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“होली से पहले क्या इन संविदा कर्मचारियों को मिलेगा वेतन? जानिए, क्यों छह महीने से रूका है इनका मानदेय!”

जब हम खुशी-खुशी त्योहारों का आनंद ले रहे होते हैं, तो कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनके लिए ये दिन किसी डरावने सपने से कम नहीं होते।

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MNarega News

नाथद्वारा. जब हम खुशी-खुशी त्योहारों का आनंद ले रहे होते हैं, तो कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनके लिए ये दिन किसी डरावने सपने से कम नहीं होते। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत काम कर रहे संविदा कर्मचारियों का यही हाल है। पिछले छह महीनों से इन्हें एक रूपया भी नहीं मिला है। इससे वे गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं और उनकी परेशानी का अंदाजा लगाना भी कठिन है।

मानदेय के बिना त्योहारों का क्या हुआ हाल?

दशहरा, दीपावली और शिवरात्रि जैसे बड़े त्योहार मानदेय के बिना बेमज़ा हो गए। और अब होली भी सिर पर है, लेकिन इनकी आर्थिक परेशानियाँ खत्म होने का नाम नहीं ले रही। क्योंकि इन कर्मचारियों को उनका बकाया वेतन नहीं मिल रहा है। क्या कोई त्योहार बिना वेतन के सही से मन सकता है? ये सवाल वही लोग पूछ रहे हैं जिनकी हालत खस्ता हो चुकी है।

क्या है मामला?

महात्मा गांधी नरेगा संविदा कार्मिक संघ के बैनर तले देलवाड़ा ब्लॉक के संविदा कर्मचारियों ने पंचायत समिति के विकास अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें उन्होंने बताया कि वे पिछले 6 महीने से मानदेय की उम्मीद में बैठे हैं, लेकिन यह उम्मीद हर दिन टूटती जा रही है। कर्मचारियों ने बताया कि अब तक कुल 128 संविदा कर्मियों को उनके वेतन का भुगतान नहीं हुआ है। इसमें विभिन्न पदों पर कार्यरत लोग शामिल हैं—जिनमें ग्राम रोजगार सहायक, लेखा सहायक, डाटा एंट्री सहायक, कनिष्ठ तकनीकी सहायक और अन्य संविदा कर्मचारी शामिल हैं।

एसएनए पोर्टल ने बढ़ाई मुश्किलें

इनकी परेशानी का मुख्य कारण एसएनए (सिंगल नोडल अकाउंट) पोर्टल है, जो सुचारू रूप से कार्य नहीं कर रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि उनका मानदेय अगस्त 2024 से बकाया है, और अगर यह पोर्टल ठीक से काम नहीं करता, तो उन्हें उनका पैसा कभी नहीं मिलेगा। यही वजह है कि उन्होंने अधिकारियों से अपील की है कि जब तक यह पोर्टल ठीक नहीं होता, तब तक पुराने नरेगा पोर्टल के जरिए उनका भुगतान किया जाए।

क्या होली से पहले मिलेगा राहत?

संविदा कर्मचारियों ने अब पंचायत समिति के विकास अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए उनसे अपील की है कि उनकी मांग उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई जाए, ताकि होली से पहले उन्हें कुछ राहत मिल सके। कर्मचारियों ने पुरानी प्रणाली के तहत भुगतान की मांग की है ताकि उन्हें समय पर मानदेय मिल सके और वे अपने घर का खर्च चला सकें।

तो क्या होगा इन कर्मचारियों का हाल?

संविदा कर्मचारियों के पास अब केवल एक ही उम्मीद है—होली से पहले उनका मानदेय मिल जाए ताकि वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें और त्योहार की खुशी महसूस कर सकें। इस समय की सबसे बड़ी चुनौती है कि क्या अधिकारी इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान देंगे और इन कर्मचारियों को जल्द राहत देंगे?