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सिर्फ महिलाओं को रास आई ‘शहरी रोजगार गारंटी’ !

- जिले में 28 हजार से अधिक को मिला रोजगार, इसमें 80-90 फीसदी महिलाएं शामिल, शहरी क्षेत्र में नाममात्र का पुरुष करते हैं काम, प्रदेश में सितम्बर 22 में शुरू हुई थी योजना

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सिर्फ महिलाओं को रास आई 'शहरी रोजगार गारंटी' !

राजसमंद के कांकरोली थाने के पास काम करती महिलाएं।

हिमांशु धवल@ राजसमंद. प्रदेश में जारी इन्दिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी का नाम बदलकर अब इसे महिला रोजगार गारंटी कर देना चाहिए। यह बात आपको को सुनने में जरूर अजीब लगेगी, लेकिन यह बात सत्य है कि जिले में संचालित इन्दिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना में 80 से 90 फीसदी महिलाएं ही काम कर रह रही है। इसमें काम करने वाले पुरुषों की संख्या नाममात्र की है।
प्रदेश में राज्य सरकारी की ओर से आमजन को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए इन्दिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना 9 सितम्बर 2022 को शुरू की गई। इसमें प्रतिवर्ष 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाता है। शहरी क्षेत्र में संचालित योजना के तहत स्थानीय नगर निकाय की सीमा में काम कराया जाता है। इसमें जॉब कार्ड बनाने से लेकर, काम मांगने, हाजरी लगाने और काम का भुगतान सहित सभी कार्य ऑनलाइन किए जाते हैं। इसके लिए पूरी अलग से विंग काम करती है। इसमें काम करने वाले लोगों को 200 से 260 रुपए प्रतिदिन की आय होती है। हालांकि इन्हें भुगतान पखवाड़े के हिसाब से सीधे बैंक खातों में किया जाता है। विभागीय जानकारों के अनुसार जिले में 9 सितम्बर 2022 से 28 फरवरी 2023 तक करीब 28 हजार लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है।


फैक्ट फाइल (9 सितम्बर से 28 फरवरी तक)
- 13686 राजमसंद नगर परिषद में नियोजित श्रमिक
- 5550 नाथद्वारा नगर पालिका में किया काम
- 3927 आमेट नगर पालिका में नियोजित श्रमिक
- 5726 देवगढ़ नगर पालिका में नियोजित श्रमिक

12 हजार से अधिक महिलाओं ने किया काम
जिला मुख्यालय पर संचालित शहरी रोजगार गारंटी में अब तक 13686 लोगों ने रोजगार प्राप्त किया। इसमें 12 हजार से अधिक महिलाओं ने काम किया है। यही स्थिति आमेट, नाथद्वारा और देवगढ़ नगर पालिका में भी महिलाओं की संख्या 80-90 प्रतिशत के करीब बताई जा रही है।
यह काम करवाए जा रहे
- शहर की सड़कों के किनारे साफ-सफाई
- रोड पर बने डिवाइडरों की साफ-सफाई
- डिवाइडरों की रंगाई-पुताई का काम
- रोड पर ब्लॉक आदि की खुदाई काम काम
- पौधरोपण करना और उनकी देखभाल
पुरुषों की संख्या कम होने का कारण
- वार्डो में अधिकांश कार्य साफ-सफाई के होते हैं
- वार्ड अथवा उसके आस-पास काम मिलना।
- पुरुषों के पहले से काम करने रहने के कारण
90 से अधिक महिलाएं कर रही काम
जिला मुख्यालय पर इन्दिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना के तहत फरवरी माह के अंत तक 13 हजार से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। इसमें से 90 प्रतिशत से महिलाएं काम कर रही है। पुरुषों की संख्या काफी कम है।
- जनार्दन शर्मा, आयुक्त, नगर परिषद राजसमंद
80 से 90 प्रतिशत महिलाएं कर रही काम
नगर पालिका क्षेत्र में इन्दिरा गांधी शहरी रोजगार योजना में काम करने वाली अधिकांश महिलाएं है। पुरुषों का अनुपात 10 से 20 और महिलाओं का 80-90 फीसदी कहा जा सकता है। महिलाओं के लिए कार्यस्थल पर मोबाइल शौचालय आदि भी उपलब्ध कराया जाता है। यही स्थिति देवगढ़ में भी है।
- कृष्ण गोपाल माली, कार्यवाहक ईओ देवगढ़ और नगर पालिका आमेट