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राजस्थान के इस पर्यटक स्थल पर पहुंचे हजारों लोग, यहां नहीं लगती गर्मी

चार माह बाद कुंभलगढ़ होने लगा सैलानियों से आबाद जनवरी से लेकर अप्रेल तक छाई थी सुस्ती 15 मई से दुर्ग होने लगा पर्यटकों से गुलजार

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कुंभलगढ़ दुर्ग के बाहर लगी वाहनों की कतारें

कुंभलगढ़. जनवरी के बाद क्षेत्र के पर्यटन में एकदम सुस्ती छा गई, जिसमें गत 15 मई के बाद फिर रौनक लौटती दिखाई दे रही है। वर्तमान में क्षेत्र की अधिकांश होटलें, नेशनल पार्क, दुर्ग, फिश प्वाइंट सहित अन्य पर्यटन स्थल पर्यटकों से गुलजार हैं। होटल व्यवसाइयों का मानना है कि, जनवरी और फऱवरी तो फिर भी ठीक था, लेकिन मार्च और अप्रेल तो बिल्कुल खाली गए हैं। इस दौरान पर्यटन बाजार वीरान सा रहा। हालांकि जहां ब्याव-शादी का अयोजन था वहां फिर भी चहल-पहल बनी रही। लेकिन, शेष जगहों पर सूनापन ही दिखाई दिया।

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इसलिए खींचे चले आते हैं पर्यटक

यूं तो विश्व विरासत कुंभलगढ़ किसी पहचान का मोहताज नहीं है। लेकिन, इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के साथ ही कुंभलगढ़ क्षेत्र अरावली पर्वतमालाओं के बीच होने से इसका प्राकृतिक सौंदर्य भी लोगों को बरबस अपनी ओर खींचता है। क्षेत्र की इसी सुंदरता और ठंडक के चलते पर्यटक गर्मी के दौर में भी यहां खींचे चले आते हैं। वे यहां आने के बाद सिर्फ दुर्ग ही नहीं, बल्कि यहां के अन्य रमणीय स्थलों तक भी पहुंचते हैं।

यह हैं यहां के प्रमुख पर्यटन स्थल

दुर्ग और दुर्ग परिसर में स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर, दुनिया की दूसरी सबसे लंबी ऐतिहासिक दीवार के आलावा यहां परशुराम महादेव का प्राक्रतिक गुफ़ा मंदिर, बनास नदी का उद्गम स्थल वेरों का मठ, कुंभलगढ नेशनल पार्क, फिश प्वाइंट, वन विभाग की ओर से व्यू प्वाइंट पर लगाया गया स्पोट्र्स एडवेंचर जिप लाइन औरम्यूजियम आदि प्रमुख हैं।

क्षेत्र के होटल एवं पर्यटक स्थल हुए गुलजार

वैसे तो सालभर पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है। लेकिन, गत जनवरी से अप्रेल तक क्षेत्र के पर्यटन में सुस्ती कुछ ज्यादा रही, लेकिन इस माह से क्षेत्र में पर्यटकों की चहल-पहल बढऩे से क्षेत्र की होटलें भी पर्यटकों से गुलजार होने लगी है।

भरतपाल सिंह शेखावत, अध्यक्ष, होटल एसोसिएशन कुंभलगढ़