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दिन ढलते ही राजसमंद झील में बिछ जाता है मत्स्याखेट का जाल

नौचोकी पाल व सिंचाई उद्यान क्षेत्र में जाल डाल कर कतिपय युवक पकड़ रहे मछलियां, पुलिस मौन

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दिन ढलते ही राजसमंद झील में बिछ जाता है मत्स्याखेट का जाल

केस 1 : राजसमंद झील में श्री द्वारकाधीश मंदिर के पास जलघरा घाट से लेकर सिंचाई उद्यान तक 22 अक्टूबर 2017 को सैकड़ों मछलियां मृत मिली। पुलिस व मत्स्य विभाग की जांच में पता चला कि केमिकल या विस्फोटक के माध्यम से मछलियां मारी गई। बाद में नगरपरिषद द्वारा नौकायन के जरिये झील में मृत मछलियों को बाहर निकाला गया।

केस 2 : राजसमंद झील के गऊ घाट के पास 9 मई 16 को रात अज्ञात बदमाशों ने जाल डाल दिया। अल सुबह झील से जाल निकालने की भनक पर शहर के बड़ी तादाद में लोग एकत्रित हो गए। पुलिस भी पहुंच गई और पीछा किया, मगर बदमाश फरार हो गए। बाद में गोताखोर करणसिंह की मदद से जाल बाहर निकाली गई, जिसमें कुछ मछलियां मृत भी मिली और दर्जनों जीवित मछलियों को मुक्त करा झील में छोड़ा गया।

केस 3 : नौचोकी पाल के पास राजसमंद झील में 1 मई 19 को करीब डेढ़ किमी. लम्बी जाल बिछा रखी। सुबह झील में तैरने उतरे युवाओं को जाल काप ता चला। बाद में नौचोकी योग क्लब के सदस्यों ने झील में उतरकर करीब तीन घंटे के प्रयास के बाद डेढ़ किमी. लम्बी जाल बाहर निकाली। कुछ जीवित मछलियां फंस गई, जिन्हें जाल से मुक्त कर झील में छोड़ दिया।

लक्ष्मणसिंह राठौड़ @ राजसमंद

दिन ढलते ही राजसमंद झील में जाल बिछाने के बाद सूर्योदय से पहले मछलियां पकडक़र बाजार में पहुुंचाने का गोरखधंधा खुलेआम चल रहा है। श्री द्वारकाधीश मंदिर व धार्मिक आस्था के चलते राजसमंद झील में मत्स्याखेट प्रतिबंधित है, मगर अनाधिकृत तरीके से रोज मछलियां पकड़ी जा रही है। ऐतिहासिक नौचोकी पाल व सिंचाई उद्यान क्षेत्र में खुलेआम कतिपय युवक जाल मत्स्याखेट कर रहे हैं, मगर मत्स्य विभाग के साथ पुलिस व प्रशासनिक अफसर मौन साधे है। कभी जाल बिछाकर, तो कभी केमिकल व विस्फोटक से झील में मछलियां मार कर शिकार किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार भाणा- लवाणा से लेकर सिंचाई उद्यान कांकरोली व श्री द्वारकाधीश मंदिर के पास गऊ घाट क्षेत्र में दिन ढलते ही कतिपय लोग झील में हर रोज जाल बिछा कर मछलियां पकड़ी जा रही है। कुछ यही स्थिति सेवाली, नौचोकी पाल व रूण क्षेत्र में एक से डेढ़ डेढ़ किमी. लम्बी जाल डालकर मछलियों को फांसा जा रहा है। इस तरह प्रतिबंध के बावजूद राजसमंद झील से खुलेआम मत्स्याखेट किया जा रहा है।

कौन है झील का रखवाला ?
ऐतिहासिक राजसमंद झील का मालिकाना हक तो जल संसाधन विभाग का है, मगर विभाग के पास न तो पर्याप्त स्टाफ है और न ही नियमित झील की निगरानी हो रही है। दूसरी ओर मत्स्य विभाग है, मगर राजसमंद झील में मत्स्य पालन प्रतिबंधित होने से मत्स्य विभाग ने हाथ खड़े कर दिए। अवैध मत्स्याखेट पर कार्रवाई के लिए पुलिस अधिकृत है, मगर पुलिस भी नियमित निगरानी नहीं रखता। इसके चलते मत्स्याखेट के विरुद्ध कोई भी कार्रवाई नहीं हो पा रही है।

सिंचाई विभाग है जिम्मेदार
हां, राजसमंद झील में अवैध मत्स्याखेट लंबे समय से हो रहा है। इसके लिए विभाग द्वारा जिला कलक्टर को भी लिख दिया गया। झील विभाग के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। ऐसे में अवैध मत्स्याखेट पर स्थानीय पुलिस ही उनके विरुद्ध कार्रवाई कर सकती है।
अनिल कुमार जोशी, कार्यवाहक जिला मत्स्य विकास अधिकारी राजसमंद

शिकायत नहीं मिली
राजसमंद झील में मत्स्याखेट प्रतिबंधित है। किसी क्षेत्र में मत्स्याखेट हो रहा है, तो इसकी मुझे जानकारी नहीं है। अगर ऐसा हो रहा है, तो इसका पता करके आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
ओंकार बेरवाल, अधिशासी अभियंता जल संसाधन विभाग राजसमंद

करेंगे सख्त कार्रवाई
प्रतिबंध के बावजूद कहीं मत्स्याखेट हो रहा है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। राजनगर- कांकरोली थाना पुलिस को निर्देश दे दिए हैं। गश्त, निगरानी रखकर अवैध मत्स्याखेट करने वालों पर सख्त कार्रवाई करें। इसमें किसी भी तरह की बेपरवाही बर्दाश्त नहीं करेंगे।
भुवन भूषण यादव, जिला पुलिस अधीक्षक राजसमंद