र लगे हैं, इससे बारिश के दौरान बारिश की जानकारी मिलती है। सिंचाई विभाग से भी सिर्फ बारिश के दौरान गेज आदि की जानकारी मिलती है। ऐसे में जिला मुख्यालय पर तापमान की जानकारी देने के लिए मौसम वैद्य शाला या प्रोजेक्ट आदि संचालित किया जाना चाहिए, जिससे तापमान की सही जानकारी मिल सकती है।

नहीं होता ऑनलाइन एप विश्वसनीय

कृषि विभाग केन्द्र की ओर से तापमान और मौसम संबंधी जानकारी के लिए भारत सरकार के मेघदूत एप से जानकारी लेने की बात कही जा रही है, लेकिन अधिकांश बार इसके डाटा और स्थानीय वैद्य शाला से उपलब्ध कराए डाटा में अंतर देखने को मिला है, ऐसे में यह कहा जा सकता है कि ऑनलाइन एप से मिलने वाला डाटा पूरी तरह से विश्वसनीय नहीं होता है।

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होना यह चाहिए

  • : जिला मुख्यालय पर मौसम की जानकारी देने वाले यंत्र लगाया जाए
  • : इसकी जिम्मेदारी केवीकी अथवा कृषि विभाग को सौंपी जानी चाहिए
  • : सरकार को इसमें संज्ञान लेकर मौसम विभाग का कार्यालय खोलना चाहिए

प्रोजेक्ट बंद होने से मौसम वैद्य शाला भी हुई बंद

जिले के चार गांवों को निकरा प्रोजेक्ट के तहत गोद लिया गया था। इसमें नाकली में छोटी मौसम वैद्य शाला स्थापित की गई थी। इससे मौसम संबंधी डाटा मिलता था, इसकी जिम्मेदारी एक किसान को दे रखी थी, लेकिन भारत सरकार की ओर से फंड की कमी के चलôते प्रोजेक्ट को बंद कर दिया गया। इसके कारण अब मौसम संबंधी जानकारी उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं।

  • डॉ. जगदीश चौधरी, एसोसिएट प्रोफेसर महाराणा प्रताप कृषि विश्वविद्यालय उदयपुर

भारत सरकार के एप से ले सकते हैं जानकारी

जिले के नाकली गांव में चल रहा प्रोजेक्ट बंद हो गया है। इसके कारण तापमान संबंधी जानकारी नहीं मिल रही है। भारत सरकार के मेघदूत एप से इसकी जानकारी ली जा सकती है।

  • डॉ. पी. सी. रैगर, अध्यक्ष कृषि विज्ञान केन्द्र राजसमंद