
अकाल के चलते वर्ष 2001 में राजसमंद झील का पेटा निकल आया। नौचोकी पाल से सूखी झील का नजारा।
योगेश श्रीवास्तव @ राजसमन्द
ऐ खुदा रेत के सेहरा को समन्दर कर दे
या छलकती हुई आंखों को पत्थर कर दे
गजल की ये पंक्तियां हमारी खूबसूरत झील को लगे वक्त थपेड़ों को बखूबी बयां करती है। जब वह सूखी तो उसकी रूह ने समन्दर होने की दुआ की होगी या बदकिस्मती पर छलकते अश्कों को पत्थर हो जाने की गुहार भी लगाई ही होगी। कल वह सेहरा थी, आज समन्दर है। इठलाती, झूमती, गुनगुनाती। बहकती सी...महकती सी। अभी हवाओं में, फिजाओं में उसकी खूबसूरती की सरगोशियां हैं। उसके पहलू में आज हर कोई वक्त बिताना चाहता है।
जी हां, हम बात कर रहे हैं राजसमंद झील की, जो साढ़े चार दशक बाद हमारी उम्मीदों को फिर से उफान पर ले आई है। इसका बढ़ता पानी शहरवासियों की आंखों में पल-पल चमक बढ़ाए जा रहा है। हर जेहन में सवाल एक ही है, क्या इस बार झील छलकेगी? तकनीकी जानकारियां और प्रभु द्वारिकाधीश के भक्तों की अगाध आस्था ‘ना’ नहीं कहने दे रही है। 24 फीट का जलस्तर, आठ इंच गोमती का वेग और साढ़े छह फीट खारी फीडर... ये तो ताजा आंकड़े हैं। सिंचाई विभाग के जानकारों का मानना है कि एक बूंद न बरसे, तो भी 28 फीट तो हो ही जाएगा। बाकी बची उम्मीद का क्या...? भादौ तो अभी बाकी है ना! बेशक 1973 का उस मंजर का हम नजारा कर सकते हैं। जिनकी आंखों में वह दृश्य थोड़ा धुंधलाया है, वे भी फिर से ताजा करना चाहेंगे।
इसलिए अनूठी है हमारी झील
राजसमंद झील का निर्माण सन् 1660 शताब्दी में महाराणा राजसिंह ने करवाया। यह 2.82 किमी चौड़ी, 6.4 किमी लम्बी तथा 18 मीटर तक गहरी है। इसका कैचमेंट एरिया बेहद विशाल, लगभग 510 किलोमीटर का है।
23 वर्ष पहले दो फीट रह गई थी खाली
मानसून होने के कारण करीब ४२ वर्ष बाद ऐतिहासिक झील को छलकते देखने की तमन्ना पूरी हो सकती है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए झील इसी माह छलक सकती है। अभी झील को छह फीट पानी की और दरकार है।
फैक्ट फाइल
भराव क्षमता : 30 फीट
कुल भराव : 3786 एमसीएफटी
वर्तमान जलस्तर : 24 फीट
आखिरी बार झील छलकी : 1973 में
उसके बाद 1994 में जलस्तर : 28 फीट
गोमती नदी और खारी फीडर ही मुख्य स्त्रोत
झील भरने के लिए गोमती नदी व व खारी फीडर महत्वपूर्ण स्रोत हैं। मानसून होने के कारण वर्तमान में दोनों से ही पानी की आवक हो रही है। इस बार गोमती हैरतअंगेज ढंग से बही। इस कारण झील का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। झील में प्रतिदिन करीब 50 एमसीएफटी पानी आ रहा है यानि तीन दिन में कुल एक फीट पानी बढ़ रहा है। हालांकि जलस्तर बढऩे के साथ फैलाव में भी इजाफा हो रहा है, लेकिन तकनीकी अधिकारियों का कहना है कि इस वर्षाकाल में बारिश नहीं होने पर भी कम से कम चार फीट पानी आ सकता है।
चार दशक में दो बार छलकी झील
गत करीब 42 वर्ष में राजसमंद झील दो बार छलकी। पहली बार वर्ष 1973 में चादर चली थी। दुबारा छलकने के लिए दो वर्ष का इंतजार करना पड़ा। अच्छी वर्षा होने से वर्ष 1975 में यह ओवरफ्लो हुई। २३ वर्ष पूर्व वर्ष १९९४ में भी छलकने के आसार बने, लेकिन झील मात्र दो फीट खाली रहने से यह आस पूरी नहीं हो सकी थी। झील ने अपने पौने चार सौ साल के इतिहास में बुरे दिन भी देखे। वर्ष 2001 में भयंकर अकाल पड़ा और झील पूरी तरह सूख गई। इसका पेटा देखने भी लोगों को बदनसीब हुआ।
छलने की संभावना अधिक
झील में प्रतिदिन 50 एमसीएफटी पानी आ रहा है। तीन दिन में एक फीट की आवक हो रही है। झील के अगस्त अंत तक छलकने की संभावना अधिक है।
महेन्द्रसिंह चारण, अधिशासी अभियंता, जल संसाधन विभाग, राजसमंद
पूरे माह चलेगी गोमती
गोतमी में अंटालिया, केलवा, मेरड़ा, रिछेड़ तालाब व आस-पास के क्षेत्रों का पानी भी समाने लगा है। यदि वर्षा का वेग कमजोर भी पड़ जाए तो भी इसके पूरे अगस्त माह में चलने की संभावना है। अभी एक माह तक मानूसन और चलेगा। इससे भी झील के छलकने की पूरी उम्मीद है।
दिनेश श्रीमाली, समन्वयक, राजसमंद झील संरक्षक अभियान, राजसमंद
पूरे माह चलेगी खारी
नन्दसमंद में बाघेरी से पानी की आवक हो रही है। बांध पर चार इंच की चादर चल रही है। यदि वर्षा नहीं होती है, तो भी यह अपनी पूरी क्षमता से 10 दिन चल सकती है। इसके बाद भी बाद भी बाघेरी से आवक होगी। पूरे अगस्त माह में खारी के चलने की आस है। गोमती की भी यही स्थिति रह सकती है। अभी एक माह तक मानसून बाकी है। इस दौरान अच्छी बारिश की संभावना है।
Updated on:
09 Aug 2017 12:27 pm
Published on:
09 Aug 2017 12:16 pm
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