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VIDEO : पन्नाधाय कविता के रचियता सोहनलाल चौधरी बोले- चित्तौडग़ढ़ की मिनारों से मिली इतिहास लिखने की सीख

डिजिटल पत्रिका के लिए सोहनलाल चौधरी का साक्षात्कार लेते संवाददाता गिरीश व्यास

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VIDEO : पन्नाधाय कविता के रचियता बोले- चित्तौडग़ढ़ की मिनारों से मिली इतिहास लिखने की सीख

लक्ष्मणसिंह राठौड़ @ राजसमंद

रेलमगरा कस्बे के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की कक्षा 8 में अध्ययनरत नेहा वैष्णव द्वारा प्रस्तुत की गई पन्नाधाय के बलिदान पर आधारित कविता, जो इन दिनों सोशल मीडिया पर छा रही है और हजारों लाइक के साथ सुर्खियों में है, उसके रचयिता चित्तौडग़ढ़ जिले के गंगरार के रहने वाले सोहनलाल चौधरी हैं। गंगरार तहसील क्षेत्र के छोटे से गांव चोंगावड़ी के निवासी सोहनलाल से पत्रिका ने उनके रचनाधर्म को लेकर बातचीत की। चौधरी ने अपनी स्कूली शिक्षा पूर्ण करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए चित्तौडग़ढ़ के महाविद्यालय में प्रवेश लिया। उच्च शिक्षा ग्रहण करने के दौरान ही चित्तौडग़ढ़ के किले की एतिहासिक प्राचीरों को देखकर उस समय रहे इतिहास के लम्हों के दृश्य को आत्मसात करते हुए ही उन्होंने उसे शब्दों में पिरोते हुए कविता का रूप देने का प्रयास शुरू कर दिया। इसी दौरान उन्होंने चित्तौडग़ढ़ किले से जुड़े इतिहास को लेकर एक मार्मिक कविता लिखी, जो अखबारों में प्रकाशित भी हुई थी। एक बार उनकी कविता अखबार में प्रकाशित हुई तो आगे और भी कविताएं लिखने की प्रेरणा जागी और चौधरी ने शिक्षा के साथ-साथ कविताएं लिखना शुरू कर दिया।

शिक्षा पूर्ण करने के बाद चौधरी शिक्षक बन गए और शिक्षण कार्य करवाने के साथ ही उन्होंने अपने अंदर के रचनाकार को भी जगाए रखा और अध्ययन भी जारी रखा। चौधरी वर्तमान में चित्तौडग़ढ़ जिले के आझोलिया का खेड़ा के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में संस्था प्रधान के रूप में कार्यरत हैं। उनकी इस कविता को मिली अपार सफलता के बाद राजस्थान पत्रिका के साक्षात्कार में उन्होने बताया कि उनके पिता स्व. जयचंद चौधरी पूर्व में चौंगावड़ी पंचायत में सरपंच रह चुके थे। वहीं, वे खेती का काम भी किया करते थे। पन्नाधाय के बलिदान पर आधारित इस कविता को कवि चौधरी ने करीब चार वर्ष पूर्व कलमबद्ध किया।

इस कविता को लिखने के बाद उन्होंने कई बार प्रदेशभर के कवि सम्मेलनों में भी पढ़ी। श्रोताओं ने उनकी इस कविता को खूब सराहा भी, लेकिन वर्तमान में नेहा वैष्णव के विशेष अंदाज में गाने के बाद जिस तरह कविता सुर्खियों में आई वैसी सफलता नहीं मिल पाई। इस प्रसिद्धी के लिए कवि चौधरी ने कहा कि समय से पहले एवं भाग्य से अधिक किसी को कुछ नहीं मिलता। हर चीज का एक समय निश्चित होता है।

नेहा की प्रस्तुति बेहतरीन प्रयास
उन्होंने कहा है कि नेहा द्वारा इस कविता की प्रस्तुति एक बेहतरीन प्रयास है। वहीं, कुछ शब्दों को ऊपर-नीचे कर प्रस्तुत किया गया है। हालांकि कविता का प्रस्तुतिकरण बेहद ही अच्छा है। नेहा की प्रस्तुति के बाद भी सही कविता के मर्म को आमजन ने समझा है और आज उसे देशभर में पसंद किया जा रहा है। कवि चौधरी ने पन्नाधाय के बलिदान पर आधारित इस कविता के साथ चेतक, महाराणा प्रताप सहित राजस्थान एवं मेवाड़ के इतिहास पर आधारित कविताओं को भी कलमबद्ध किया है। साथ ही इन कविताओं को उन्होंने कवि सम्मेलनों मेंभी मंच से पढ़ा है।
लक्ष्मी रेगर, संस्थाप्रधान कस्तुरबा गांधी आवासीय विद्यालय रेलमगरा