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सड़कों पर ‘मौत का बोझ’: ओवरलोड ट्रकों से हर पल हादसे का खतरा,बेलगाम रफ्तार और लापरवाही से लोगों की सांसें अटकी

राजसमंद. जिले की सड़कों पर इन दिनों दौड़ रहे मार्बल से भरे ट्रक, ट्रेलर और डम्पर मानो ‘मौत का बोझ’ ढो रहे हैं। क्षमता से कई गुना अधिक पत्थरों से लदे ये भारी वाहन न सिर्फ यातायात नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं, बल्कि हर पल किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं। […]

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राजसमंद. जिले की सड़कों पर इन दिनों दौड़ रहे मार्बल से भरे ट्रक, ट्रेलर और डम्पर मानो ‘मौत का बोझ’ ढो रहे हैं। क्षमता से कई गुना अधिक पत्थरों से लदे ये भारी वाहन न सिर्फ यातायात नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं, बल्कि हर पल किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं। जिला मुख्यालय सहित आसपास के व्यस्त मार्गों पर दिनभर आमजन की आवाजाही रहती है, लेकिन इन ओवरलोड वाहनों की बेलगाम रफ्तार और लापरवाही से लोगों की सांसें अटकी रहती हैं। कई ट्रकों की हालत इतनी जर्जर है कि चलते-चलते पत्थर गिरने का खतरा बना रहता है। ऐसे में बाइक सवार, पैदल राहगीर और छोटे वाहन चालकों की जान हर पल जोखिम में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार ओवरलोड ट्रकों के कारण सड़कें भी तेजी से क्षतिग्रस्त हो रही हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ जाता है। बावजूद इसके, जिम्मेदार विभागों की ओर से न तो नियमित जांच हो रही है और न ही सख्त कार्रवाई।

डम्पर और ट्रकों की वजन सीमा क्या कहती है नियमावली?

परिवहन नियमों के अनुसार हर वाहन की एक तय ग्रॉस व्हीकल वेट यानी कुल वजन सीमा निर्धारित होती है, जिसमें वाहन का अपना वजन और लोड दोनों शामिल होते हैं।

  • सामान्य 10-व्हीलर ट्रक: लगभग 25 से 28 टन तक
  • 12-व्हीलर ट्रक: करीब 31 टन
  • मल्टी-एक्सल ट्रेलर: 40 टन या उससे अधिक (मॉडल अनुसार)
  • डम्पर (निर्माण कार्य में उपयोग): आमतौर पर 16 से 25 टन तक

नियमों के तहत इन सीमाओं से अधिक वजन ले जाना पूरी तरह अवैध है। ओवरलोडिंग करने पर भारी जुर्माना, वाहन जब्ती और ड्राइविंग लाइसेंस तक निलंबित किया जा सकता है। इसके बावजूद सड़कों पर खुलेआम इन नियमों की अनदेखी हो रही है।

जिम्मेदार कौन?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब नियम स्पष्ट हैं, तो फिर सड़कों पर यह ‘ओवरलोड का खेल’ आखिर किसकी मिलीभगत से चल रहा है? क्या परिवहन विभाग, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त जिम्मेदारी नहीं बनती कि ऐसे वाहनों पर सख्त कार्रवाई करें?

आक्रोश में आमजन, कार्रवाई की मांग

स्थानीय नागरिकों में इस लापरवाही को लेकर भारी रोष है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन ‘चलती-फिरती आफत’ पर लगाम नहीं लगाई गई, तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।