
नाथद्वारा. श्रीनाथजी मंदिर मंडल के द्वारा जब-जब विस्तार योजना के जिन्न को बोतल से बाहर लाने का प्रयास किया गया हो या यों कहें कि हाईकोर्ट का डंडा चला हो, तो उसके बाद व्यापारियों की समस्या का समाधान करने के लिए जो भी योजनाएं हैं, उनको सार्वजनिक नहीं करने के पीछे क्या मंतव्य है। यह आज तक व्यापारियों और शहरवासियों के लिए सवाल बना हुआ है।
शहर में पिछले १३ सितंबर को हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के बाद जो स्थितियां बनी उसमें मंदिर तक जाने वाले मुख्य मार्गों को चौड़ा करने की बात आई। उसके बाद प्रभावित होने वाले बाजार के लोगों ने इस पर अमल किया या यों कहें कि इसी से अपनी दुकानें बच जाएगी उस आस में चबूतरियां व टाटे हटा दिए। इनको हटाने के बाद जो उनको धूप एवं ग्राहकों को आने-जाने आदि की अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, उसका समाधान कब होगा यह किसी को नहीं पता। इससे दुकानदारों की मनस्थिति पर तो विपरीत असर पड़ ही रहा है, वहंीं जिनकी दुकानें सडक़ लेवल से काफी ऊंची है उनके यहां पर ग्राहकों को जाने में भी परेशानी हो रही है। ऐसे में सबसे अहम बात यह है कि जब मंदिर मंडल के द्वारा विस्तार योजना को विगत १२ वर्ष से भी अधिक समय पूर्व अस्तित्व में लाया गया तब भी विस्तार योजना में क्या निर्माण किया जाएगा। इसका नक्शा या मॉडल सार्वजनिक नहीं किया गया। इससे कई लोगों को आज भी अपने रोजगार से विमुख होकर परेशानी झेलनी पड़ रही है। इसमें वनमाली क्षेत्र में बनी दुकानों के दुकानदार, जिनको घोड़ा भंडार में केबिननुमा दुकानों का आवंटन किया गया भी शामिल हैं। इन दुकानों को बेदखल हुए कुछ व्यापारियों ने स्वीकार नहीं किया, जिससे वेे आज भी परेशानी में हैं। इसी प्रकार प्रथम चरण में बने श्रीवल्लभ विलास कॉटेज के पास स्थित भवनों को हटाकर उनका जब लालबाग के पास स्थित भंडारी बावड़ी के यहां पुनर्वास तो किया, परंतु वह पुनर्वास भी सुकून की नींद देने वाला नहीं था क्योंकि जिस जमीन पर मकानों का निर्माण किया गया वह जमीन कृषि भूमि है। इन सभी विपरित परिस्थितियों से पूर्व में ही सामना कर चुके मंदिर मंडल के द्वारा अब भी जो मार्ग चौड़े करने के लिए प्रस्तावित अनुमानित (टेंटेटिव) प्रारूप हाईकोर्ट में पेश किया गया, उसे पूर्व में सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया।
इसी तरह मार्ग चौड़ा करने के बाद हताहतों को बसाने के लिये विकल्प कहां और किस प्रकार निर्माण करेंगे एवं ये निर्माण कब तक पूर्ण हो जाएंगे आदि को प्रभावितों या पूरे शहर में सार्वजनिक कर बताने में क्या दिक्कत है। इससे हताहत होने वाले व्यापारी को राहत भी मिलती और शहर में असमंजस का माहौल भी नहीं बनता। साथ ही सभी का सकारात्मक सहयोग भी मिलता।
मंदिर बोर्ड की बैठक में रखूंगा
सही बात है इस बात को मैं अगली बोर्ड की बैठक में रखूंगा कि प्लान सार्वजनिक होना चाहिए।
अशोक डोगरा, बूंदी विधायक एवं सदस्य मंदिर मंडल नाथद्वारा
सार्वजनिक होनी चाहिए योजना
मैनें पूर्व में भी कहा कि जो भी योजना हो सार्वजनिक करनी चाहिए, जिससे व्यापारियों को परेशानी नहीं हो। मैं स्वयं इस बात में उनके साथ रहा हूं और रहूंगा।
कल्याणसिंह चौहान, विधायक, नाथद्वारा
पारदर्शिता बढ़ाएगी सकारात्मकता
बिल्कुल होना चाहिए, जनता को बताने में पारदर्शिता से सकारात्मकता आती है।
सत्यनारायण आचार्य, मुख्य निष्पादन अधिकारी, मंदिर मंडल नाथद्वारा
बोर्ड में आने पर ही बताना संभव
मैं अभी एक ही बैठक में गया हूं। पूरी जानकारी मिलने के बाद कि क्या प्लान है, जो बोर्ड में आएगा तो उसके बाद ही बताना संभव होगा।
पीसी बेरवाल, जिला कलक्टर, राजसमंद
Published on:
21 Sept 2017 11:58 am
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