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Half Naked Women : अद्र्धनग्न हालत में महिला को कैसे पीटा-घसीटा, वारदात पीडि़ता की जुबानी

बदहवास हालत में Nathdwara अस्पताल में बैठी पीडि़ता बोली- सहेली और पुलिस न होती, तो मार देते उसे उपली ओडन में one half naked women dragged beaten

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उपली ओडन में अद्र्धनग्न हालत में कैसे पीटा-घसीटा, वारदात आदिवासी पीडि़ता की जुबानी

लक्ष्मणसिंह राठौड़ @ राजसमंद

अनजाने गुनाह के लिए उसे पीटा, चोटी पकड़ कर घसीटने के दर्द से ज्यादा उसे बेइज्जत की फिक्र सता रही थी। घटना के 24 घंटे बाद वह नाथद्वारा के ट्रोमा सेंटर में कुर्सी पर बैठी थी, मगर वह दरिंदगी की दहशत से कांप रही थी। खुद को कोस रही थी कि वह बेआबरू होकर अब कैसे जी पाएगी। वह बोली- मैं घटना के वक्त रो नहीं रही, बल्कि बचाव की पुकार में चीख रही थी, मगर ज्यादातर लोग देखकर भी अनदेखा कर गए। कुछ हिम्मत कर बचाने आए भी, तो उनको भी लाठियां दिखा धमका दिया। साड़ी रास्ते में गिर गई, तो ब्लाउज- घाघरा फटने से पीडि़ता बेआबरू होती ही गई। घटना के बारह घंटे बाद भी वह सदमे से नहीं उबर पाई। रुंधे गले से पीडि़ता के हर बोल के साथ आंसू छलक रहे थे। वे लात-घुसे, मारते हुए लाठियों से पीटते रहे। हाथ-पैर, पीठ, पेट, सिर व चेहरे तक पर वार करने से नहीं चुके। बार-बार बोलती जा रही थी कि आखिर मेरा क्या गुनाह था। अगर उसके बेटे के साथ उनकी बेटी गई है, तो वे जाने। वे बड़े होकर बालिग। निर्णय में सक्षम भी है। इस बात से मैं भी तो दुखी हूं। यह कहते हुए वह फफक पड़ी और आंसू छलक गए। पास में रूआंसा बैठा छोटा बेटा दिलासा दे रहा था, मगर घूंघट ओढ़े पीडि़ता बातों ही बातों में खुद को धिक्कार रही थी। अंत में पीडि़ता बोली- यह भला ही उन पुलिस वालो का, जो आ गए और उसे बदमाशों के चंगुल से मुक्त करा दिया, वरना वे तो उसे मार ही डालते। फिर वह चुप हो गई, मगर सिसकता मन, कांपती रूह बता रही थी उसके साथ हुई दरिंदगी की कहानी।

ये हालात गुरुवार दोपहर पत्रिका टीम राजकीय गोवर्धन चिकित्सालय नाथद्वारा के ट्रोमा सेंटर पहुंची, तो पीडि़ता ने हैवानियत की पूरी कहानी बयां की। बताया कि दो बच्चे जब नौ-दस वर्ष के थे, तभी उसके पति का निधन हो गया, मगर ऐसी बेइज्जती कभी नहीं हुई। अब मैं कैसे जीऊंगी। बांस की लकड़ी से पीटते रहे। मैं विधवा औरत हूं, मुझे न्याय दिलाओ, अब मेरा कौन है। आरोपियों को सजा मिले, ताकि मेरे जैसा कृत्य किसी अन्य महिला के साथ करने का कोई दुस्साहस न कर सकें।

एक किमी. तक निकाली बिंदोली
पेला ओड़ में पीडि़ता को उसके घर से घसीटते-पीटते हुए रवाना हुए, जो बस स्टैंड, फोरलेन के अंडरपास से खमनोर जाने वाले मार्ग पर ग्राम पंचायत कार्यालय उपली ओडन होते हुए ब्रह्मपुरी से चारभुजा मंदिर, सिंहाल मगरी के नीचे डाकघर के पास गली में रतनलाल कीर के मकान बंद कर मारपीट की। मुख्य द्वार पर एक महिला पहरेदार खड़ी हो गई और अंदर अन्य महिला व उसके परिजन पीटते रहे।

सुज गया शरीर, उभर आए जख्म
गीली बांस के लठ, सरिये से बेरहम मारपीट की वजह से पैर, जांघ, घुटना, पीठ पर रक्त के धब्बे जम गए और जख्म उभर आए। एक हाथ व अंगुलियों के बीच सुजन भी आ गई। अस्पताल परिसर में पीडि़ता खुद उठ भी नहीं पा रही थी।

शराब के नशे में थे सभी आरोपी
पीडि़ता देहाती में बोली- सब जणा दारू पी आया। म्हने लात-घुसा मारता रीया, पीटता रिया। मुं अकेली औरत। एक लुगाई म्हारी चोटी पकड़ी लीदी, तो दूसरी रेपटा मेली री ही। आदमी लाता मारता रिया। मुंह बोलती री- म्हने छोड़ दो, मुं काईज नी जाणु। पण वे म्हारी वात नी हुणी रीया। पछे म्हारी सहेली आई। सरपंच साब रे घरेऊं कपड़ा लेईन आया अर म्हने पेनाया। पछे पुलिस वाळा आई ग्या अर वने अस्पताल लेइन ग्या।