
राज्य सरकार ने भीम को जिले का पांचवां नगर निकाय तो एक साल पहले घोषित कर दिया, लेकिन इसकी झोली में न तो संसाधन है, न स्टॉफ, न कोई बजट का बंदोबस्त। यही वजह है कि केन्द्र और राज्य सरकारों के अंतरिम बजट घोषित होने के बाद राज्यभर में स्थानीय निकायों की बजट बैठकें खत्म हो चुकी हैं, लेकिन भीम नगरपालिका में कोई हलचल ही नहीं है।नगरपालिका क्षेत्रवासियों को बजट बैठक की उम्मीद लगी हैं, लेकिन स्थानीय निकाय अधिकारी, कर्मचारी, संसाधनों और बजट की कमी का सामना कर रहा है।
जिले के सबसे बड़े उपखंड मुख्यालय की भीम ग्राम पंचायत को 66 वर्ष बाद गत वर्ष बजट में राज्य सरकार ने नगर पालिका का दर्जा दे दिया था, लेकिन एक साल के अंतराल में जमीनी हालातों में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।
जिले की राजसमंद नगर परिषद, आमेट, नाथद्वारा और देवगढ़ नगरपालिकाओं में वित्तीय वर्ष 2024-25 की बजट प्रस्ताव बैठकें आयोजित हो चुकी हैं, लेकिन भीम नगरपालिका रामभरोसे चल रही है। मौजूदा सत्ताधारी दल के विधायक हरिसिंह रावत ने विधानसभा में प्रक्रिया एवं कार्य संचालन के नियम-295 के अंतर्गत नवगठित नगरपालिका भीम के कार्यालय निर्माण एवं विभिन्न विकास कार्यों के संबंध में हालात सुधारने का मुद्दा भी उठाया था, लेकिन कहीं कोई असर नजर नहीं आ रहा है।
आय-व्यय की दशा-दिशा तय नहीं
बजट को लेकर कोई दशा-दिशा तय नहीं होने से नगरपालिका की वित्तीय स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। आगामी वर्ष के आय-व्यय को लेकर जनता में भी असमंजस का माहौल है। नगरपालिका की आय के स्रोत, विकास और पूंजीगत के मद्देनजर पार्षदों में भी भ्रामक स्थिति बनी हुई है।
इनका कहना है...
मैंने 9 अक्टूबर, 2023 को कार्यग्रहण किया था। पालिका की साधारण सभा नहीं हुई है। पूर्व की ग्राम पंचायत के संसाधनों एवं सफाईकर्मियों से साफ-सफाई एवं बिजली व्यवस्थाएं संचालित की जा रही हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट को लेकर शीघ्र ही बैठक बुलाई जाएगी।
कैलाशराम पंचारिया, कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी, नगरपालिका, भीम
नगरपालिका क्रमोन्नत हुए करीब एक वर्ष होने के बाद साधारण सभा नहीं हुई है। किसी तरह के विकास के कोई प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किए गए हैं और राज्य सरकार से हमें कोई बजट भी नहीं मिला है।
यशोदा कंवर, पालिकाध्यक्ष, भीम
Published on:
24 Feb 2024 11:52 am
