
राजसमंद. रॉयल्टी दरों में बढोतरी से जिले का मार्बल व ग्रेनाइट उद्योग अब हांफने लगा है। क्योंकि इसके लिए सरकार की ओर से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। खासकर नियमों में शिथिलता नहीं हो पाने से भी ये उद्योग अब धीरे-धीरे मंदी के कगार पर आकर खड़े हो गए हैं। इसमें सबसे अहम बात ये है कि मार्बल से निकलने वाले वेस्ट का उपयोग तो सफेद सीमेंट के रूप में हो जाता है, लेकिन ग्रेनाइट से निकलने वाले वेस्ट का उपयोग नहीं हो पा रहा है। ऐसे में इस वेस्ट के पहाड़ भी जिले में अनेक स्थानों पर देखने को मिल रहा है। इसके पीछे कारण है कि रॉयल्टी की दरें अधिक है। इसकी दरों पर सरकार ध्यान दे तो इसमें कुछ सुधार हो सकता है। अन्यथा ये उद्योग बंद हो जाएंगे। गौरतलब है कि कई खामियों के कारण पांच सौ से अधिक खदाने बंद हो चुकी है। यही हाल रहा तो आने वाले समय में और खदाने बंद होंगी। जिससे मार्बल उद्योग बंद हो सकता है।
जिले में संचालित ग्रेनाइट उद्योग में सकारात्मक बदलाव लाने की जरूरत है। क्योंकि इससे निकलने वाले वेस्ट का उपयोग नहीं हो पा रहा है। ऐसे में छोटे खंडे और वेस्ट के लिए गिटटी व ब्लॉक्स (कोबल्स) निर्माण के लिए छोटे प्लांट लगाने की जरूरत है। क्यूब साइज में पत्थर की कटाई कर उनका सही तरीके से उपयोग किया जा सकता है, जिससे वेस्टेज कम होगा और लागत भी घटेगी। ऐसे में सरकार ठोस नीति बनाकर छोटे प्लांट लगाएं ताकि वेस्ट का उपयोग किया जा सके। ऐसा किए जाने से रोजगार के भी नए अवसर स्थानीय स्तर पर खुलेंगे। क्योंकि फर्श पर लगने वाले क्यूबनूमा ब्लॉक्स यहां बनने लगेंगे तो इसकी डिमांड बढ़ जाएगी और वेस्ट का निस्तारण भी हो सकेगा।
वर्तमान ग्रेनाइट से निकलने वाले वेस्ट पर साढ़े तीन सौ टन की रॉयल्टी ली जा रही है, जो उद्योगों के लिए बड़ा संकट है। ऐसा होने से माइनिंग की प्रक्रिया महंगी हो रही है और नतीजतन उद्योगों में खर्चे की लागत दिनों दिन बढ़ती जा रही है। इसके समाधान के लिए एक ठोस नीति की जरूरत है। रॉयल्टी की दरों को तर्कसंगत तरीके से घटाने और उद्योगों को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम करना होगा। यही नहीं सफेद मार्बल के खनन में रॉयल्टी, खनन प्रक्रिया को सरल और सस्ता बनाने के लिए सरकार को कदम उठाने चाहिए।
सरकार को नियमों का सरलीकरण करना चाहिए। इसके अलावा जीएसटी की बढी दरों को कोटा स्टोन के समकक्ष करना होगा। माइनिंग क्षेत्र में ही गिटटी व कोबल्स निर्माण के छोटे प्लांट लगाने होंगे तो खातेदारी में डंप की जाने वाली वेस्ट की भारी लागत से मुक्ति मिल सकेगी। गिट्टी का उपयोग ब्रॉडगेज में किया जा सकता है। जिससे ग्रेनाइट के वेस्ट का सदुपयोग हो सकेगा और काम में गति आएगी।
संजय कोठारी, सीए, राजसमंद
Updated on:
31 Jan 2025 10:35 am
Published on:
31 Jan 2025 10:33 am
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