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कीमतों में आग लगते ही बुझे उज्ज्वला के चूल्हे

गैस सिलेण्डर के दाम 14 दिन में सौ रुपए तक बढ़े, फिर धुएं की गिरफ्त में गृहिणियां, कमजोर आर्थिक परिवारों की गृहिणियां खाना पकाने के पुराने तरीकों पर लौटने को हुईं विवश, महिलाएं चूल्हे में लकड़ी जलाकर पका रही हैं खाना

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कीमतों में आग लगते ही बुझे उज्ज्वला के चूल्हे

कीमतों में आग लगते ही बुझे उज्ज्वला के चूल्हे

गिरीश पालीवाल @ खमनोर. पारंपरिक चूल्हों में लकड़ी जलाकर धुएं और घुटन के बीच रोटी बनाने वाली गरीब परिवारों की महिलाओं की चिंता में केंद्र सरकार उज्ज्वला योजना लेकर लाई थी। योजना में मुफ्त घरेलू गैस के कनेक्शन बांटे। कोरोनाकाल में तो तीन सिलेंडरों की मुफ्त रीफिलिंग भी की, मगर अप्रेल में गैस सब्सिडी बंद होने और दिसंबर में कीमतों में अचानक लगी आग ने गरीब परिवारों की महिलाओं के लिए दो वक्त की रोटी बनाना मुश्किल कर दिया है।

जिले में हजारों गरीब परिवारों ने उज्ज्वला योजना में मिले गैस सिलेंडर और चूल्हे कोने में सरका दिए हैं और गृहणियां फिर से पारंपरिक तरीके से खाना पकाने लगी हैं। कीमतें बढऩे से उज्ज्वला गैस के उपभोक्ताओं के लिए महंगी गैस पर रोटियां बनाना हैसियत से बाहर हो गया है। महिलाएं खाना पकाने के लिए अब महिलाएं लकडिय़ां बीनने निकल पड़ती हैं। देहात में अधिकांश घरों में सिलेण्डर बंद हो चुके हैं। गृहणियां सुबह-शाम का खाना मिट्टी-पत्थरों से बने देसी चूल्हो में खेत, खलिहान, जंगल से एकत्र लकडिय़ों और मवेशियों के गोबर से बने कंडों को झोंककर बनाने लगी हैं। चूल्हों के पास बैठ रोटी बनाने वाली महिलाओं के लिए पहले की तरह ही सांसों में धुआं, आंखों में जलन और आंसू की बेबसी लौट आई है।

जिले में उज्ज्वला के 1.5 लाख हैं उपभोक्ता परिवार
जिले में उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन का लाभ लेने वाले एक लाख 44 हजार 884 परिवार हैं। योजना की शर्त के मुताबिक उज्ज्वला योजना में परिवार की महिलाओं के नाम कनेक्शन जारी किए गए हैं। सामान्य उपभोक्ताओं को मिलाकर यह आंकड़ा 2 लाख 69 हजार 79 है। घरेलू गैस सिलेंडरों में गैस में 14.2 किलो गैस दी जाती है।

कोरोनाकाल में मिले थे तीन मुफ्त सिलेंडर
केंद्र सरकार ने कोरोनाकाल में उज्ज्वला गैस का उपयोग करने वाले कमजोर परिवारों को मुफ्त में सिलेंडर रीफिलिंग का लाभ दिया था। यह लाभ सरकार ने अप्रेल से जून के बीच तीन सिलेंडरों का रुपया उपभोक्ताओं के खातों में डालकर दिया था। मुफ्त लाभ के सिलेंडर की गैस खत्म होने और दाम बढऩे से उज्ज्वला गैस के सिलेंडरों की रीफिलिंग से उपभोक्ताओं ने मुंह मोड़ लिया है। इससे रीफिलिंग के आंकड़ों में गिरावट आ गई है।

सब्सिडी बंद, बढ़ोतरी चालू
दिसंबर 2020 में ही घरेलू गैस सिलेंडरों की दो बार कीमतें बढ़ी हैं। 2 दिसंबर को 50 रुपए और 14 दिनों के अंतराल में ही 15 दिसंबर को फिर 50 रुपए बढ़ा दिए। एक ही माह में सौ रुपए बढऩे से उज्ज्वला के ही नहीं, सामान्य उपभोक्ताओं की भी कमर टूट गई है। सब्सिडी भी अप्रेल से बंद है। किसी महीने में आई भी दहाई के मामूली आंकड़े में।

छलका महिलाओं का दर्द
सलोदा गांव में लोगरी बाई पत्नी डूंगा भील, पनकी बाई सहित अनेक ग्रामीण इलाकों में आदिवासी परिवारों की महिलाओं से पत्रिका ने बात की तो उन्होंने बताया कि गैस की कीमतों ने रुला दिया है तो अब फिर से चूल्हों में लकड़ी के धुएं से वास्ता जोडऩा पड़ रहा है। वे महंगी गैस खरीदकर चूल्हा जलाने की बजाय लकडिय़ों से ही खाना, चाय आदि बनाना पसंद करेेंगी। कई महिलाओं ने सरकार और गैस कंपनियों की इन नीतियों को छलावा तक बता दिया है।

2020 में ऐसे बढ़ीं घरेलू गैस की कीमतें
माह कीमत
जनवरी 740
फरवरी 884
मार्च 831
अप्रेल 770
(यहां तक सब्सिडी मिलती थी, तो सिलेण्डर सस्ता पड़ता था)
मई 588
जून 618
जुलाई 622
अगस्त 623
सितंबर 624
अक्टूबर 624
नवंबर 624
दिसंबर 724$
(इस माह दो बार 50-50 रुपए बढ़ाए गए)

कोरोनाकाल में फ्री सिलेंडर दिए, मगर उसके बाद सब्सिडी नहीं के बराबर मिल रही है, जिससे उपभोक्ताओं को दिक्कत तो हो रही है। सब्सिडी मिलती रहे तो शायद लोग एलपीजी का उपयोग नहीं छोड़ेंगे।
संदीप माथुर, जिला रसद अधिकारी, राजसमंद