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एक साल पहले बनी भीम नगरपालिका, तमगा बदला, हालात तो जैसे थे वैसे ही

शहरी रोजगार गारंटी योजना में मजदूरों को नहीं मिल रहा काम, ईओ, जेईएन,सफाईकर्मियों सहित कई पदों पर नहीं हुई स्थाई नियुक्तियां

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हीरालाल भाट@ दो दशक के इंतजार के बाद गत 10 फरवरी को राज्य बजट में सरकार ने भीम ग्राम पंचायत को क्रमोन्नत कर इसे नगरपालिका का दर्जा तो दे दिया, लेकिन जमीनी स्तर पर हालातों में कोई खास बदलाव नहीं आया है। यह जरूर हुआ कि पंचायत भवन पर नाम बदलकर नगरपालिका कर दिया गया है।
स्वायत शासन विभाग की ओर से कोई अपेक्षित सुधार नजर नहीं आ रहे हैं। भीम कस्बे के मनरेगा श्रमिक शहरी रोजगार गारंटी योजना में रोजगार पाने के लिए चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें रोजगार तो मिलना दूर की बात है, जॉब कार्ड पंजीयन भी नहीं हो रहे हैं। पूर्व में भीम जब ग्राम पंचायत थी, तब महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में काम एवं मजदूरी मिल जाती थी। वर्तमान में मनरेगा श्रमिक आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं।

सफाई एवं सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था
कस्बे के मुख्य मार्ग, सदर बाजार सहित 25 वार्डों में सार्वजनिक साफ-सफाई व्यवस्था 25 अस्थाई सफाईकर्मियों द्वारा की जा रही है। इस काम में एक ट्रैक्टर-ट्रॉली लगी है, जो कचरा संग्रहण कर खुले रूप से डंपिंग यार्ड तक पहुंचाती है। रोड लाइटों की व्यवस्था में भी कोई बदलाव नहीं हुआ है।

66 वर्ष बाद पंचायत से नगरपालिका में तब्दील प्रशासन
भीम ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच अमरसिंह रावत ने बताया कि भीम को पंचायत बनने के 66 वर्षों बाद नगरपालिका का दर्जा मिला है। भीम ग्राम पंचायत 1957 में स्थापित हुई थी। प्रथम सरपंच मालसिंह निर्वाचित हुए थे। गत फरवरी के बजट में सीएम अशोक गहलोत ने भीम को नगरपालिका बनाने की घोषणा की थी। वर्तमान सरपंच यशोदा कंवर अब पालिका अध्यक्ष एवं सभी वार्डपंच पार्षद मनोनीत हैं। वर्तमान में राज्य सरकार की ओर से कोई बजट आवंटन नहीं होने से कामकाज ठप पड़े हैं।

पालिका को जमीन आवंटित, लेकिन भवन निर्माण का बजट नहीं
नगरपालिका के कार्यवाहक ईओ भीम विकास अधिकारी कैलाशराम पंचारिया ने बताया कि राजस्व गांव भीम के आरजी खसरा संख्या 1683/12375 में 0.8095 हेक्टेयर भूमि राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1963 में वर्णित प्रावधानों के तहत राजकीय नगरपालिका कार्यालय, भीम को कार्यालय भवन निर्माण के लिए जमीन आवंटित की गई है, लेकिन भवन निर्माण के लिए कोई बजट स्वीकृति जारी नहीं हुई है।

बजट के अभाव में व्यवस्थाएं गड़बड़ा रही
मनोनीत पालिकाध्यक्ष यशोदा कंवर ने बताया कि ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज से मिलने वाले वित्तीय लाभ बंद हो गए हैं। शहरी विकास योजना के तहत अब तक कोई बजट स्वीकृत नहीं होने से व्यवस्था गड़बड़ा रही है। पूर्व की ग्राम पंचायत की निजी आय से संविदाकर्मियों को लगाकर सफाई एवं लाइट व्यवस्थाएं संचालित कर रहे हैं। मनरेगा श्रमिकों को भी रोजगार नहीं मिल पा रहा है।

विधानसभा में बोले भीम हरिसिंह- कार्यालय निर्माण जल्द करवाए सरकार
विधानसभा में प्रक्रिया एवं कार्य संचालन के नियम-295 के अंतर्गत नवगठित नगरपालिका भीम के कार्यालय निर्माण व विभिन्न विकास कार्यों के संबंध में विधायक हरि सिंह रावत ने चर्चा करते हुए हालात सुधारने का अनुरोध किया। विधायक ने कहा कि अभी तक नगरपालिका कार्यालय नहीं बना है तथा न ही कोई कार्यवाही की गई है। गरीब तबके के मजूदर व महिलाएं मनरेगा से भी वंचित हो गए। अब शहरी रोजगार गारंटी योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। नगरपालिका क्षेत्र की जनता अपनेआप को ठगा सा महसूस कर रही है। भीम की नवगठित नगरपालिका का कार्यालय तत्काल शुरू करवा अधिकारी व कर्मचारियों की नियुक्ति के साथ ही पालिका स्तर के कामों का निष्पादन करवाने का आग्रह किया।