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राजस्थान की इस झील का पानी मकानों की नींव को कर रहा खोखला…पढ़े पूरी खबर

राजसमंद. राजसमंद झील से निकलने वाली नहरें खेती को कम आबादी को ज्यादा सींच रही है। यह बात सुनने में जरूर अजीब लगेगी, लेकिन यह बात सत्य है। स्थिति यह है कि नहरें करीब पांच दशक पुरानी होने के कारण कई जगह से क्षतिग्रस्त हो गई है। इसके कारण नहरों से बहता पानी मकानों के आस-पास, खाली प्लॉट और रोड पर व्यर्थ बह रहा है, इसके कारण नहर के अंतिम छोर पर नाममात्र का पानी पहुंच रहा है।

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राजस्थान की इस झील का पानी मकानों की नींव को कर रहा खोखला...पढ़े पूरी खबर

शहर की एक कॉलोनी में भरा नहर का पानी

पिछले साल बिपरजॉय तूफान के तहत हुई बारिश, मानसून की बारिश, गोमती नदी चलने एवं खारी फीडर से लगातार पानी की आवक होने के कारण राजसमंद झील छलक गई थी। इसके पश्चात नवम्बर माह में जल वितरण समिति की बैठक हुई। बैठक में 16 नवम्बर से बायीं और दायीं नहर खोलने का निर्णय लिया गया। दायीं नहर नियत समय पर खुल गई, लेकिन बायीं नहर को खोलने वाले सिस्टम में तकनीकी खामी के चलते 19 नवम्बर को खोला गया। नहरों से लगातार पानी की निकासी जारी है। उल्लेखनीय है कि नहरों को खोला गया था तब झील का जलस्तर 29.80 फीट था। बायीं नहर को एक बार खोलने पर 28 दिन और दायीं नगर से 32 दिन पानी की निकासी की जाती है।
पांच दशक से अधिक पुरानी नहरें और सलूस
जानकारों के अनुसार झील से दो नहरें निकल रही है। इसमें जलचक्की के निकट बनी नहर स्टेट टाइम की बताई जा रही है। इससे कुछ गांवों में ही पानी पहुंचता है। इरिगेशन पाल से निकलने वाली बायीं नहर और सलूस का 1966-67 में निर्माण हुआ था। इसके पश्चात समय-समय पर नहरों की मरम्मत कराई गई थी, अब स्थिति बहुत खराब हो गई है।

फैक्ट फाइल
- 2.82 किमी. चौड़ाई और 6.4 किमी लम्बाई झील की
- 30 फीट पूर्ण गेज और 3786 एमसीएफटी भराव क्षमता
- 45 राजसमंद के गांव में 10,144 हेक्टेयर में होती सिंचाई
- 07 नाथद्वारा के गाांव की 467 हेक्टेयर में होती है सिंचाई
- 700 एमसीएफटी पीएचईडी के लिए रखा जाता है रिजर्व
चार साल पहले 39 लाख से कराई नहरें दुरुस्त
जल संसाधन विभाग की ओर से डिस्ट्रीक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट योजना के तहत दायीं नहर की मरम्मत और सुदृढिकऱण का कार्य करवाया गया था। इसके तहत 14 जून 2018 को कार्य प्रारंभ हुआ था, जो 13 मार्च 2019 को पूरा हुआ था। इस पर करीब 39,81,980 रुपए खर्च हुए थे। इसके पश्चात से इनका रख-रखाव नहीं होने के कारण नहरों के आस-पास खाली प्लॉट, मकान और रोड पर पानी व्यर्थ ही बह रहा है।

27 को बंद होगी नहर, फिर अंतिम बार खुलेगी
रबी की फसल की सिंचाई के लिए नहरें खुली हुई है। अब 27 फरवरी को बंद की जाएगी। किसानों की मांग पर 5-7 दिन बाद फिर से नहरों को फिर खोली जाएगी। इस सीजन में अंतिम बार नहर को खोला जाएगा। उल्लेखनीय है कि झील में 16.50 फीट पानी पेयजल के लिए रखा जाएगा।
रिसाव से भर रहा पानी, प्रस्ताव करा रहे तैयार
नहरों में रिसाव हो रहा है। क्षतिग्रस्त नहरों को दुरुस्त कराने के लिए प्रस्ताव तैयार करवाए जा रहे हैं। स्वीकृति मिलने पर टेण्डर आदि लगाए जाएंगे। वर्तमान में सिंचाई के लिए नहर खुली हुई है, इसे 27 को बंद किया जाएगा।
- प्रतीक चौधरी, एक्सईएन सिंचाई विभाग राजसमंद

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