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Video . कभी पूरे गांव के तर करती थी हलक, आज मवेशी भी नहीं पीते पानी

बावड़ी में अनदेखी के कीड़े, सूख रहे हलक, देलवाड़ा की त्रिमुखी बावड़ी बदहाल, गांव में तीन दिन से हो रही अपर्याप्त जलापूर्ति, बावड़ी के पास लगा हैंडपंप भी उगलता है बदबूदार पानी

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अश्वनी प्रतापसिंह @ राजसमंद. अकाल के समय गांव का हलक तर करने वाली त्रिमुखी बावड़ी आज अनदेखी का शिकार होकर बदहाल हो गई है। स्थिति यह है कि पानी में कीड़े पड़ गए हैं, जिससे इंसान तो क्या, इसका पानी मवेशी भी नहीं पीते। जबकि गांव में पानी की किल्लत हैं। बावड़ी के आस-पास लगे हैंडपंप भी सेजा होने से बदबूदार पानी उगलते हैं, जिससे उनका पानी भी खराब हो गया है। मामला देलवाड़ा कस्बे का है।
देलवाड़ा गांव के बस स्टैंड पर स्थित त्रिमुखी बावड़ी जो कि एक समय में पूरे गांव की प्यास बुझाने में सक्षम थी, यहां के बुर्जुग बताते हैं कि अकाल के समय में भी इसी बावड़ी से गांव में सप्लाई की जाती थी लेकिन आज वर्तमान में इसकी हालत खराब है। बावड़ी में पत्ते, प्लास्टिक की थैलियां, कचरा गिरने से पानी में कीड़े पड़ गए हैं। जिससे इसका पानी काफी बदबूदार हो गया है। जिसे मवेशी भी नहीं पी सकते। जबकि इसमें अभी भी बड़ी मात्रा में पानी है।


पड़ी है विभाग की मोटर
यहां जलदाय विभाग ने बस स्टैंड के पास, भोईवाड़ा में नए ट्यूबवेल खोद दिए और गांव में पानी की सप्लाई इनसे होने लगी। जबकि बावड़ी में आज भी विभागीय मोटर पड़ी हुई है।

दो दिन के अंतराल से मिलता है पानी
कस्बे में पेयजल का स्रोत बदहाल हो रहा है जबकि पेयजल की किल्लत है, स्थानीय लोगों का कहना है कि दो दिन के अंतराल से महज आधा घंटे पानी दिया जाता है। जिससे एक दिन की भी जरूरत पूरी नहीं होती और ग्रामीणों को हैंडपंप का सहारा लेना पड़ता है।


हैंडपंप उगल रहा बदबूदार पानी
इस बावड़ी के आस-पास जो हैंडपंप लगे हैं, उनमें बावड़ी से सेजा है, करीब तीन चार माह से इन हैंडपंपों का पानी भी बदबूदार हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां के यादव मोहल्ले का हैंडपंप पानी की किल्लत के समय लोगों का सहारा था, लेकिन अब उसमें भी बावड़ी के पानी की जैसी बदबू आती है।

अकाल के समय भी इसमें था पानी
स्थानीय निवासी प्रभातचंद पालीवाल ने बताया कि अकाल के समय भी इस बावड़ी में पानी था, विभाग द्वारा इसमें टैंकर भी डलवाए जाते थे, फिर दवा डालकर गांव में सप्लाई होती थी। पिछले तीन-चार माह से यह पूरी तरह बदहाल हो गई है, विभाग से इसकी कईबार शिकायत की, लेकिन इसकी सुध कोई नहीं ले रहा। जबकि गांव में पानी की समस्या है। इसीतरह दिलीप कुमार यादव, प्रकाश खटिक का कहना है कि बावड़ी की साफ-सफाई नहीं होने से इसका पानी मवेशी भी नहीं पीते हैं। अगर इसकी सही देखभाल हो तो अभी भी इससे गांव के कुछ हिस्से में पानी की सप्लाई की जा सकती है।