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तीनों पंचायत समिति, नगरपालिका पर कांग्रेस के कब्जे के बावजूद सीपी जोशी की क्यों हुई हार?

Rajasthan Assembly Election 2023 अपने गृहनगर नाथद्वारा के अलावा ग्रामीण में मजबूत गढ़ देलवाड़ा में भी पीछे रहे कांग्रेस के दिग्गज नेता

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जिले की चारों विधानसभा सीटों पर कांग्रेस का सूपड़ा साफ होने के बाद भाजपा की जीत की तुलना में सबसे ज्यादा चर्चाएं नाथद्वारा की हॉट सीट पर कांग्रेस के दिग्गज नेता सीपी जोशी के हारने की है। इस विधानसभा क्षेत्र की सबसे पुरानी पंचायत समिति खमनोर 25, नई पंचायत समिति देलवाड़ा 16 और रेलमगरा की 14 पंचायतों को मिलाकर 55 पंचायतों में ज्यादातर में कांग्रेस समर्थित सरपंच हैं। यही नहीं, तीनों प्रधान कांग्रेस के हैं। इसके अलावा शहरी नगरपालिका क्षेत्र नाथद्वारा में भी कांग्रेस का बोर्ड है। इसके बावजूद सीपी जोशी की हार को निचली इकाइयों के प्रदर्शन से भी जोडक़र देखा जा रहा है। भाजपा की जीत के फैक्टर्स पर भी आम लोगों के बीच मंथन हो रहा है।

नाथद्वारा शहर में भाजपा को बढ़त मिलने का दावा
नाथद्वारा. राजनीति के मैदान में नए खिलाड़ी भाजपा के विश्वराज सिंह से कांग्रेस के बड़े नेता डॉ. सीपी जोशी की हार की चर्चा वर्ष 2008 में कल्याणङ्क्षसह चौहान के हाथों एक वोट से मिली मात से भी ज्यादा चर्चा है। हार घोषित होते ही जोशी रविवार दोपहर यहां से जयपुर रवाना हो गए। शहर से लेकर खमनोर, देलवाड़ा और रेलमगरा ब्लॉक तक हार के कारणों की खूब चर्चाएं हैं। इधर, भाजपा खेमे का दावा है कि विश्वराज सिंह को नाथद्वारा नगर के 27 बूथों पर मिलाकर 1641 मतों की बढ़त मिली। 16 बूथों पर भाजपा आगे रही।

राजनीति में एकदम नए चेहरे से हारने के कारणों की चर्चा
कांग्रेस का मजबूत गढ़ देलवाड़ा ब्लॉक कांग्रेस के डॉ. सीपी जोशी का साथ छोड़ भाजपा के विश्वराज ङ्क्षसह मेवाड़ के पक्ष में गया। देलवाड़ा पंचायत समिति क्षेत्र से भाजपा को 2529 वोट की बढ़त मिली। 16 पंचायतों में कुल पड़े 49062 मतों में से मेवाड़ को 24908 मत मिले, जबकि डॉ. जोशी को 22379 मत मिले। 9 पंचायतों में मेवाड़ ने व जोशी को सात पंचायतों में बढ़त मिली। वर्ष 2018 के चुनाव में डॉ. जोशी को सोलह पंचायतों में 2229 मतों की बढ़त मिली थी, लेकिन इस बार के चुनाव में भाजपा ने बाजी पलटकर 2529 मत से जीत हासिल की। पांच साल में जोशी ने यहां तहसील, पंचायत समिति कार्यालय और कई भवन भी बनवाए।

बूथों पर बढ़त का हिसाब
भाजपा को सर्वाधिक बढ़त बूथ संख्या 153 निम्बेला-करोली में 698 मत की व कालीवास बूथ संख्या 186 पर 534 मत की मिली। डॉ. जोशी को बूथ संख्या 164 नेगडिय़ा बांया भाग पर 516 मत और बूथ संख्या 165 पीपलवास में 349 मत की बढ़त मिली। बूथ संख्या 152 करोली और बूथ संख्या 148 लालमादड़ी में कांटे की टक्कर रही जहां क्रमश: 08 और 02 मत के अंतर से कांग्रेस बढ़त बनाने में कामयाब रही, जबकि बूथ संख्या 114 देपुर में मुकाबला टाई रहा।

भाजपा को यहां बढ़त
सर्वाधिक मंडियाना में 870 मतों की और कालीवास में 648 मतों की बढ़त मिली, जबकि करौली में 509, रामपुर में 490, घोड़च में 358, लालमादड़ी में 271, उथनोल में 238, सेमल में 218, बिलोता में 147 मतों से बढ़त।

कांग्रेस को यहां बढ़त
सर्वाधिक बढ़त नेगडिय़ा से 715 मतों की। देलवाड़ा कस्बे से कांग्रेस को 153 मतों की बढ़त। शिशवी में 139 मत, नेड़च में 286 मत, केसूली में 33 मत, सालोर में 291 मत, ओडन में कांटे की टक्कर में 6 मतों से बढ़त, मंडियाना पंचायत के देपुर बूथ से दोनों दलों को बराबर 384 मत मिले।

भाजपा की जीत के तीन बड़े कारण
- हिन्दुत्ववादी विचारधारा
- राजपूत-आदिवासी मतों का धु्रवीकरण
- नया चेहरा, पूर्व राजपरिवार के सदस्य पर दांव
- भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं की सभाएं, रोड-शो

कांग्रेस की हार के बड़े तीन कारण
- बड़े स्टार प्रचारकों का नहीं आना
- जोशी की टीम से निचले कार्यकर्ताओं व आमजन में नाराजगी
- बड़े डवलपमेंट प्रोजेक्ट््स के बीच आधारभूत व व्यक्तिगत कार्यों की अनदेखी
- पांच साल में जनता से बनी दूरी