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PATRIKA INVESTIGATION : पंच-सरपंच और सरकारी कार्मिक खुले में कर रहे शौच और ग्रामीणों को दे रहे घर में शौचालय बनाने की सीख

स्वच्छता अभियान के प्रेरक कहलाने वाले शिक्षक, सरपंच, वार्डपंचों के घरों में नहीं बने हैं शौचालय

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अश्वनी प्रताप सिंह/अर्जुन पालीवाल @ राजसमंद

प्रशासन जिनकी दम पर जिले में स्वच्छता अभियान का ढिंढोरा पीट रहा है और जिले को ओडीएफ घोषित करने का सपना संजो रहा है। उनकी सच्चाई सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। अभियान के तहत रोजाना सुबह मॉर्निंग फॉलोअप में दूसरों के घर स्वच्छता प्रेरक बनकर शौचालय की जानकारी लेने जा रहे कई शिक्षकों, सरपंचों, वार्डपंचों के घर पर ही शौचालय नहीं बने हैं। ऐसे में जिले में चल रहा स्वच्छता अभियान कितना कागजी है इसका अंदाजा आज स्वयं लगा सकते हैं।

चुनाव के दौरान भी बोला झूठ!
पत्रिका टीम ने शौचालय की जानकारी लेने के लिए जब जनप्रतिनिधियों के घरों हकीकत जानी तो कई झूठ उजागर हुए। चुनाव के दौरान सभी जनप्रतिनिधियों ने घर में शौचालय होने का शपथ पत्र दे रखा है, जिसमें घर में शौचालय होने तथा उसका इस्तेमाल किए जाने का हवाला दिया जाता है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों का यह झूठ भी उजागर होता है कि उन्होंने चुनाव के दौरान भी झूठा शपथ पत्र दिया होगा।

केस 1 : निर्मल ग्राम पंचायत एमड़ी में रहने वाले शिक्षक रूपलाल के घर शौचालय नहीं है। पत्रिका टीम रविवार को उनके घर पहुंची तो वह मौके पर नहीं मिले। उनकी मां ने बताया कि पूर्व में बीपीएल के तहत मेरे नाम का एक शौचालय बना था लेकिन वह भी इस्तेमाल लायक नहीं है। टीम ने जब शौचालय देखा तो उसमें भंगार भरा हुआ था।
केस 2 : पीपली आचार्यान सरपंच एजी बाई के घर शौचालय नहीं बना है। पत्रिका टीम ने जब उनसे पूछा की आपके घर शौचालय कहां बना है। इस पर उन्होंने कहा कि शौचालय मेरे जेठ के घर हैं, हम उसी का इस्तेमाल करते हैं। इस पर टीम आधा किमी दूर बने उनके जेठ के घर पहुंची, तो सरपंच का यह दावा भी झूठा साबित हुआ। जेठ के मकान में शौचालय जरूर बना मिला लेकिन उसका बनने के बाद से इस्तेमाल ही नहीं हुआ पाया गया। उसके डब्ल्यूसी के अंदर मिट्टी व अन्य कचरा भरा था।

केस 3 : मोही पंचायत के पांडोलाई गांव के वार्ड १३ की वार्डपंच पारसी देवी के घर शौचालय नहीं है। टीम जब उनके घर पहुंची तो घर में उनकी बेटी मिली। बेटी ने बताया कि उसके घर शौचालय नहीं बना है। गांव के ग्रामीणों ने बताया कि गांव में ४२ घर हैं और महज १५ घरों में ही शौचालय बने हैं। ग्रामीण शौचालय बनवाना भी चाहते हैं लेकिन अनुदान नहीं मिल रहा है। इसीतरह पीपली आचार्यान के वार्ड ४ के वार्डपंच छगनलाल पूर्बिया के यहां भी शौचालय नहीं बना हुआ है। टीम को घर पर उनकी मां मिलीं, मां ने बताया कि अब शौचालय बनवाया जाएगा।

निकालना गलत है...
इस तरह मां को बेटे या बहू घर से नहीं निकाल सकते। फिरभी ऐसा है तो पता करवाता हूं।
गजानंद जांगिड़,तहसीलदार, राजसमंद

टीम भेजकर पता करेंगे...
जनप्रतिनिधियों और सरकारी अध्यपकों के घर शौचालय नहीं बने हैं तो गम्भीर है। हम टीम भेजकर इस बात का पता करवाएंगे।
गोविंदसिंह राणावत, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, राजसमंद