
राजसमंद के 100 फीट रोड पर लगी बंजारा समाज की अस्थाई दुकानें।
हिमांशु धवल@ राजसमंद. बंजारा समाज के लोग अब अपना पुश्तैनी काम को छोड़कर नई इबारत लिख रहे हैं। जिले में विभिन्न स्थानों पर बंजारा समाज के लोगों ने 40 से अधिक गर्म कपड़े और कम्बल आदि की अस्थाई दुकानें लगा रखी है। हालांकि राजस्थान के अलावा यहां पर मध्यप्रदेश और झालावाड़ आदि स्थानों से आए दुकानदार भी शामिल है।
बंजारा समाज के लोग पहले पशुओं की खरीद-फरोख्त का काम करते थे। समय के साथ बैल के बाहर जाने पर रोक और मांग कम होने के कारण काम बंद हो गया। इसके बाद इन्होंने लाल मिर्च बेचने का काम शुरू किया। बंजारा समाज के लोगों ने दोपहिया वाहनों पर गली-गली मोहल्लों में लाल मिर्च आदि बेची, लेकिन समय के साथ अधिकांश लोग पीसी हुई मिर्च और मसालों का उपयोग करने लगे। इससे इनका यह काम भी बंद हो गया। यह लोग मेहनतकश होने के कारण इन्होंने मकानों की नींव और टैंक आदि खोदने का काम शुरू किया, लेकिन यह काम भी जेसीबी के माध्यम से होने लगा। इसके कारण रोजी-रोटी का जुगाड़ करना मुश्किल हो गया। इसके पश्चात पिछले कुछ वर्षो से यह लोग अब सर्दी के दौरान गर्म कपड़ों की स्थाई दुकानें लगाने लगे। पहले इनकी संख्या 5-10 होती थी, लेकिन अब जिले में इनकी संख्या 40 से अधिक हो गई है। हालांकि अभी भी बंजारा समाज के कई लोग मकानों की चौकीदारी करने, टे्रक्टर को खाली और भरने सहित अन्य काम भी कर रहे हैं।
खेती के लिए जमीन है, लेकिन पानी नहीं
बंजारा समाज के अधिकांश लोग रेलमगरा पंचायत के रहने वाले हैं। इसमें से अधिकांश लोगों के पास जमीन है, लेकिन काश्त छोटी होने और पानी की कमी के कारण सिर्फ बारिश के दौरान फसल होती हैं, लेकिन साल भर के लिए पर्याप्त नहीं होने के चलते मेहनत और मजदूरी करते हैं। इसमें से कुछ लोग अब गर्म कपड़ों के काम में लग गए है।
लुधियाना से लाते माल, यहां यह इतनी दुकानें
शहर के 100 फीट रोड पर करीब 20 अस्थाई दुकानें लगी है। इसमें अधिकांश दुकानें बंजारा समाज के लोगों की है। दुकानदारों ने बताया कि वह लुधियाना से गर्म कम्बल, रजाई, शॉल और गर्म कपड़े लाते हैं। उन्होंने बताया कि नाथद्वारा में 10, रेलमगरा में 5, केलवा सहित विभिन्न स्थानों पर बंजारा समाज के लोगों ने अस्थाई गर्म कपड़ों की दुकानें लगाई है।
दो साल पहले से लगा रहा हूं दुकान
पुश्तैनी काम को छोड़ दिया है। कोरोना के बाद से ही गर्म कपड़ों की बिक्री का काम शुरू किया है। दो साल हो गए है काम करते हुए। दाल-रोटी का गुजारा हो जाता है। जिले में कई स्थानों पर समाज के लोगों ने गर्म कपड़ों की दुकानें लगा रखी है।
- औंकार बंजारा, विक्रेता
छोटी काश्त वर्षो से लगा रहे दुकानें
रेलमगरा सादड़ी में जमीन है, लेकिन बारिश की फसल ही होती है। वह पर्याप्त नहीं होने के कारण पिछले कई वर्षो से पत्नी के साथ यहां दुकान लगा रहे हैं। पहले कम दुकानें होती थी, लेकिन अब इनकी संख्या बढ़ती जा रही है।
- दुर्गाराम बंजारा, विक्रेता
Published on:
17 Nov 2022 11:25 am
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