
19 साल पहले शिलान्यास, फिर ईंट तक नहीं लगी : अटकी बेड़च का नाका परियोजना
लक्ष्मणसिंह राठौड़ @ राजसमंद
कुंभलगढ़ की पहाडिय़ों से बहकर मारवाड़ जाने वाले पानी को सहेजने व दो दर्जन से ज्यादा गांवों में पेयजल का स्थायी समाधान करने वाली बेड़च का नाका क्षेत्रीय जल प्रदाय योजना दो दशक बाद भी साकार रूप नहीं ले पाई। वर्ष 2000 में पूर्व मुख्यमंत्री हीरालाल देवपुरा ने बेड़च नाका जल प्रदाय योजना का शिलान्यास किया, मगर अभी तक जमीनी स्तर कार्य शुरू ही नहीं हो पाया। पहले वन विभाग से एनओसी के अभाव में कार्य अटका रहा। फिर राजसमंद डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) से करीब साढ़े 50 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार किया और अक्टूबर 2018 में राज्य सरकार द्वारा प्रशासनिक स्वीकृति भी दे दी गई। फिर राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद आठ माह से वित्तीय स्वीकृति जारी नहीं होने से परियोजना का कार्य शुरू ही नहीं हो पाया।
बेड़च का नाका क्षेत्रीय जल प्रदाय योजना के तहत प्रथम चरण में बांध निर्माण, इंटेक निर्माण व हैड वक्र्स की चारदीवारी के लिए राजस्थान स्तरीय एम्पावर्ड कमेटी जयपुर द्वारा 12 सितम्बर 2018 को 24 करोड़ 29 लाख 29 हजार रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति जारी कर दी। उसके बाद जन स्वास्थ्य अभियंात्रिक विभाग राजसमंद द्वारा 9 जनवरी 2019 को आरडीएमएफटी सदस्य एवं तथा खान एवं भू विज्ञान विभाग खनि अभियंता प्रथम को पत्र भेजा गया। उसके बाद न तो सदस्य सचिव द्वारा वित्तीय स्वीकृति जारी करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस वजह न तो बेड़च नाका परियोजना का निर्माण शुरू हुआ और न ही कुंभलगढ़ क्षेत्र की पहाडिय़ों से मारवाड़ में व्यर्थ बहकर जाने वाले पानी को रोका जा सका। इसके चलते न सिर्फ विभागीय, प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि राजनेताओं की नीयत भी कठघरे में आ गई है।
पेयजल का स्थायी समाधान
रिछेड़, थुरावड़, मानावतों का गुड़ा, चारभुजा, झीलवाड़ा व सैवंत्री ग्राम पंचायत से जुड़े करीब दो दर्जन से ज्यादा गांवों में पेयजल का स्थायी समाधान होगा। इस परियोजना का कार्य तीन चरण में पूरा होगा। पहले चरण में बांध निर्माण, द्वितीय चरण में फिल्टर प्लांट तथा तृतीय चरण में पेयजल टंकी व गांवों में पाइप लाइन बिछाकर जलापूर्ति करना है। बाद में बनी योजना, फिर भी पहले कार्य पूरा बेड़च का नाका परियोजना के शिलान्यास के वर्षों बाद बाघेरी नाका का प्लान बना।नाथद्वारा विधायक डॉ. सीपी जोशी की इच्छाशक्ति ने 210 गांवों के पेयजल की महत्वाकांक्षी बाघेरी परियोजना का 2003 में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के हाथों शिलान्यास करवाया और वर्ष 2006 तक बाघेरी बांध बनकर तैयार हो गया। दूसरी तरफ बेड़च नाका परियोजना अब भी कागजों से धरातल पर नहीं उतर पाई है।
सत्ता के साथ बदलती रही राजनेताओं की नीयत
बेड़च नाका परियोजना में सत्ता के साथ राजनेताओं की नीयत बदल गई। कांगे्रस नेता व पूर्व मुख्यमंत्री हीरा लाल देवपुरा ने 2000 में शिलान्यास किया। 2003 में भाजपा के सुरेंद्रसिंह राठौड़ विधायक बने, जो भाजपा सरकार में सिंचाई राज्य मंत्री होते हुए भी योजना को लागू नहीं कर पाए। फिर कांग्रेस से गणेशसिंह परमार विधायक बने तो वन विभाग से एनओसी लेने की प्रक्रिया शुरू हुई और वर्ष 2013 में ढाई करोड़ रुपए जमा करवाए। फिर आचार संहिता लग गई और वापस भाजपा के सुरेंद्रसिंह राठौड़ विधायक बन गए। 2015 से भाजपा के विधायक राठौड़ ने रूचि दिखाते हुए डीएमएफटी से बजट स्वीकृत कराया और विधानसभा चुनाव से ठीक दो माह पहले राज्य सरकार से प्रशासनिक स्वीकृति भी जारी करवा ली, मगर दिसम्बर में कांगे्रस की सरकार बन गई। उसके बाद वित्तीय स्वीकृति जारी नहीं हो पाई।
वित्तीय स्वीकृति नहीं मिली
बेड़च नाका योजना में प्रशासनिक स्वीकृति के बाद वित्तीय स्वीकृति के लिए आरडीएमएफटी सदस्य सचिव को प्रस्ताव भेज रखा है। वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद कार्य शुरू होगा। तीन चरणों में कार्य पूरा होगा, जिससे दो दर्जन से ज्यादा गांवों में पेयजल का स्थायी समाधान होगा।
निर्मल चित्तौड़ा, अधीक्षण अभियंता जन स्वास्थ्य अभियांत्रिक विभाग राजसमंद
जल्द बैठक में रखेंगे
विधानसभा व लोकसभा चुनाव की वजह से बैठक ही नहीं हो पाई। अब विधानसभा सत्र के बाद जल्द बैठक रखी जाएगी, जिसमें बेड़च नाका परियोजना की वित्तीय स्वीकृति के लिए फाइल पेश की जाएगी।
गोपाल बच्छ, सदस्य सचिव आरडीएमएफटी एवं खनि अभियंता प्रथम खान एवं भू विज्ञान विभाग
पेयजल संकट से राहत दिलाएं
बेड़च नाका परियोजना को जनहित को ध्यान में रखते हुए राजनीति से ऊपर उठकर लागू की जाए। आठ माह से वित्तीय स्वीकृति जारी नहीं होने पर जिला कलक्टर से मिले व मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है।
पृथ्वीसिंह सोलंकी, अध्यक्ष, लोक अधिकार मंच चारभुजा
क्या बोले नेता
अब तक सारे प्रयास मैंने किए
बेड़च नाका के सर्वे से लेकर वन विभाग से एनओसी तक की सारी कार्रवाई वर्ष 2015 में ही पूर्ण कर ली गई। उसके बाद भाजपा शासन में सिर्फ प्रशासनिक स्वीकृति जारी हो सकी। कुंभलगढ़ क्षेत्र की वृहद बेड़च नाका परियोजना के लिए मैं हरसंभव प्रयास कर रहा हूं।
गणेशसिंह परमार, पूर्व विधायक
आचार संहिता से अटका कार्य
मारवाड़ व्यर्थ बहकर जाने वाले पानी को रोककर क्षेत्र के गांवों में पेयजल का स्थायी समाधान होगा। इसके लिए प्रशासनिक स्वीकृति जारी होने के बाद आचार संहिता लग गई। इस वजह से वित्तीय स्वीकृति जारी नहीं हो सकी है। मैं लगातार मॉनिटरिंग कर रहा हूं और जल्द ही वित्तीय स्वीकृति जारी करवाकर कार्य शुरू करवाने के प्रयास है।
सुरेन्द्रसिंह राठौड़, विधायक कुंभलगढ़
Published on:
04 Jul 2019 11:33 am
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